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Chandigarh News: भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के चलते हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल बर्खास्त
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चंडीगढ़। यूटी पुलिस ने भ्रष्टाचार के मामले में शुक्रवार को हेड कांस्टेबल रणदीप सिंह और कांस्टेबल सुरेंद्र राठी को उनकी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया। मामले में बर्खास्त किए गए हेड कांस्टेबल रणदीप सिंह पर यह कार्रवाई उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच रिपोर्ट आने और सीबीआई में चल रहे भ्रष्टाचार के मामले को लेकर गई है। वहीं, कांस्टेबल सुरेंद्र राठी पर यह कार्रवाई उसके खिलाफ सीबीआई द्वारा जनवरी 2019 में दर्ज किए गए भ्रष्टाचार और पंचकूला में एक महिला के साथ दुष्कर्म के आरोप में दर्ज किए गए केस के बाद की गई है। हालांकि दोनों ही मामले अभी अंडर ट्रायल हैं।
बर्खास्त किए हेड कांस्टेबल रणदीप सिंह के खिलाफ सेवक राम ने उसके बेटों को नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ठगने की शिकायत दी थी। सेवक राम का आरोप था कि आरोपी रणदीप ने उसके बेटे को यूटी पुलिस या किसी अन्य विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लिए थे। जांच अधिकारी ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के लिए उन्हें दोषी मानते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत किया था। इसके बाद हेड कांस्टेबल रणदीप सिंह को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। लेकिन उनकी ओर से दिया गया जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। साथ ही बर्खास्त हेड कांस्टेबल पर छुट्टी के दिन भी वर्दी में हाउसिंग बोर्ड लाइट पॉइंट पर मौजूद रहने के कारण नियमित विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए थे। जिसमें भी आरोपी को दोषी पाया गया। आरोपी के तमाम मामलों को देखते हुए विभाग ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया।
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बर्खास्त किए हेड कांस्टेबल रणदीप सिंह के खिलाफ सेवक राम ने उसके बेटों को नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ठगने की शिकायत दी थी। सेवक राम का आरोप था कि आरोपी रणदीप ने उसके बेटे को यूटी पुलिस या किसी अन्य विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लिए थे। जांच अधिकारी ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के लिए उन्हें दोषी मानते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत किया था। इसके बाद हेड कांस्टेबल रणदीप सिंह को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। लेकिन उनकी ओर से दिया गया जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। साथ ही बर्खास्त हेड कांस्टेबल पर छुट्टी के दिन भी वर्दी में हाउसिंग बोर्ड लाइट पॉइंट पर मौजूद रहने के कारण नियमित विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए थे। जिसमें भी आरोपी को दोषी पाया गया। आरोपी के तमाम मामलों को देखते हुए विभाग ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया।
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