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हरियाणा हिंसाः गृह मंत्रालय, सांसद, विधायकों समेत 104 को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, रेवाड़ी
Updated Fri, 01 Apr 2016 01:09 PM IST
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जाट आरक्षण के लिए आंदोलन
- फोटो : amar ujala
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जाट आरक्षण मामले में केंद्रीय गृहमंत्रालय, आर्मी चीफ, हरियाणा के चीफ सेक्रेट्री, डीजीपी के अलावा सांसदों और विधायकों समेत 104 लोगों को नोटिस देकर तलब किया गया है। रेवाड़ी के सिविल जज (सीनियर डिविजन) की अदालत ने पेशे से कारपेंटर और मूल रूप से रेवाड़ी निवासी एक वृद्ध की तरफ से लगाई याचिका पर संज्ञान लेकर नोटिस जारी किए हैं।
मामले की सुनवाई दो मई को होगी। रेवाड़ी के नयागांव निवासी 63 वर्षीय सतबीर सिंह की तरफ से 20 फरवरी को जाट आरक्षण के दौरान हुई हिंसा, आगजनी, ट्रेन और बसों के अलावा निजी वाहनों का संचालन ठप होने और हजारों करोड़ के नुकसान के मद्देनजर यह याचिका डाली गई थी। इस पर न्यायाधीश विवेक सिंह की कोर्ट ने संज्ञान लेकर 104 लोगों को नोटिस जारी किया है।
34 हजार करोड़ का नुकसान, आजीवन चुनाव पर रोक की मांग
सतबीर सिंह ने याचिका में मांग की है कि हरियाणा सरकार की लापरवाही के चलते आंदोलन ने हिंसक रूप लिया। इसके चलते छह दिन तक प्रदेश में रेल और सड़क यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। इस दौरान सरकार के 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसकी भरपाई प्रतिवादी पक्ष बनाए 104 लोगों को करनी चाहिए। इसके अलावा सभी जन प्रतिनिधियों के आजीवन चुनाव पर रोक की मांग की है।
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आंदोलन की वजह से नहीं पहुंच पाए थे बीमार पत्नी के पास
याचिकाकर्ता ने बताया कि 20 फरवरी को वह रेवाड़ी में थे। इसी दौरान आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। दिल्ली स्थित बेटों के घर से फोन आया कि उनकी पत्नी कृष्णा देवी बीमार हैं। आंदोलन के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के कारण वह दिल्ली नहीं पहुंच सके। इसके एवज में उन्होंने एक लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की है।
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मामले की सुनवाई दो मई को होगी। रेवाड़ी के नयागांव निवासी 63 वर्षीय सतबीर सिंह की तरफ से 20 फरवरी को जाट आरक्षण के दौरान हुई हिंसा, आगजनी, ट्रेन और बसों के अलावा निजी वाहनों का संचालन ठप होने और हजारों करोड़ के नुकसान के मद्देनजर यह याचिका डाली गई थी। इस पर न्यायाधीश विवेक सिंह की कोर्ट ने संज्ञान लेकर 104 लोगों को नोटिस जारी किया है।
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34 हजार करोड़ का नुकसान, आजीवन चुनाव पर रोक की मांग
सतबीर सिंह ने याचिका में मांग की है कि हरियाणा सरकार की लापरवाही के चलते आंदोलन ने हिंसक रूप लिया। इसके चलते छह दिन तक प्रदेश में रेल और सड़क यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। इस दौरान सरकार के 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसकी भरपाई प्रतिवादी पक्ष बनाए 104 लोगों को करनी चाहिए। इसके अलावा सभी जन प्रतिनिधियों के आजीवन चुनाव पर रोक की मांग की है।
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आंदोलन की वजह से नहीं पहुंच पाए थे बीमार पत्नी के पास
याचिकाकर्ता ने बताया कि 20 फरवरी को वह रेवाड़ी में थे। इसी दौरान आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। दिल्ली स्थित बेटों के घर से फोन आया कि उनकी पत्नी कृष्णा देवी बीमार हैं। आंदोलन के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के कारण वह दिल्ली नहीं पहुंच सके। इसके एवज में उन्होंने एक लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की है।