हरियाणा विधानसभा : धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष का हंगामा, सदन में फाड़ी कृषि कानूनों की प्रतियां
- हरियाणा सरकार ने सदन में पेश किया धन्यवाद प्रस्ताव, विपक्ष का चर्चा से इनकार, वोटिंग की मांग
- कांग्रेसी विधायकों ने वेल में आकर किया बवाल, नारेबाजी, दो बार स्थगित हुआ सदन
- चेतावनी के बाद स्पीकर ने नेम कर विधायकों को बाहर किया, ध्वनि मत के साथ पारित हुआ प्रस्ताव
विस्तार
हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को केंद्र के नए कृषि कानूनों के समर्थन में लाए गए प्रदेश सरकार के ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेसी विधायक धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में चर्चा से पहले व्यक्तिगत वोटिंग करवाना चाहते थे। मगर सरकार वोटिंग से पहले चर्चा करवाने पर अड़ी रही।
पक्ष-विपक्ष की यही जिद हंगामे का कारण बन गई। इस हंगामे के दौरान केवल कांग्रेसियों ने वेल में आकर नारेबाजी की। वहीं सदन की कार्यवाही को भी कई बार बाधित किया। दो बार सदन को स्थगित करना पड़ा। अंतत : कांग्रेसी विधायकों को स्पीकर ने नेम कर सदन से बाहर कर दिया। जिसके बाद सदन में चर्चा करवाकर ध्वनि मत के साथ उसे पारित किया गया।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्र के नए कृषि कानूनों को किसानों व किसानी के प्रति हितकारी बताते हुए कहा कि इन कानूनों से किसान और सशक्त बनेगा, कृषि ढांचा भी मजबूत होगा। भविष्य में किसानों के लिए लाभकारी परिणाम सामने आएंगे और साथ ही किसानों की आय वृद्धि में भी ये कानून सहायक बनेंगे। इसलिए प्रदेश सरकार का दायित्व है कि ऐसे किसान हितकारी कृषि कानून लाने पर केंद्र का धन्यवाद किया जाए। ऐसा कहते हुए सीएम ने विधानसभा पटल पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश कर दिया।
सीएम ने कहा कि पक्ष और विपक्ष के विधायक इन कृषि कानूनों पर लंबी चर्चा करें और उसके बाद ही इस धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करें। कांग्रेसियों ने धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में चर्चा करने से इनकार कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार को यदि किसानों के हित की इतना चिंता है तो सरकार एक चौथा कानून लाकर एमएसपी की गारंटी किसानों को क्यों नहीं दे देती। इस पर सीएम व स्पीकर दोनों ने कांग्रेसी नेताओं से अपील की है कि सभी विधायकों के महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने चाहिए। इसलिए जरूरी है कि सदन में चर्चा हो।
मगर कांग्रेसी विधायकों ने इस आग्रह को ठुकरा दिया और मांग की है कि सरकार इन कानूनों पर विधायकों के सुझाव लेने से पहले उनके गुप्त मत ले लें, इसके लिए व्यक्तिगत वोटिंग करवाई जाए। कांग्रेसी इसके लिए हरियाणा विधानसभा के एक एक्ट का हवाला देने लगे।
जवाब में सीएम ने भी सदन में हरियाणा विधानसभा एक्ट की धारा-184 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ लिखा है कि पहले प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी। उसके बाद यदि जरूरी हुआ तो उस पर वोटिंग करवाई जा सकती है। इसलिए पहले कांग्रेसी विधायकों को इन कानूनों पर चर्चा करनी चाहिए। संसदीय मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने तंज कसते कहा कि यह बात समझ से परे है कि सदन के बाहर खुद को किसानों का हितैषी बताने वाले कांग्रेसी विधायक सदन के भीतर किसानों से जुड़े इन महत्वपूर्ण कानूनों पर चर्चा करने से क्यों डर रहे हैं।
गुर्जर ने कहा कि कांग्रेसी विधायक सदन में बहस करें और बताएं कि ये कानून किसानों के खिलाफ कैसे है। जवाब में पूरे तर्क के साथ हम भी बताएंगे कि ये कानून किसानों के हित में कैसे है। मगर दूसरी ओर, कांग्रेसी विधायक वेल में डटे रहे और चर्चा से इंकार कर वोटिंग की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे।
कांग्रेसी विधायकों के इसी रवैये के चलते स्पीकर ने सदन को दो बार पहले 40 मिनट और फिर 30 मिनट के लिए स्थगित किया। उसके बाद भी जब कांग्रेसी नहीं माने तो अंतत : स्पीकर ने सभी कांग्रेसी विधायकों को नेम कर बाहर कर दिया और चर्चा शुरू करवाई। इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला और निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने चर्चा के दौरान इन कानूनों पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने इन कानूनों को घोर किसान विरोधी बताया। जब पक्ष की ओर से विधायक अभय सिंह यादव, सोमबीर सांगवान, रणजीत गोलन और कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल ने सदन में कानून पर विस्तार से जानकारी देते हुए इसे किसानों के लिए लाभकारी बताया। इससे नाराज इनेलो के एकमात्र विधायक अभय चौटाला भी वाकआउट कर चले गए। भाजपा विधायकों ने भी उन पर चुटकी लेते हुए कहा कि ‘अपनी बात कही और चल दिए, जरा सुनने की आदत भी डाल लीजिए चौटाला साहब’। अंत में हंगामे, नारेबाजी और विरोध के बाद सरकार ने धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करवाया।
विधानसभा के बाहर कांग्रेसियों का प्रदर्शन
स्पीकर द्वारा नेम करने के बाहर कांग्रेसी विधायक ज्यादा नाराज हो गए। हालांकि इनेलो विधायक अभय चौटाला ने स्पीकर से गुजारिश की कि वे कांग्रेसी विधायकों को सदन में वापस बुला लें। स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने अभय से कहा कि वे भी चाहते हैं कि विपक्ष सदन में आकर विषयों पर प्रभावशाली चर्चा करें।
सीएम भी कई बार कांग्रेसियों से इस बात की गुज़ारिश कर चुके हैं। लेकिन वे चर्चा करने की बजाए सदन का माहौल लगातार खराब कर रहे थे। इसलिए उन्हें नेम किया गया है। स्पीकर ने अभय के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वे जाकर कांग्रेसियों से पूछ सकते हैं कि यदि वे सदन में संबंधित विषय पर चर्चा को तैयार हैं तो उन्हें बुला लिया जाएगा। लेकिन कांग्रेसी विधायक सदन के बाहर ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी करते रहे।