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हरियाणा रोडवेज बनेगा निगम, अब तक हड़ताल से 102 करोड़ का चूना, बिना कंडक्टर भी दौड़ी बसें

Wed, 17 Oct 2018 10:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 17 Oct 2018 10:29 PM IST
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Haryana Roadways will be built Corporation, 102 crore losses from the strike
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा सरकार रोडवेज कर्मियों की आए दिन की हड़ताल से आजिज आ चुकी है। सरकार रोडेवेज को निगम बनाने पर विचार कर रही है। जल्दी इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। निगम बनाने के अलावा सरकार बसों के संचालन को लेकर स्पेशल पर्पस व्हीकल प्राधिकरण का भी गठन करने की दिशा में काम कर रही है। 

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पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली में बसों का संचालन सरकारें निगम बनाकर ही कर रही हैं। परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 12 दिन की हड़ताल रोडवेज कर्मचारी कर चुके हैं। प्रतिदिन रोडवेज को लगभग साढ़े आठ करोड़ रुपये तक आमदनी होती है। इस लिहाज से सरकार को 102 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो चुका है।
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 रोडवेज के परिवहन विभाग का हिस्सा होने पर सारा नुकसान सीधा सरकार का होता है। रोडवेज वैसे भी घाटे में चल रहा है। इसे ढर्रे पर लाने और घाटे से उबारने के लिए निगम बनाने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। चूंकि, अभी घाटा सरकार वहन कर रही है, जिससे कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर कोई असर नहीं पड़ रहा। निगम बनने पर घाटा और फायदा सीधा कर्मचारियों से भी जुड़ा होगा। 

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Haryana Roadways will be built Corporation, 102 crore losses from the strike
haryana roadways - फोटो : फाइल फोटो

इसलिए कर्मचारियों को रोडवेज को फायदे में लाने के लिए जी तोड़ मेहनत करनी ही पड़ेगी। धनपत सिंह ने रोडवेज यूनियनों से काम पर वापस आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के राजस्व के नुकसान के साथ-साथ आम जनता को त्यौहारों के मौके पर काफी असुविधा उठानी पड़ रही है। कर्मचारी जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए तुरंत डयूटी पर लौट आएं। 

अगर कर्मचारी अड़ियल रवैया अपनाते हुए हड़ताल जारी रखते हैं तो सरकार को वैकल्पिक प्रबंध करने पड़ेंगे। ऐसे में एस्मा के तहत कार्रवाई कर कर्मचारियों को बर्खास्त कर रातों-रात कच्ची भर्ती से भी गुरेज नहीं किया जाएगा। चूंकि, सक्षम स्कीम के तहत अनेक युवा रोजगार पाने को तैयार बैठे हैं। अगर रात 12 बजे भी बुलाया जाएगा तो नौकरी पाने के लिए आएंगे।

यूनियनों की मांग नाजायज, कर्मचारियों से सरोकार नहीं
धनपत सिंह ने कहा, विडंबना है कि यह हड़ताल किसी भी यूनियन व कर्मचारी की मांग से संबंधित नहीं है, बल्कि 700 बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत न चलाने के लिए की जा रही है। किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जाने वाली कुल बसों में से 510 का टेंडर हो चुका है और 190 बसों का टेंडर होना बाकी है। पांच महीने के भीतर बसें सड़कों पर आ जाएंगी। 

इस योजना के तहत प्राइवेट ऑपरेटर बस लाएगा और ज्यादातर बस ऑपरेटर हरियाणा रोडवेज की इंजीनियरिंग कार्यशाला गुरुगाम से ही अपनी बसों को बनवाने के लिए तैयार हैं। इनमें चालक ऑपरेटर का होगा, वही चालक का वेतन देगा और बस के डीजल व मरम्मत का खर्च भी उठाएगा। बस पर कंडक्टर सरकार की तरफ से होगा और टिकटों से जो भी राजस्व आएगा सरकार के खाते में जमा होगा। यात्रा के दौरान टोल इत्यादि का खर्च सरकार वहन करेगी। बावजूद इसके सरकार को किलोमीटर स्कीम की बसों से पांच रुपये प्रति किलोमीटर का राजस्व में फायदा होगा। 

परिवहन महकमे ने बिना कंडक्टर भी दौड़ाई बसें

Haryana Roadways will be built Corporation, 102 crore losses from the strike
haryana roadways - फोटो : डेमो

 हरियाणा सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को विफल बनाने के लिए बिना कंडक्टर भी बसों को प्रदेश में दौड़ाई। इनमें सवारियों से ड्राइवर ने ही फ्लैट रेट पर किराया वसूल किया। परिवहन विभाग के अतिरिक्त निदेशक वीरेंद्र दहिया ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कुछ बसें बिना कंडक्टर के भी चलानी पड़ी। कई जगहों पर पुलिस व एसपीओ के सहयोग से बसों को चलाया गया। 

हिसार में 30 से 40 बसें अन्य विभागों के हैवी व्हीकल ड्राईवर्स की सहायता से चलाई गईं। उन्होंने कहा कि जो कोई भी कर्मचारी नेता या नेता भड़काऊ भाषण देंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी डिपो महाप्रबंधकों को एस्मा के तहत निलंबन की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। महाप्रबंधकों की कार्यप्रणाली की भी जांच जारी है। अगर किसी ने डयूटी में लापरवाही बरती होगी तो उन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

दमन के बजाए वार्ता करे सरकार : कमेटी
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य हरिनारायण शर्मा, दलबीर किरमारा, सरबत पूनिया, रमेश सैणी, राजाराम हुड्डा, ओमप्रकाश ग्रेवाल, नसीब जाखड़, नरेंद्र दिनौद, सूरजमल पाबड़ा व बलवान सिंह दोदवा ने कहा कि सरकार हड़ताली कर्मचारियों पर दमनात्मक कार्रवाई के बजाए वार्ता से हड़ताल को खत्म कराए।

 सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ही दो दिन हड़ताल आगे बढ़ाई गई है। कर्मचारी भी जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन ऐसा करने के लिए सरकार जानबूझकर मजबूर कर रही है। उधर, सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव सुभाष लांबा ने हड़ताली कर्मचारियों पर सरकार की कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इससे टकराव और बढ़ेगा। सर्व कर्मचारी संघ ने हड़ताल के समर्थन में बुधवार को जिलों पर प्रदर्शन भी किए। 

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