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हरियाणा के इतिहास में पहली बार अनोखा कारनामा, चहेतों को बांटी रेवड़ियां पड़ी गले
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 12 Apr 2017 05:02 PM IST
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हरियाणा रोडवेज की सेवाएं ठप
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा की खट्टर सरकार ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा कारनामा कर दिखाया कि रोडवेज यूनियनें आग बबूला हो गईं। अब पार पाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार बेशक, 853 रूट देने का दावा करे, लेकिन असल में 22 जिलों में लगभग चार हजार रूट परमिट निजी आपरेटरों को बांटे गए हैं, जिसे लेकर तीन दौर की वार्ता में कर्मचारी नेताओं ने सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार भी ठहराया। अब सरकार के लिए स्थिति आगे कुआं और पीछे खाई वाली है।
सरकार पीछे हटती है तो निजी आपरेटरों को कैसे समझाएगी और नहीं हटती है तो रोडवेज कर्मी स्थिति नाजुक कर देंगे। खट्टर सरकार के कार्यकाल में रूट परमिट को लेकर ये पहला बड़ा आंदोलन है। इससे पहले कर्मचारियों ने सिर्फ दो घंटे का चक्का जाम सांकेतिक तौर पर बीते वर्ष किया था। इससे पहले हुड्डा सरकार के दस साल के कार्यकाल में इन रूट परमिट को लेकर बड़े आंदोलन हुए। चूंकि हुड्डा पहले कार्यकाल में 2699 और दूसरे में 3519 निजी रूट परमिट आवंटन की पालिसी लाए थे।
दोनों ही बार हुड्डा सरकार को कर्मचारियों के विरोध के चलते कदम वापस खींचने पड़े। इससे पहले वर्ष 2000 व 2002 में चौटाला सरकार को भी दो बार ही निजी रूट परमिट की नीतियां वापस लेनी पड़ी थीं। सिर्फ एक बार ही 1993 में पूर्व सीएम भजन लाल की सरकार में 923 रूट निजी आपरेटरों को दिए जा सके थे।
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सरकार पीछे हटती है तो निजी आपरेटरों को कैसे समझाएगी और नहीं हटती है तो रोडवेज कर्मी स्थिति नाजुक कर देंगे। खट्टर सरकार के कार्यकाल में रूट परमिट को लेकर ये पहला बड़ा आंदोलन है। इससे पहले कर्मचारियों ने सिर्फ दो घंटे का चक्का जाम सांकेतिक तौर पर बीते वर्ष किया था। इससे पहले हुड्डा सरकार के दस साल के कार्यकाल में इन रूट परमिट को लेकर बड़े आंदोलन हुए। चूंकि हुड्डा पहले कार्यकाल में 2699 और दूसरे में 3519 निजी रूट परमिट आवंटन की पालिसी लाए थे।
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दोनों ही बार हुड्डा सरकार को कर्मचारियों के विरोध के चलते कदम वापस खींचने पड़े। इससे पहले वर्ष 2000 व 2002 में चौटाला सरकार को भी दो बार ही निजी रूट परमिट की नीतियां वापस लेनी पड़ी थीं। सिर्फ एक बार ही 1993 में पूर्व सीएम भजन लाल की सरकार में 923 रूट निजी आपरेटरों को दिए जा सके थे।
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वार्ता के दरवाजे खुले : पंवार
रोडवेज का चक्का जाम
- फोटो : अमर उजाला
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि रोडवेज कर्मियों के लिए वार्ता के दरवाजे हर वक्त खुले हैं। सरकार के लिए प्रदेश वासियों के साथ ही कर्मचारियों के हित भी सर्वोपरि हैं।
टस से मस नहीं सरकार
उधर, सरकार ने कर्मचारियों से वार्ता के बाद अपना रुख बिल्कुल नहीं बदला है। परिवहन मंत्री ने 853 निजी बस ऑपरेटरों को तत्काल जीपीएस सिस्टम लगाने के निर्देश दे दिए हैं। पंवार ने बताया कि जीपीएस सिस्टम लगवाने के बाद यदि कोई परमिटधारक अपना रूट छोड़कर किसी अन्य रूट पर बस चलाता है तो उसकी एक लाख रुपये की जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। परमिट धारकों को अपनी बसों में 39 श्रेणियों के उन पास धारकों को भी बिठाना होगा, जिन्हें हरियाणा परिवहन की बसों में मुफ्त या किफायती यात्रा सुविधा प्राप्त है। कोई बस संचालक इन्हें बिठाने से इंकार करेगा तो परमिट रद्द कर दिया जाएगा।
1669 आवेदन अभी लंबित
कर्मचारी संगठनों की आपत्ति 17 फरवरी 2017 की नीति को लेकर है। इस समय 273 रूटों पर 853 बसें चल रही हैं और सभी ने नए सिरे से परमिट लिए हैं। ये परमिट देते समय उन्हीं को प्राथमिकता दी गई है, जो पहले से बसें चला रहे थे। इनमें से 80 प्रतिशत रूट और परमिटधारक पुराने हैं, जबकि 20 प्रतिशत इधर से उधर गए हैं। इसके अलावा 1669 आवेदन और प्राप्त हुए हैं, जिनमें से किसी को अभी नया रूट नहीं दिया गया है। नई परिवहन नीति का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिस पर आगामी 20 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
टस से मस नहीं सरकार
उधर, सरकार ने कर्मचारियों से वार्ता के बाद अपना रुख बिल्कुल नहीं बदला है। परिवहन मंत्री ने 853 निजी बस ऑपरेटरों को तत्काल जीपीएस सिस्टम लगाने के निर्देश दे दिए हैं। पंवार ने बताया कि जीपीएस सिस्टम लगवाने के बाद यदि कोई परमिटधारक अपना रूट छोड़कर किसी अन्य रूट पर बस चलाता है तो उसकी एक लाख रुपये की जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। परमिट धारकों को अपनी बसों में 39 श्रेणियों के उन पास धारकों को भी बिठाना होगा, जिन्हें हरियाणा परिवहन की बसों में मुफ्त या किफायती यात्रा सुविधा प्राप्त है। कोई बस संचालक इन्हें बिठाने से इंकार करेगा तो परमिट रद्द कर दिया जाएगा।
1669 आवेदन अभी लंबित
कर्मचारी संगठनों की आपत्ति 17 फरवरी 2017 की नीति को लेकर है। इस समय 273 रूटों पर 853 बसें चल रही हैं और सभी ने नए सिरे से परमिट लिए हैं। ये परमिट देते समय उन्हीं को प्राथमिकता दी गई है, जो पहले से बसें चला रहे थे। इनमें से 80 प्रतिशत रूट और परमिटधारक पुराने हैं, जबकि 20 प्रतिशत इधर से उधर गए हैं। इसके अलावा 1669 आवेदन और प्राप्त हुए हैं, जिनमें से किसी को अभी नया रूट नहीं दिया गया है। नई परिवहन नीति का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिस पर आगामी 20 अप्रैल को सुनवाई होनी है।