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विवादों के घेरे में आया हरियाणा का पुलिस विभाग, करोड़ों के घपले की गृह मंत्री विज से शिकायत

Mon, 02 Mar 2020 02:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Mar 2020 02:53 AM IST
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Haryana Police Department in dispute
Anil vij

हरियाणा पुलिस विभाग बीट बॉक्स, बैरिकेड्स, पीसीआर शेल्टर पर निजी कंपनियों, बैंकों, कोचिंग संस्थानों और बीमा निगमों के मोटे विज्ञापनों को लेकर विवादों में घिर गया है। पुलिस की इन संपत्तियों पर बड़े-बड़े विज्ञापन 12 महीने लगे रहते हैं, लेकिन इनसे कितनी आय सरकार को हो रही है, पुलिस विभाग के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। आरटीआई से जानकारी मांगने पर यह खुलासा हुआ है।

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शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष व पूर्व चेयरमैन विजय बंसल ने पुलिस विभाग से इस संबंध में आरटीआई से जानकारी मांगी थी, जिसका विभाग ने गोलमोल जवाब दिया। जवाब में विभाग यह बताने में असफल रहा कि विज्ञापनों से कितनी आय हो रही है। इसकी टेंडर प्रक्रिया क्या है, निजी कंपनियां, बैंक व अन्य संस्थान पुलिस को बीट बॉक्स, बैरिकेड्स, पीसीआर शेल्टर पर विज्ञापन कैसे देते हैं। स्पष्ट जानकारी न मिलने पर बंसल ने गृह मंत्री अनिल विज को ज्ञापन के जरिये करोड़ों रुपये का विज्ञापन घोटाला होने की शिकायत करते हुए जांच कराने की मांग की है।
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प्रदेश में हजारों जगह हरियाणा पुलिस के बीट बॉक्स, पीसीआर शेल्टर, नाकों व अन्य जगहों पर निजी बैंकों, निजी शिक्षण संस्थानों, इंडस्ट्री व निजी कंपनियों के विज्ञापन प्रदर्शित किए जाते हैं। नियमानुसार सरकारी संपत्ति पर किसी निजी कंपनी का विज्ञापन नहीं लगाया जा सकता है। यह तभी संभव है यदि विज्ञापन वाला सामान कंपनियों व संस्थानों ने कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत उपलब्ध कराया है। पुलिस विभाग ने आरटीआई में यह साफ कर दिया है कि सरकारी खर्च पर बैरिकेड्स, बीट बॉक्स व पीसीआर शेल्टर बनाए गए हैं।
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राशि का रिकॉर्ड न होने से गोलमाल का अंदेशा
पुलिस विभाग के पास किसी निजी कंपनी व अन्य संस्थानों का विज्ञापन लगने से प्राप्त होने वाली राशि का कोई रिकॉर्ड न होने से गोलमाल का अंदेशा है। चूंकि, विभाग अनुसार विज्ञापनों के लिए न कोई टेंडर होता है, न ही कोई प्रक्रिया है, न सरकार को कोई आय है, न कोई राशि एकत्रित की जाती है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि किसके संरक्षण में ये मोटे विज्ञापन लग रहे हैं।

आरटीआई में जो पूछा-वह नहीं दिया जवाब

शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने हरियाणा पुलिस के डीजीपी से आरटीआई में विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जिसमें बीट बॉक्स, पीसीआर शेल्टर, नाकों व अन्य जगह लगने वाले पुलिस बैरिकेड्स, साइन बोर्ड्स व नोटिस बोर्ड पर लगने वाले विभिन्न कंपनियों आदि के विज्ञापनों को लगाने की क्या प्रक्रिया है। प्रति वर्ष कुल कितनी आय होती है, कब-कब टेंडर निकाला गया, किस-किस कंपनी को किस आधार पर स्थान आवंटित हुआ, विज्ञापनों से होने वाली आय, एकत्रित राशि को कहां व किन योजनाओं में खर्च किया जाता है। इस पर पुलिस विभाग ने विज्ञापनों से होने वाली आय, टेंडर व किस प्रक्रिया के तहत निजी कंपनियों के विज्ञापन लगाए जाते है का जवाब नहीं दिया। जवाब में सिर्फ ये बताया कि सरकारी खर्च से ही यह सामान खरीदा जाता है और किसी भी फर्म से बीट बॉक्स व बैरिकेड्स नहीं रखवाए जाते।

जांच कराकर दोषियों पर करें कार्रवाई : बंसल
गृह मंत्री अनिल विज से विजय बंसल ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच करवाकर सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। विभिन्न कंपनियों के विज्ञापन तुरंत प्रभाव से हटाएं। सरकार को हुए राजस्व के नुकसान की भरपाई विभिन्न कंपनियों को जुर्माना लगाकर करें। इसके साथ ही सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी निजी कंपनी का विज्ञापन बिना मंजूरी के प्रदर्शित न हो। उधर, गृह मंत्री अनिल विज के पास अभी विज्ञापन घोटाले का ज्ञापन नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ज्ञापन पहुंचने पर सच्चाई जानेंगे। भ्रष्टाचार की आशंका होने पर जांच कराई जाएगी।

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