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जाट आंदोलन: बातचीत की राह में आया नया मोड़, मलिक के तेवर आक्रामक हुए

Sat, 25 Feb 2017 01:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Sat, 25 Feb 2017 01:35 PM IST
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haryana jat reservation protest, yashpal malik refused to talk to commette
जाट आरक्षण आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
27 दिन से धरने पर बैठे जाटों के साथ बातचीत की राह में नया मोड़ आ गया है। यशपाल मलिक ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए एक नई शर्त रखी है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से प्रदेश में लगातार 27वें दिन धरने जारी रहे। समिति के कार्यकर्ता अब 26 फरवरी को काला दिवस मनाने की तैयारी में जुटे है।
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वहीं इस बीच अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार की ओर से गठित ढेसी कमेटी के बीच बातचीत की राह में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। गत 20 फरवरी को पानीपत में दूसरे दौर की वार्ता के बाद समिति ने सरकार को सात दिन का समय दिया था, लेकिन अब समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने साफ कह दिया है कि सरकार बार-बार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता करने वाली कमेटी को समझौते के अधिकार नहीं दिए जाते।
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बिना अधिकारों वाली कमेटी के साथ अब कोई वार्ता नहीं होगी। हालांकि वे तीसरी बार वार्ता को भी तैयार हैं, लेकिन इस बार वार्ता सीधे सरकार से होगी। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुक्रवार को दिल्ली बाईपास स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। मलिक ने कहा कि पिछले साल फरवरी में हुए आंदोलन के बाद सरकार और समिति के बीच समझौते हुए थे, लेकिन सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया।
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इसी वजह से प्रदेश भर में फिर से धरने शुरू किए गए। अब बार-बार सरकार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उन्हें कोई अधिकार ही नहीं दिए गए। यही कारण है कि वार्ता विफल हो रही है। सरकार मृतकों के परिवारों को नौकरी देकर झूठे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करे तो धरनों पर लोगों की संख्या कम कर दी जाएगी। धरने तभी खत्म होंगे, जब मांग पूरी हो जाएंगी।

भाजपाइयों को दोषी होने के बावजूद बचाया जा रहा है

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जाट आरक्षण आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
मलिक ने मीडिया के सामने उन केसों का भी हवाला दिया, जिसमें भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं को दोषी होने के बाद भी बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार भेदभाव की नीति अपना रही है। वित्तमंत्री की कोठी जलाने पर दूसरी धारा लगाई गई है, जबकि आम आदमी का घर जलने पर दूसरी धारा। देशद्रोह की धारा लगाकर भी सरकार दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

हिंसा के राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर जिम्मेदार
मलिक ने आरोप लगाया कि फरवरी में हुई हिंसा के लिए राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर जिम्मेदार है। ग्रोवर को हिंसा भड़काने के लिए सरकार ने मंत्री बनाया है। उनके पीआरओ के बेटे का नाम भी इस में आया है, लेकिन उसे बचा लिया। सांसद राजकुमार सैनी ने भी प्रदेश में जातीय माहौल भड़काया है। भाजपा के मंत्रियों की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए।

2 मार्च को जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन
जसिया में धरनास्थल पर पहुंचे मलिक ने कोर कमेटी की बैठक लेकर 26 को काला दिवस और 2 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया। मलिक सुबह करीब 11 बजे धरनास्थल पर आए। उन्होंने करीब दो घंटे तक कोर कमेटी की बैठक लेकर आगामी रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार के साथ दो दौर पर वार्ता का कोई सकारात्मक रुख नहीं रहा है। इसके विरोध में 26 फरवरी को काला दिवस मनाया जाएगा। इसके बाद 2 मार्च को दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
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