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जाट आंदोलन: प्रकाश सिंह कमेटी की 417 पेज की रिपोर्ट, 10 खास बातें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:05 PM IST
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जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह ने सीएम को रिपोर्ट सौंपते।
- फोटो : amar ujala
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हरियाणा में विपक्ष के भारी दबाव के बीच सरकार ने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के नेतृत्व वाली जांच कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। मंत्री समूह की अनौपचारिक बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया और इसके बाद ही रिपोर्ट को हरियाणा सरकार की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। इसमें यह बात प्रमुखता से कही गई है कि जाट और गैर जाट नेताओं की बयानबाजी के कारण ही राज्य में हिंसा की आग भड़की।
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और दूसरा हिस्सा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुल 451 पन्नों की इस रिपोर्ट में से 416 पन्नों को ही सार्वजनिक किया गया है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी तथा हिसार से इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला की ओर से दिए गए भाषण को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में राजकुमार सैनी की ओर से समय-समय पर जाटों के खिलाफ दिए गए भाषण तथा इस्तेमाल की गई अभद्र शब्दावली का पूरी तरह से उल्लेख है।
साथ ही पूर्व विधायक रोशनलाल आर्य की ओर से दिलाई गई शपथ का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में साफ है कि हरियाणा में हिंसा और आगजनी की आग जाट व गैरजाट नेताओं की बयानबाजी से ही भड़की। रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा पुलिस किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तैयार नहीं थी। राज्य में मांग के अनुसार न तो पुलिस कर्मचारी मौजूद थे, न ही उनके पास आधुनिक हथियार थे।
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इतना ही नहीं, दंगों से निपटने के आधुनिक वाहन भी नहीं थे। यही नहीं, पुलिस को इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण ही हासिल नहीं था। रिपोर्ट में सवाल खड़ा किया गया है कि रोहतक में कुल 1210 एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तारियां मात्र 131 हुई हैं।
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प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और दूसरा हिस्सा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुल 451 पन्नों की इस रिपोर्ट में से 416 पन्नों को ही सार्वजनिक किया गया है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी तथा हिसार से इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला की ओर से दिए गए भाषण को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में राजकुमार सैनी की ओर से समय-समय पर जाटों के खिलाफ दिए गए भाषण तथा इस्तेमाल की गई अभद्र शब्दावली का पूरी तरह से उल्लेख है।
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साथ ही पूर्व विधायक रोशनलाल आर्य की ओर से दिलाई गई शपथ का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में साफ है कि हरियाणा में हिंसा और आगजनी की आग जाट व गैरजाट नेताओं की बयानबाजी से ही भड़की। रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा पुलिस किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तैयार नहीं थी। राज्य में मांग के अनुसार न तो पुलिस कर्मचारी मौजूद थे, न ही उनके पास आधुनिक हथियार थे।
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इतना ही नहीं, दंगों से निपटने के आधुनिक वाहन भी नहीं थे। यही नहीं, पुलिस को इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण ही हासिल नहीं था। रिपोर्ट में सवाल खड़ा किया गया है कि रोहतक में कुल 1210 एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तारियां मात्र 131 हुई हैं।
झज्जर डीसी पर की संवदेनशील टिप्पणी
यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह
- फोटो : amar ujala
रिपोर्ट में झज्जर को लेकर सबसे संवेदनशील टिप्पणियां की गई हैं। झज्जर की तत्कालीन उपायुक्त अनीता यादव पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है वह इस पद के लायक ही नहीं थी। दंगों के दौरान वह अपने दफ्तर तक ही सीमित रही। उनके रवैये के कारण पुलिस व सेना सक्रियता से काम नहीं कर पाई। रिपोर्ट में कहा गया है कि झज्जर में दंगे बढ़ते गए और पुलिस घटती गई।
कई माह पहले तैयार हो गई थी स्क्रिप्ट
हरियाणा में दंगो की स्क्रिप्ट कई माह पहले तैयार हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में ही प्रदेश के नेताओं की इस संबंध में बयानबाजी शुरू हो गई थी। इस मामले में प्रदेश का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुआ। आला अधिकारियों ने नेताओं के भाषण को गंभीरता से नहीं लिया और समय पूर्व सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए।
अफसरशाही पर तीखी टिप्पणियां
कमेटी ने 57 पुलिस, 23 प्रशासनिक और 10 फायर अधिकारियों के कामकाज पर उंगली उठाते हुए उनके विरुद्ध तीखी टिप्पणियां की हैैं। प्रकाश कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मौके पर तैनात अधिकारी दो हिस्सों में बंटे हुए थे। जातीय हिंसा में 30 लोगों की जानें गई। 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ और 1196 दुकानें जलाई गई।
सात हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए
कमेटी ने 371 वाहन फूंकने, 30 स्कूल और कॉलेज जलाने, 75 घरों को आग लगाने, 53 होटल व रेस्टोरेंट आग के हवाले करने और 29 पुलिस स्टेशन जला दिए जाने की रिपोर्ट दी है। आंदोलनकारियों ने मार्ग अवरुद्ध करने के लिए 7232 पेड़ भी काट डाले।
कई माह पहले तैयार हो गई थी स्क्रिप्ट
हरियाणा में दंगो की स्क्रिप्ट कई माह पहले तैयार हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में ही प्रदेश के नेताओं की इस संबंध में बयानबाजी शुरू हो गई थी। इस मामले में प्रदेश का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुआ। आला अधिकारियों ने नेताओं के भाषण को गंभीरता से नहीं लिया और समय पूर्व सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए।
अफसरशाही पर तीखी टिप्पणियां
कमेटी ने 57 पुलिस, 23 प्रशासनिक और 10 फायर अधिकारियों के कामकाज पर उंगली उठाते हुए उनके विरुद्ध तीखी टिप्पणियां की हैैं। प्रकाश कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मौके पर तैनात अधिकारी दो हिस्सों में बंटे हुए थे। जातीय हिंसा में 30 लोगों की जानें गई। 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ और 1196 दुकानें जलाई गई।
सात हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए
कमेटी ने 371 वाहन फूंकने, 30 स्कूल और कॉलेज जलाने, 75 घरों को आग लगाने, 53 होटल व रेस्टोरेंट आग के हवाले करने और 29 पुलिस स्टेशन जला दिए जाने की रिपोर्ट दी है। आंदोलनकारियों ने मार्ग अवरुद्ध करने के लिए 7232 पेड़ भी काट डाले।
अपने थाने और चौकियां नहीं बचा सकी पुलिस, लोगों को क्या बचाती
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह
- फोटो : amar ujala
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में उन डीएसपी, एसएचओ और चौकी इंचार्ज पर तल्ख टिप्पणी की गई है, जिनके यहां ज्यादा बवाल हुआ है या जिनके थाने और चौकियां उपद्रवियों के निशाने पर आ गए। ऐसे लोगों के लिए रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने थाने और चौकियां नहीं बचा सकी पुलिस तो आम लोगों की सुरक्षा क्या करती?
300 लोगों के बयान, सभी बोले अधिकारियों के खिलाफ
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में लोगों के नाम व बयान भी सार्वजनिक किए गए हैं, जिनसे वह कैनाल रेस्ट हाउस में मिले थे और उनके मौखिक बयान लिए थे। ऐसे 300 लोग थे, जिनमें व्यापारी, वकील, उद्यमी, समाजसेवी, नेता शामिल थे। सभी ने अधिकारियों के खिलाफ बयान दिए और अधिकारियों के बारे में कहा कि उन्होंने दंगा रोकने को कोई कदम नहीं उठाया।
इसके अलावा बयानों में लोगों ने आरोप लगाया है कि एमडीयू के छात्र आंदोलन में शामिल हुए और बाद में दंगे पर उतारू हो गये। कमेटी के सामने कुछ राजनीतिक लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए, जिनमें भाजपाई ज्यादा रहे और सभी ने दंगे के लिए कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदार बताया।
इतनी लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी हुई
दंगे के दौरान 957 दुकान, 153 वाहन, 4 मंदिर एवं धर्मशाला, 24 शिक्षण संस्थान, 12 कार्यालय, 1 रेस्टोरेंट, 2 फार्म हाउस, 29 मकान, 40 शिप गोट्स, 3 ट्रांसफार्मर एवं जनरेटर, 1 गोदाम, 43 होटल एवं मैरिज होम, 10 पेट्रोल पंप, 7 अस्पताल, 6 मॉल्स, 2 एटीएम को नुकसान पहुंचाया गया। प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 30 अप्रैल तक 1210 केस दर्ज हुए और 131 की गिरफ्तारी की गई है।
300 लोगों के बयान, सभी बोले अधिकारियों के खिलाफ
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में लोगों के नाम व बयान भी सार्वजनिक किए गए हैं, जिनसे वह कैनाल रेस्ट हाउस में मिले थे और उनके मौखिक बयान लिए थे। ऐसे 300 लोग थे, जिनमें व्यापारी, वकील, उद्यमी, समाजसेवी, नेता शामिल थे। सभी ने अधिकारियों के खिलाफ बयान दिए और अधिकारियों के बारे में कहा कि उन्होंने दंगा रोकने को कोई कदम नहीं उठाया।
इसके अलावा बयानों में लोगों ने आरोप लगाया है कि एमडीयू के छात्र आंदोलन में शामिल हुए और बाद में दंगे पर उतारू हो गये। कमेटी के सामने कुछ राजनीतिक लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए, जिनमें भाजपाई ज्यादा रहे और सभी ने दंगे के लिए कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदार बताया।
इतनी लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी हुई
दंगे के दौरान 957 दुकान, 153 वाहन, 4 मंदिर एवं धर्मशाला, 24 शिक्षण संस्थान, 12 कार्यालय, 1 रेस्टोरेंट, 2 फार्म हाउस, 29 मकान, 40 शिप गोट्स, 3 ट्रांसफार्मर एवं जनरेटर, 1 गोदाम, 43 होटल एवं मैरिज होम, 10 पेट्रोल पंप, 7 अस्पताल, 6 मॉल्स, 2 एटीएम को नुकसान पहुंचाया गया। प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 30 अप्रैल तक 1210 केस दर्ज हुए और 131 की गिरफ्तारी की गई है।