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हरियाणा हिंसाः प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर गरमाई सियासत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 25 May 2016 10:26 AM IST
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जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह ने सीएम को रिपोर्ट सौंपते।
- फोटो : amar ujala
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार की किरकिरी होने लगी है। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में देरी और इसके लिए केवल अधिकारियों को जिम्मेवार ठहराये जाने पर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। इनेलो और कांग्रेस के नेताओं ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में कमेटी के औचित्य पर सवाल उठाते हुए अपने लोगों को बचाने के लिए इसके गठन की बात कही है।
बावजूद इसके रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने पर इनेलो ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि यह साफ इशारा करता है कि इसके पीछे कुछ लोग खड़े थे, जिन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला ने पत्रकारों को बताया कि विधान सभा में उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष जाट आरक्षण आंदोलन मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी। ऐसे में यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कमेटी के नेतृत्व में कमेटी गठित करने का क्या औचित्य था।
कमेटी की ओर से जांच रिपोर्ट सौँपने के बाद इसे सार्वजनिक करने में देरी और राजनीति दबाव का आरोप लगाया जाना इस बात की ओर से इशारा है कि इसके पीछे कुछ लेाग खड़े थे। उन्होंने कहा कि आंदोलन के मारे गए नौ निर्दोष बताए गए, जबकि शेष को आखिरकार किस आधार पर दोषी मान लिया गया। उधर, कांग्रेस के विधायक करण दलाल ने भी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कार्य संचालन नियम-1977 की अनदेखी की गई।
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इस पूरे प्रकरण के लिए सरकार ने अधिकारियों को जिम्मेवार ठहरा दिया, लेकिन यह सरकार की ओर से रची साजिश है। नियम का हवाला देते हुए करण दलाल ने कहा कि इसके तहत सरकार की जिम्मेवारी पहले हैं, जिसमें हुई अनदेखी को छुपाने के लिए यह कमेटी गठित की गई, जिसका कोई सांवैधानिक अस्तित्व नहीं है। उन्होंने इसके लिए सरकार पर पूरी जिम्मेवारी थोपते हुए गृह मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की भी मांग की।
दलाल ने बताया कि उन्होंने इस नियम के तहत कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर प्रदेश के राज्यपाल एवं पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट को भी पत्र भेज दिया है। इस बारे में प्रदेश के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि सरकार सभी दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी। उन्होंने प्रकाश सिंह कमेटी पर राजनीतिक दबाव बनाए से भी इंकार किया।
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बावजूद इसके रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने पर इनेलो ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि यह साफ इशारा करता है कि इसके पीछे कुछ लोग खड़े थे, जिन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला ने पत्रकारों को बताया कि विधान सभा में उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष जाट आरक्षण आंदोलन मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी। ऐसे में यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कमेटी के नेतृत्व में कमेटी गठित करने का क्या औचित्य था।
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कमेटी की ओर से जांच रिपोर्ट सौँपने के बाद इसे सार्वजनिक करने में देरी और राजनीति दबाव का आरोप लगाया जाना इस बात की ओर से इशारा है कि इसके पीछे कुछ लेाग खड़े थे। उन्होंने कहा कि आंदोलन के मारे गए नौ निर्दोष बताए गए, जबकि शेष को आखिरकार किस आधार पर दोषी मान लिया गया। उधर, कांग्रेस के विधायक करण दलाल ने भी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कार्य संचालन नियम-1977 की अनदेखी की गई।
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इस पूरे प्रकरण के लिए सरकार ने अधिकारियों को जिम्मेवार ठहरा दिया, लेकिन यह सरकार की ओर से रची साजिश है। नियम का हवाला देते हुए करण दलाल ने कहा कि इसके तहत सरकार की जिम्मेवारी पहले हैं, जिसमें हुई अनदेखी को छुपाने के लिए यह कमेटी गठित की गई, जिसका कोई सांवैधानिक अस्तित्व नहीं है। उन्होंने इसके लिए सरकार पर पूरी जिम्मेवारी थोपते हुए गृह मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की भी मांग की।
दलाल ने बताया कि उन्होंने इस नियम के तहत कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर प्रदेश के राज्यपाल एवं पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट को भी पत्र भेज दिया है। इस बारे में प्रदेश के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि सरकार सभी दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी। उन्होंने प्रकाश सिंह कमेटी पर राजनीतिक दबाव बनाए से भी इंकार किया।