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मुआवजे के मरहम से जाटों को साधने में जुटी सरकार, शक्ति प्रदर्शन आज
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 19 Feb 2017 01:04 AM IST
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हरियाणा जाट आंदोलन
- फोटो : File Photo
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने निर्णय लिया है कि पिछले वर्ष जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों को मुआवजा जारी किया जाए। इसके तहत गोली से घायल लोगों को एक लाख रुपये की अदायगी की जाएगी।
वहीं गोली की चोट के बिना घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये की अदायगी होगी। जबकि मामूली चोट वालों को 25,000 रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। इस तरह हरियाणा सरकार ने 19 फरवरी को नए सिरे से आंदोलन की तैयारी कर रहे सूबे के जाटों को मुआवजे के सहारे साधने की कोशिश की है। जाट उग्र न हों, इसके लिए रणनीतिकारों के साथ बातचीत कर घायल आंदोलनकारियों को मुआवजे की घोषणा की गई है। यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि सरकार जाटों के साथ है।
जाट नेता यशपाल मलिक ने दो टूक कहा है कि 19 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्नीस फरवरी के बाद ही सरकार से आगे की बातचीत की जाएगी। सरकार की यह सोच है कि किसी तरह से यह दिवस शांतिपूर्वक निपटे। उसके बाद अगले दौर की बातचीत की जाए।
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वहीं गोली की चोट के बिना घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये की अदायगी होगी। जबकि मामूली चोट वालों को 25,000 रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। इस तरह हरियाणा सरकार ने 19 फरवरी को नए सिरे से आंदोलन की तैयारी कर रहे सूबे के जाटों को मुआवजे के सहारे साधने की कोशिश की है। जाट उग्र न हों, इसके लिए रणनीतिकारों के साथ बातचीत कर घायल आंदोलनकारियों को मुआवजे की घोषणा की गई है। यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि सरकार जाटों के साथ है।
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जाट नेता यशपाल मलिक ने दो टूक कहा है कि 19 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्नीस फरवरी के बाद ही सरकार से आगे की बातचीत की जाएगी। सरकार की यह सोच है कि किसी तरह से यह दिवस शांतिपूर्वक निपटे। उसके बाद अगले दौर की बातचीत की जाए।
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सरकार के जाट नेताओं की नहीं गली दाल
दूसरी ओर आंदोलन में जुड़े रामपाल समर्थकों ने सरकार के सामने एक और समस्या खड़ी कर दी है। रामपाल समर्थकों का धरना स्थल पर पहुंचना शांत हो चुके रामपाल को आक्सीजन देने का काम साबित हो रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, लेकिन पिछले पांच साल में रामपाल समर्थक दो बार पुलिस को नाकों चने चबवा चुके हैं।
सरकार के जाट नेताओं की नहीं गली दाल
धरने पर बैठे जाट नेताओं ने भाजपा के जाट नेताओं को किनारे कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के जाटों को शांत करने के प्रयास सार्थक नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि जाट नेताओं की मांगों में आरक्षण के अलावा एक बड़ी मांग यह भी है कि पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी दी जाए और सांसद राजकुमार सैनी पर कार्रवाई हो। इसलिए 20 फरवरी की बातचीत में क्या हल निकलेगा यह देखने का विषय होगा।
सरकार के जाट नेताओं की नहीं गली दाल
धरने पर बैठे जाट नेताओं ने भाजपा के जाट नेताओं को किनारे कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के जाटों को शांत करने के प्रयास सार्थक नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि जाट नेताओं की मांगों में आरक्षण के अलावा एक बड़ी मांग यह भी है कि पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी दी जाए और सांसद राजकुमार सैनी पर कार्रवाई हो। इसलिए 20 फरवरी की बातचीत में क्या हल निकलेगा यह देखने का विषय होगा।