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हरियाणाः विधानसभा चुनाव से पहले सरकार खेलेगी बड़ा दांव, कच्चे कर्मियों को मिल सकता है तोहफा

Mon, 03 Jun 2019 10:13 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 03 Jun 2019 10:13 AM IST
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Haryana Government May Regulate Contract Employees before Assembly Elections 2019
मनोहर लाल खट्टर - फोटो : अमर उजाला
विधानसभा चुनाव 2019 से पहले हरियाणा सरकार बड़ा दांव खेल सकती है, जिसके तहत सैंकड़ों कच्चे कर्मियों को एक तोहफा मिला सकता है। कर्नाटक सरकार बनाम उमा देवी फैसले को मद्देनजर रखते हुए हरियाणा में भी नई नियमितीकरण नीति लागू की जा सकती है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दिए हलफनामे के अनुसार, अगर सरकार ने एक महीने में नीति बनाकर सौंप दी तो 100 दिन में सैकड़ों कच्चे कर्मचारी पक्के हो जाएंगे।
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प्रदेश के सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों में केंद्र की परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों को छोड़कर इस समय लगभग चालीस हजार कच्चे कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से सैकड़ों कर्मचारी ऐसे हैं, हाग दो-दो दशक से कार्यरत हैं और पक्के नहीं हुए। ये कर्मचारी प्रदेश सरकार की 2011 की नियमितीकरण नीति के तहत भी पक्के नहीं हो पाए थे।
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ऐसे कर्मचारियों के लिए ही हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार बनाम उमा देवी के फैसले को मद्देनजर रखते हुए नई नीति बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि इन्हें भी बिना किसी लाग लपेट के पक्का किया जा सके। प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली निगमों में सबसे अधिक कच्चे कर्मचारी कार्यरत हैं। अनेक कर्मचारी तो ऐसे हैं तो बिना पक्का हुए ही रिटायर भी हो चुके हैं।
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प्रदेश सरकार कच्चे कर्मचारियों की तादात को देखते हुए विधानसभा चुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। इसलिए हाईकोर्ट के निर्देशों को आधार बनाते हुए पात्र कच्चे कर्मियों को पक्का करने की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है।

उमा देवी मामले के अनुसार ये कर्मचारी ही होंगे पक्के

. स्वीकृत पदों में से खाली पद पर नियुक्ति हुई हो।
. दस साल की सेवा पूरी कर चुके हों, किसी मामले में दोषी न हों।
. पद जिस पर कार्यरत हैं, उसकी शैक्षणिक योग्यता पूरी करते हों
. भर्ती का विज्ञापन निकला हो, उस अनुसार ही नियुक्ति मिली हो
. इंटरव्यू या लिखित परीक्षा में भी उतीर्ण हों, सर्विस रिकॉर्ड ठीक हो

2008 से चला आ रहा पक्का होने का संघर्ष
प्रदेश के सरकारी विभागों में कार्यरत कच्चे कर्मचारी 2008 से सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले नियमितीकरण के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। अनेक बाद आंदोलन भी हुए। प्रदेश सरकारें आश्वासन देकर ही काम चलाती रहीं। 2006 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले अनुसार 2011 में बनी नीति अनुसार ही प्रदेश में कच्चे कर्मचारी अब तक पक्के हुए हैं। इस नीति में भी सैकड़ों कर्मचारी छूट गए थे।

हुड्डा सरकार की नीतियां हो चुकीं रद्द

पूर्व भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार की 2014 की नियमितीकरण नीतियों को हाईकोर्ट रद्द कर चुका है। बीते वर्ष इन नीतियों के रद्द होने से पक्का हो चुके चार हजार से अधिक कर्मचारियों पर भी कच्चा होने की तलवार लटकी हुई है। नियमितीकरण नीतियों के रद्द होने से प्रभावित कर्मचारियों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील में गई हुई है। प्रदेश सरकार ने बीते साल विधानसभा के मानसून सत्र में कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए बिल लाने का ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया था, लेकिन ऐन मौके पर मामला फंस गया।

हाईकोर्ट के निर्णय अनुसार पक्के हों कच्चे कर्मचारी : लांबा
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि हाल ही में हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले का अवलोकन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि हाईकोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग अनुसार सरकार नीति बनाकर सभी कच्चे कर्मियों को पक्का करे।
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