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Haryana: मनोहर सरकार ने परिवार पहचान पत्र को बनाया प्रतिष्ठा का सवाल, विरोध के बावजूद बना बजट का आधार
Sat, 25 Feb 2023 02:04 PM IST
निवेदिता वर्मा
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 25 Feb 2023 02:04 PM IST
सार
इस बार पेश किए गए बजट में कम से कम 30 जगह सरकार ने पीपीपी का जिक्र किया है और योजनाओं का खाका भी इसी आधार पर तैयार किया है। परिवारों की आय निर्धारित करने का फार्मूला पीपीपी के आधार पर तैयार किया गया है।
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सीएम मनोहर लाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा में युवाओं और बुजुर्गों को साधने में लगी सरकार ने परिवार पहचान पत्र को बजट का आधार बनाया है। विपक्ष के लाख विरोध के बावजूद सरकार ने इसी आधार पर बजट में योजनाओं का लाभ दिया है। अब यदि कोई गड़बड़ी होती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सरकार ने परिवार पहचान पत्र को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। इसके आधार पर सरकार ने 2047 तक के विकास का खाका खींच दिया है।
बजट में कम से कम 30 जगह सरकार ने पीपीपी का जिक्र किया है और योजनाओं का खाका भी इसी आधार पर तैयार किया है। परिवारों की आय निर्धारित करने का फार्मूला पीपीपी के आधार पर तैयार किया गया है। इसी के आधार पर आय सीमा एक लाख 80 हजार से बढ़ाकर तीन लाख तक की गई है।
चिरायु, बुढ़ापा पेंशन और आईटीआई में दाखिला लेने वाली युवतियों को 2500 देने का एलान सरकार ने इसी आधार पर किया है। निम्न आय वर्ग के लिए लागू की गई आवास योजनाओं से लेकर आय प्रमाणीकरण तक में पीपीपी को आधार बनाया गया है। दिव्यांग पेंशन, कुपोषित बच्चों का भरण पोषण, हरियाणा कौशल रोजगार निगम, स्कूलों में बच्चों के दाखिले से लेकर मुफ्त स्वास्थ्य जांच तक भी पीपीपी के आंकड़ो पर होगी।
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पीपीपी के आंकड़ों के मुताबिक 3600 बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष या उससे ज्यादा है, वह अकेले रह रहे हैं। रोचक पहलू यह है कि वृद्धावस्था सम्मान पेंशन के साथ प्रति वर्ष आय 25 हजार रुपये से कम है। अलबत्ता, ऐसे बुजुर्गों की देखभाल की सेवाआश्रम में की जाएगी। वहां वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा सहित सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बजट में इसका ऐलान किया और सेवा क्षेत्र में 7.1 फीसदी बजट की भी बढ़ोतरी की।
यहां भी पीपीपी का दख्रल
मुख्यमंत्री ने सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जातियां एवं पिछड़े वर्गों का कल्याण और अंत्योदय विभाग के लिए 10 हजार 524 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। सेवा विभाग के जरिये गरीबों, वंचितों और समाज के हाशिये पर रह रहे वर्गों के उत्थान की योजना तैयार की जाएगी। अहम पहलू यह भी है कि पीपीपी डाटा भी बुजुर्गों की सेवा में सार्थक साबित हो रहा है। मई 2022 से लेकर जनवरी 2023 तक 28 हजार 488 बुजुर्गों की स्वयता बुढ़ापा पेंशन शुरू हुई है।
अंत्योदय की अवधारणा पीपीपी के सहारे होगी पूरी
सरकार की अंत्योदय की अवधारणा पीपीपी के माध्यम से ही पूरी होगी। उत्थान योजना के तहत अंत्योदय मेलों के माध्यम से 36 हजार 993 परिवारों के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। वर्ष 2023-24 के लिए एक लाख आय तक के 2 लाख से अधिक परिवारों को कवर करने की योजना है। इन्हें स्वरोजगार के लिए बैकों से ऋण मुहैया करवाया जाएगा, जिसके लिए 2 हजार करोड़ रुपये बैकों के परामर्श से अलग रखे जाएंगे।
हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए काम किया है। पीपीपी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है। जिसके सहारे भविष्य के हरियााणा का सपना साकार होगा। हमारे पास प्रत्येक व्यक्ति का डाटा होगा कि कौन क्या लाभ ले रहा है और कौन लाभ से वंचित है। - मनोहर लाल मुख्यमंत्री हरियाणा
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बजट में कम से कम 30 जगह सरकार ने पीपीपी का जिक्र किया है और योजनाओं का खाका भी इसी आधार पर तैयार किया है। परिवारों की आय निर्धारित करने का फार्मूला पीपीपी के आधार पर तैयार किया गया है। इसी के आधार पर आय सीमा एक लाख 80 हजार से बढ़ाकर तीन लाख तक की गई है।
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चिरायु, बुढ़ापा पेंशन और आईटीआई में दाखिला लेने वाली युवतियों को 2500 देने का एलान सरकार ने इसी आधार पर किया है। निम्न आय वर्ग के लिए लागू की गई आवास योजनाओं से लेकर आय प्रमाणीकरण तक में पीपीपी को आधार बनाया गया है। दिव्यांग पेंशन, कुपोषित बच्चों का भरण पोषण, हरियाणा कौशल रोजगार निगम, स्कूलों में बच्चों के दाखिले से लेकर मुफ्त स्वास्थ्य जांच तक भी पीपीपी के आंकड़ो पर होगी।
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पीपीपी के आंकड़ों के मुताबिक 3600 बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष या उससे ज्यादा है, वह अकेले रह रहे हैं। रोचक पहलू यह है कि वृद्धावस्था सम्मान पेंशन के साथ प्रति वर्ष आय 25 हजार रुपये से कम है। अलबत्ता, ऐसे बुजुर्गों की देखभाल की सेवाआश्रम में की जाएगी। वहां वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा सहित सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बजट में इसका ऐलान किया और सेवा क्षेत्र में 7.1 फीसदी बजट की भी बढ़ोतरी की।
यहां भी पीपीपी का दख्रल
मुख्यमंत्री ने सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जातियां एवं पिछड़े वर्गों का कल्याण और अंत्योदय विभाग के लिए 10 हजार 524 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। सेवा विभाग के जरिये गरीबों, वंचितों और समाज के हाशिये पर रह रहे वर्गों के उत्थान की योजना तैयार की जाएगी। अहम पहलू यह भी है कि पीपीपी डाटा भी बुजुर्गों की सेवा में सार्थक साबित हो रहा है। मई 2022 से लेकर जनवरी 2023 तक 28 हजार 488 बुजुर्गों की स्वयता बुढ़ापा पेंशन शुरू हुई है।
अंत्योदय की अवधारणा पीपीपी के सहारे होगी पूरी
सरकार की अंत्योदय की अवधारणा पीपीपी के माध्यम से ही पूरी होगी। उत्थान योजना के तहत अंत्योदय मेलों के माध्यम से 36 हजार 993 परिवारों के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। वर्ष 2023-24 के लिए एक लाख आय तक के 2 लाख से अधिक परिवारों को कवर करने की योजना है। इन्हें स्वरोजगार के लिए बैकों से ऋण मुहैया करवाया जाएगा, जिसके लिए 2 हजार करोड़ रुपये बैकों के परामर्श से अलग रखे जाएंगे।
हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए काम किया है। पीपीपी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है। जिसके सहारे भविष्य के हरियााणा का सपना साकार होगा। हमारे पास प्रत्येक व्यक्ति का डाटा होगा कि कौन क्या लाभ ले रहा है और कौन लाभ से वंचित है। - मनोहर लाल मुख्यमंत्री हरियाणा