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Haryana: कर्मचारियों को लेकर दुविधा में सैनी सरकार, कार्रवाई और राहत के फैसले अटके; कैबिनेट बैठक से थी उम्मीद

Sat, 29 Jun 2024 11:36 AM IST
नवीन दलाल सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 29 Jun 2024 11:36 AM IST
सार

हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारियों से संबंधित कोई फैसला नहीं लिए जाने से एक बार फिर कर्मचारियों की आस टूट गई है और उनकी नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि, कर्मचारियों की आस नहीं टूटी है और कर्मचारी संगठन लगातार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर से मुलाकात कर रहे हैं।

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Haryana government in dilemma regarding employees, action and relief decisions stuck; there was hope from cabi
हरियाणा कैबिनेट की मीटिंग - फोटो : PTI

विस्तार

लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुकी हरियाणा सरकार अब कर्मचारियों से संबंधित फैसले लेने में पेशोपेश में हैं। चेतावनी दिए जाने के बावजूद हरियाणा सरकार ने न तो उन अधिकारियों और कर्मचारियों की कोई सूची जारी की जिन्होंने विपक्ष बोगस वोटिंग में मदद की और न ही ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकी। इसके अल्ट, कर्मचारियों की नाराजगी को देख पक्के और कच्चे कर्मचारियों को सरकार से राहत के फैसलों की आस है, लेकिन इस प्रकार के फैसले लेेने में भी सरकार झिझक रही है।

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इसका ताजा उदाहरण वीरवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक है। संभावना जताई जा रही थी कि बैठक में पक्के कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 58 साल से बढ़ाकर 60 साल की जा सकती है। इनके अलावा, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने को लेकर भी अटकलें थी। लेकिन बैठक में न तो ऐसा कोई एजेंडा लाया गया और न ही बैठक में इन मदुद्दों पर कोई चर्चा हुई। कर्मचारियों से संबंधित कोई फैसला नहीं लिए जाने से एक बार फिर कर्मचारियों की आस टूट गई है और उनकी नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि, कर्मचारियों की आस नहीं टूटी है और कर्मचारी संगठन लगातार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर से मुलाकात कर रहे हैं।
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बता दें कि हरियाणा में 2.70 लाख पक्के कर्मचारी हैं और 1.30 लाख कच्चे कर्मचारी हैं, इनको हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत समायोजित किया गया है। इनके अलावा, 12500 अतिथि अध्यापक हैं और डीसी और एडहाक रेट पर भी करीब 7 हजार कर्मचारी तैनात हैं। पहले सरकार की योजना था कि एडहाक और डीसी रेट पर तैनात कर्मचारियों को पक्का किया जाए, लेकिन अब बताया जा रहा है कि अतिथि अध्यापकों की तर्ज पर इनको समान वेतन और 58 साल तक सेवारत रहने के नियम बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनको पक्का नहीं किया जाएगा। हालांकि, अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को लेना है।
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सीएमओ में दो प्रकार की राय
सूत्रों का दावा है कि सीएमओ में कर्मचारियों को लेकर दो प्रकार की राय है। एक राय ये है कि कर्मचारियों पर अगर कार्रवाई की गई तो यह बड़ा मुद्दा बनेगा और इससे विधानसभा चुनावों में सरकार और अधिक नाराजगी झेलनी पड़ेगी। इसलिए कर्मचारियो्ं को मनाने के लिए उनको राहतें दी जाएं, ताकि उनकी नाराजगी दूर हो सके। दूसरी राय है कि कर्मचारियों ने लोकसभा चुनावों में खुलकर भाजपा की मुखालफत की है, इसलिए एकदम से राहत देकर सरकार कर्मचारियों के दबाव में कोई फैसला नहीं लेना चाहती। सरकार चाहती है कि फैसले से पहले कर्मचारी संगठनों से बैठक हों और इसके लिए सरकार से मांग रखें। लेकिन एक आशंका है कि ये भी है कि तमाम राहतें देने के बाद भी कर्मचारी भाजपा के साथ नहीं आएंगे। इसलिए तमाम पहलूओं को देखने के बाद ही सरकार कर्मचारियों को लेकर फैसला लेगी।


आउटसोर्स पालिसी 2 के कर्मचारियों ने की सीएम से मुलाकात
आउटसोर्स 2 पालिसी के तहत लगे कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात की और पक्का करने की मांग की। कर्मचारी सोसाइटी के प्रधान राम रतन, महासचिव योगेश चंद्र ने कहा कि पिछले तीन साल उनके मानदेय में भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। इनके अलावा, न तो उनकी जाॅब सिक्योरिटी है और न ही महंगाई भत्ता आदि मिल रहा है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा। इसके बाद कर्मचारियों ने सीएम के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर से भी मुलाकात कर नियमित करने की पालिसी लाने की मांग की।

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