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दिवस विशेषः हरियाणा गठन के 50 साल, पर अनसुलझे रहे ये सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Nov 2016 09:47 AM IST
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50 साल में नहीं सुलझे कुछ मुद्दे
- फोटो : File Photo
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पंजाब से अलग हुए हरियाणा को भले ही पचास साल हो गए हैं, लेकिन कई अहम मुद्दे अभी तक अनसुलझे हैं। राजनीतिक मंच हो या दोनों प्रदेशों की विधानसभा, हर सत्र में इन मुद्दों पर बहस होती है, लेकिन अनसुलझे रह जाते हैं।
एसवाईएल के पानी के लिए हरियाणा पचास साल से संघर्ष कर रहा है। पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार होने के बावजूद सूबे को अपना यह हक नहीं मिल सका है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहा है।
फिलहाल, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और दोनों प्रदेशों की सरकारों को फैसले का इंतजार है। यही हाल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और राजधानी चंडीगढ़ को लेकर है। दोनों प्रदेश के नेता चंडीगढ़ पर अपना हक जताते रहते हैं, लेकिन निष्कर्ष आज तक नहीं निकल सका।
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एसवाईएल के पानी के लिए हरियाणा पचास साल से संघर्ष कर रहा है। पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार होने के बावजूद सूबे को अपना यह हक नहीं मिल सका है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहा है।
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फिलहाल, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और दोनों प्रदेशों की सरकारों को फैसले का इंतजार है। यही हाल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और राजधानी चंडीगढ़ को लेकर है। दोनों प्रदेश के नेता चंडीगढ़ पर अपना हक जताते रहते हैं, लेकिन निष्कर्ष आज तक नहीं निकल सका।
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सतुलज यमुना लिंक नहर
सतलुज यमुना लिंक नहर
- फोटो : फाइल फोटो
उधर, सतुलज यमुना लिंक नहर और राजधानी चंडीगढ़ के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि ह मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा है। पंजाब-हरियाणा जब अलग हुए थे तो इसे मैत्रीपूर्ण ढंग से आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता था।
अब इसे जनभावनाओं से जोड़ कर जटिल बना दिया गया है। न्यायालय के निर्णय, केंद्र सरकार और दोनों राज्यों की सहमति से ही इसका समाधान संभव है। चंडीगढ़ आज भी हरियाणा की राजधानी है।
अब इसे जनभावनाओं से जोड़ कर जटिल बना दिया गया है। न्यायालय के निर्णय, केंद्र सरकार और दोनों राज्यों की सहमति से ही इसका समाधान संभव है। चंडीगढ़ आज भी हरियाणा की राजधानी है।