तीन साल में पूरी तरह पेपरलेस होगी हरियाणा विधानसभा, सालाना होगी 15 करोड़ रुपये की बचत
हरियाणा विधानसभा तीन साल के भीतर पूरी तरह पेपरलेस (कागज रहित) हो जाएगी। मानसून सत्र से विधानसभा सचिवालय सदन की कार्यवाही को कागज रहित बनाना शुरू कर देगा। विधानसभा के पेपरलेस होने से सालाना 15 करोड़ रुपये की बचत होगी। विधायकों, अधिकारियों का दल 1-2 मार्च को हिमाचल विधानसभा का दौरा करेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाने की पहल करते हुए हरियाणा देश का 16वां राज्य बन गया है। विधानसभा के विधायी कार्यों को कागज रहित बनाने की शुरुआत करने के लिए गुरुवार को राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग के तहत त्रि-पक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौता ज्ञापन पर संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव डॉ. सत्यप्रकाश खटाना, हरियाणा की ओर से कार्मिक, प्रशिक्षण सतर्कता एवं संसदीय कार्य मामले विभागों के सचिव पंकज अग्रवाल और हरियाणा विधानसभा की ओर से सचिव आरके नांदल ने हस्ताक्षर किए। गुप्ता ने कहा कि 20 करोड़ रुपये की लागत इस परियोजना पर आएगी।
12 करोड़ केंद्र देगा व आठ करोड़ राज्य सरकार खर्च करेगी। कोविड-19 के चलते इस परियोजना को सिरे चढ़ाने में कुछ देरी हुई। समझौते के तहत केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय तीन वर्ष तक विधानसभा के साथ-साथ आईटी सेल से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगा।
देश में हिमाचल प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जिसकी विधानसभा को कागज रहित कर ई-मोड पर संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के विधायकों, अधिकारियों का दल हिमाचल विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए एक व दो मार्च को शिमला अध्ययन दौरे पर जाएगा।
विधानसभा पुस्तकालय का भी होगा डिजिटलीकरण
गुप्ता ने कहा कि विधानसभा पुस्तकालय का भी डिजिटलीकरण किया जाएगा। विधानसभा की कार्यवाही के लिए बड़ी संख्या में प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अध्यादेश, विधेयक व अन्य विधायी कार्य पूरा करने के लिए सत्र के दौरान भारी मात्रा में कागज का इस्तेमाल किया जाता है। अब इस समझौते के बाद कागज की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।
अधिकारियों की ली बैठक
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता की अध्यक्षता में विधानसभा सचिवालय में केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार और विधानसभा अधिकारियों की बैठक भी हुई। इसमें विधानसभा उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा और संसदीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश खटाना भी उपस्थित रहे। एमओयू के दौरान मुख्य सचिव विजय वर्धन ने भी मौजूदगी दर्ज कराई।