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विधानसभा में उद्योगों को राहत देने के लिए 4 संशोधन विधेयक पारित
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 31 Mar 2016 12:04 PM IST
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श्रम एवं रोजगार मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने संशोधन विधेयक प्रस्तुत
- फोटो : amarujala
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हरियाणा विधानसभा में बुधवार को मजदूरी संदाय (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने संशोधन विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा है कि हरियाणा में वेतन प्रदाय अधिनियम, 1936 में अब यह शामिल किया गया है कि राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा, औद्योगिक संस्थान को निर्देश जारी कर सकती है कि वह अपनी ओर से नियुक्त व्यक्तियों को चैक के जरिये अथवा बैंक खाते में भुगतान जमा करवाएगा।
वेतन संदाय अधिनियम, 1936 जोकि एक केंद्रीय अधिनियम है, की धारा 1 की उपधारा (6) के अनुसार, केंद्र सरकार किसी औद्योगिक संस्थान में काम कर रहे किसी व्यक्ति के वेतन की सीमाएं तय करने या पुनर्निर्धारित करने के लिए सक्षम है। ऐसी मजदूरी की वर्तमान सीमा 18000 रुपये मासिक है। इस वेतन सीमा पर पांच वर्ष के बाद पुन: विचार करने का प्रावधान है। वर्तमान परिदृश्य में यह महसूस किया गया कि यह वेतन सीमा हटा दी जानी चाहिए क्योंकि हरियाणा में विनिर्माण उद्योग बहुत प्रगतिशील रहा है और उसमें वेतन की दरें सामान्यत: ऊंची हैं। इसलिए जो ऊंची दरों से वेतन ले रहे हैं, उन्हें देरी से वेतन, गैर-कानूनी कटौती के विवादों के समाधान के लिए, इस अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त अधिकारी के समक्ष दावे प्रस्तुत कर सकेंगे, इसी लिए यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक से उद्योगों को राहत
चंडीगढ़। हरियाणा में उद्योगों को सुविधा प्रदान करने के लिए 100 श्रमिकों की सीमा बढ़ाकर 300 श्रमिक करने के लिए हरियाणा विधानसभा में बुधवार को औद्योगिक विवाद (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया गया। हालांकि 300 कामगारों की सीमा पर यह शर्त है कि राज्य सरकार की संतुष्टि पर औद्योगिक शांति और श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए, आवश्यकता पड़ने पर यह प्रावधान उन औद्योगिक संस्थानों पर लागू किया जा सकता है, जिनमें 300 से कम श्रमिक हों लेकिन 100 से कम न हों।
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कारखाना अधिनियम से बाहर हुए लघु उद्योग
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में बुधवार को कारखाना (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बजट सत्र के दौरान इस विधेयक को पेश किया। यह संशोधन प्रदेश के लघु उद्योगों को कारखाना अधिनियम, 1948 के दायरे से निकालने के लिए किया गया है। इसमें यह प्रस्ताव किया गया कि बिजली की सहायता से 20 कर्मकारों वाले कारखाने और बिजली की सहायता के बिना 40 कर्मकारों वाले कारखाने को कारखाना अधिनियम, 1948 की परिभाषा से मुक्त रखा जाए।
अब 50 श्रमिकों को ठेके पर रख सकेंगे उद्योग
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में बुधवार को ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हरियाणा संशोधन विधेयक, 2016 पारित किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने इस विधेयक को पेश किया। ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हरियाणा संशोधन अधिनियम, 1970 एक केन्द्रीय अधिनियम है। वर्तमान में यह अधिनियम उन संस्थानों पर लागू है जहां 20 या अधिक ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा लचीले व्यापार की प्रवृति में उद्योगों को ऐसी स्वतंत्रता की जरूरत महसूस है जिसमें श्रमिकों को बाह्य स्त्रोत के जरिए काम पर लिया जा सके। इसमें सरकारी संस्थान भी शामिल हैं। इस जरुरत को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में वर्तमान सीमा को बढ़ाकर 50 श्रमिक कर दिया गया है। इससे मध्यम और लघु उद्योग में ठेका श्रम लगाने के लिए लचीलेपन की सुविधा होगी।
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वेतन संदाय अधिनियम, 1936 जोकि एक केंद्रीय अधिनियम है, की धारा 1 की उपधारा (6) के अनुसार, केंद्र सरकार किसी औद्योगिक संस्थान में काम कर रहे किसी व्यक्ति के वेतन की सीमाएं तय करने या पुनर्निर्धारित करने के लिए सक्षम है। ऐसी मजदूरी की वर्तमान सीमा 18000 रुपये मासिक है। इस वेतन सीमा पर पांच वर्ष के बाद पुन: विचार करने का प्रावधान है। वर्तमान परिदृश्य में यह महसूस किया गया कि यह वेतन सीमा हटा दी जानी चाहिए क्योंकि हरियाणा में विनिर्माण उद्योग बहुत प्रगतिशील रहा है और उसमें वेतन की दरें सामान्यत: ऊंची हैं। इसलिए जो ऊंची दरों से वेतन ले रहे हैं, उन्हें देरी से वेतन, गैर-कानूनी कटौती के विवादों के समाधान के लिए, इस अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त अधिकारी के समक्ष दावे प्रस्तुत कर सकेंगे, इसी लिए यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
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औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक से उद्योगों को राहत
चंडीगढ़। हरियाणा में उद्योगों को सुविधा प्रदान करने के लिए 100 श्रमिकों की सीमा बढ़ाकर 300 श्रमिक करने के लिए हरियाणा विधानसभा में बुधवार को औद्योगिक विवाद (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया गया। हालांकि 300 कामगारों की सीमा पर यह शर्त है कि राज्य सरकार की संतुष्टि पर औद्योगिक शांति और श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए, आवश्यकता पड़ने पर यह प्रावधान उन औद्योगिक संस्थानों पर लागू किया जा सकता है, जिनमें 300 से कम श्रमिक हों लेकिन 100 से कम न हों।
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कारखाना अधिनियम से बाहर हुए लघु उद्योग
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में बुधवार को कारखाना (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बजट सत्र के दौरान इस विधेयक को पेश किया। यह संशोधन प्रदेश के लघु उद्योगों को कारखाना अधिनियम, 1948 के दायरे से निकालने के लिए किया गया है। इसमें यह प्रस्ताव किया गया कि बिजली की सहायता से 20 कर्मकारों वाले कारखाने और बिजली की सहायता के बिना 40 कर्मकारों वाले कारखाने को कारखाना अधिनियम, 1948 की परिभाषा से मुक्त रखा जाए।
अब 50 श्रमिकों को ठेके पर रख सकेंगे उद्योग
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में बुधवार को ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हरियाणा संशोधन विधेयक, 2016 पारित किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने इस विधेयक को पेश किया। ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हरियाणा संशोधन अधिनियम, 1970 एक केन्द्रीय अधिनियम है। वर्तमान में यह अधिनियम उन संस्थानों पर लागू है जहां 20 या अधिक ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा लचीले व्यापार की प्रवृति में उद्योगों को ऐसी स्वतंत्रता की जरूरत महसूस है जिसमें श्रमिकों को बाह्य स्त्रोत के जरिए काम पर लिया जा सके। इसमें सरकारी संस्थान भी शामिल हैं। इस जरुरत को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में वर्तमान सीमा को बढ़ाकर 50 श्रमिक कर दिया गया है। इससे मध्यम और लघु उद्योग में ठेका श्रम लगाने के लिए लचीलेपन की सुविधा होगी।