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हरियाणा विस चुनावः मनोहर लाल ने उठाया भाजपाइयों की नाराजगी दूर करने का बीड़ा, बोले- मना लेंगे
Sun, 06 Oct 2019 11:33 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 06 Oct 2019 11:33 AM IST
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मनोहर लाल खट्टर
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अपने विधायकों की टिकट काटने को लेकर पार्टी में उठे विरोध को लेकर सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि भाजपा में किसी प्रकार का कोई विरोध नहीं है। एकाध कोई नाराज होगा तो उसे मना लिया जाएगा। भाजपा पूरी तरह से एक है, यहां पर किसी प्रकार की गुटबाजी के लिए कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जिस प्रकार से जनता का आशीर्वाद मिल रहा है, उससे लग रहा है कि वे 75 प्रकार का लक्ष्य जरूर पार करेंगे। अपनी प्राथमिकताओं के बारे में मनोहर लाल ने कहा कि दोबारा से सीएम बने तो उनकी प्राथमिकताएं शिक्षा, स्कील और स्वास्थ्य रहेंगी।
दूसरे दल छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए नए भाजपाई भी इस बात से नाराज हैं कि ‘अपना घर’ छोड़ने के बावजूद नए घर में उन्हें टिकट नहीं मिली। इसी नाराजगी को दिल में लिए ये नए भाजपाई चल तो रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं वे खुद और उनके समर्थक थोड़े मायूस हैं। उनकी इसी नाराजगी को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दूर करने का बीड़ा उठाया है। देखा जाए, तो विधानसभा चुनाव से पहले एकाएक दूसरे दलों से नेताओं ने भाजपा की ओर आकर्षित होते हुए भाजपा का दामन थामना शुरू कर दिया था।
आलम यह रहा कि हरियाणा के मुख्य विपक्षी दल इनेलो से ही बारह विधायक अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर गए। अकाली दल का भी एकमात्र विधायक ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली। कांग्रेस और इनेलो के कई पूर्व विधायकों ने भी भाजपा का दामन थामा था। अब भाजपा में आए इन विधायकों व पूर्व विधायकों को आस थी कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हें टिकट जरूर देगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने इनमें से कुछ ही विधायकों को टिकट देकर चुनावी रण में उतारा। इससे बाकी विधायक व पूर्व विधायक और उनके समर्थक मायूस हो गए।
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लेकिन सीएम मनोहर लाल का दावा है कि सभी की नाराजगियां दूर कर ली जाएगी। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि यह स्वाभाविक बात है, जब लोकतंत्र में किसी पार्टी का ग्राफ और प्रभाव बढ़ता है, तो सभी लोग ऐसी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन भाजपा का अपना अनुशासन का एक तरीका है। जो लोग नए आएं हैं, उनसे बातचीत की जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि सबका उपयोग एक ही समय में एक ही स्थान पर नहीं होता है। पार्टी और सरकार के पास कई ऐसे अवसर होते हैं, जहां सभी का ख्याल रखा जा सके।
सीएम ने कहा कि वे लोग अपनी पार्टियों में परेशान थे, इसलिए भाजपा में आए। वे जानते हैं कि वहां जबरदस्ती चुनाव लड़ने से अच्छा है, यहां आकर चुनाव न लड़ना। उन्हें यहां उम्मीद तो है कि यदि सरकार बनेगी, तो उनका पूरा मान -सम्मान होगा।
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दूसरे दल छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए नए भाजपाई भी इस बात से नाराज हैं कि ‘अपना घर’ छोड़ने के बावजूद नए घर में उन्हें टिकट नहीं मिली। इसी नाराजगी को दिल में लिए ये नए भाजपाई चल तो रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं वे खुद और उनके समर्थक थोड़े मायूस हैं। उनकी इसी नाराजगी को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दूर करने का बीड़ा उठाया है। देखा जाए, तो विधानसभा चुनाव से पहले एकाएक दूसरे दलों से नेताओं ने भाजपा की ओर आकर्षित होते हुए भाजपा का दामन थामना शुरू कर दिया था।
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आलम यह रहा कि हरियाणा के मुख्य विपक्षी दल इनेलो से ही बारह विधायक अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर गए। अकाली दल का भी एकमात्र विधायक ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली। कांग्रेस और इनेलो के कई पूर्व विधायकों ने भी भाजपा का दामन थामा था। अब भाजपा में आए इन विधायकों व पूर्व विधायकों को आस थी कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हें टिकट जरूर देगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने इनमें से कुछ ही विधायकों को टिकट देकर चुनावी रण में उतारा। इससे बाकी विधायक व पूर्व विधायक और उनके समर्थक मायूस हो गए।
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लेकिन सीएम मनोहर लाल का दावा है कि सभी की नाराजगियां दूर कर ली जाएगी। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि यह स्वाभाविक बात है, जब लोकतंत्र में किसी पार्टी का ग्राफ और प्रभाव बढ़ता है, तो सभी लोग ऐसी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन भाजपा का अपना अनुशासन का एक तरीका है। जो लोग नए आएं हैं, उनसे बातचीत की जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि सबका उपयोग एक ही समय में एक ही स्थान पर नहीं होता है। पार्टी और सरकार के पास कई ऐसे अवसर होते हैं, जहां सभी का ख्याल रखा जा सके।
सीएम ने कहा कि वे लोग अपनी पार्टियों में परेशान थे, इसलिए भाजपा में आए। वे जानते हैं कि वहां जबरदस्ती चुनाव लड़ने से अच्छा है, यहां आकर चुनाव न लड़ना। उन्हें यहां उम्मीद तो है कि यदि सरकार बनेगी, तो उनका पूरा मान -सम्मान होगा।