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नेताओं को खेतों में जाना पडे़गा वोट मांगने

Sat, 13 Sep 2014 10:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 13 Sep 2014 10:18 AM IST
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Haryana Assembly Elections 2014

मानसून की तुनकमिजाजी का सामना कर रही धान की फसल पर अब राज्य में आसन्न चुनाव पहले से परेशान किसानों के लिए नई मुसीबत बन सकते हैं। चुनाव आयोग के राज्य में 15 अक्तूबर को चुनाव कराने की घोषणा का असर धान की कटाई और खरीद दोनों पर पड़ सकता है।

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राज्य के ज्यादातर हिस्सों में धान की फसल तैयार है और किसानों को एक अक्तूबर से शुरू होने वाले खरीफ खरीद सीजन का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन 19 अक्तूबर को जब तक चुनाव परिणाम नहीं आ जाते तब तक राज्य में चुनावी सरगर्मियां चरम पर रहेंगी।
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इसका असर धान की खरीद पर पड़ना तय माना जा रहा है। ऐसे में किसान तब अपनी बात पहुंचाने के लिए नेताओं को खेतों में जाना पड़ेगा।

फसल खरीद की तैयारी हुई पूरी

Haryana Assembly Elections 2014

कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चालू खरीफ सीजन केलिए हरियाणा सरकार ने 25.20 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है। लेकिन मई और जून के दौरान हुई कम बारिश से धान की बुवाई पहले ही कमजोर हुई है।

ऐसे में खरीद सीजन के दौरान राज्य में होने वाले चुनाव का असर धान की खरीद पर पड़ सकता है। हालांकि भारतीय खाद्य निगम ने राज्य में खरीद की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य कृषि विभाग के मुताबिक राज्य में धान की सर्वाधिक आवक एक अक्तूबर 20 अक्तूबर के बीच होती है।

लेकिन इस दफा यहां 15 अक्तूबर को चुनाव और 19 अक्तूबर को चुनाव परिणाम के नतीजों की गहमा-गहमी में किसानों की व्यस्तता स्वाभाविक है। ऐसे में धान की कटाई से लेकर मंडियों तक धान की आपूर्ति पर चुनाव का असर पड़ना तय है।

किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी

Haryana Assembly Elections 2014

पिछले खरीफ खरीद सीजन में 20 अक्तूबर तक राज्य की मंडियों में लगभग 27 लाख टन धान की आवक हो चुकी थी। हालांकि इस दफा धान की बुवाई कमजोर होने के साथ ही फसल भी प्रभावित हुई है।

इसके बावजूद जिन क्षेत्रों में किसानों ने सिंचाई के बेहतर प्रबंध पहले से कर लिए थे। उनकी फसलें तैयार हैं और इन किसानों को अब मंडियों में एफसीआई के कांटे लगने का इंतजार है। चालू खरीद सीजन केलिए केंद्र सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1360 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

पहले किसानों को उम्मीद थी कि चुनावी वर्ष होने के कारण उन्हें राज्य सरकार की ओर से धान की खरीद पर अतिरिक्त बोनस मिलेगा। लेकिन अब चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के कारण उनकी इस उम्मीद पर भी पानी फिर गया है।

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