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विस चुनावः ये है अमित शाह का मुख्य एजेंडा

Sun, 24 Aug 2014 10:25 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 24 Aug 2014 10:25 AM IST
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haryana assembly election 2014

हरियाणा विधानसभा की सियासी जंग के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के ‘महारथी’ चुनाव मैदान में उतरने लगे हैं। सियासत के महारथियों के लिए इस बार चुनावी जंग का मैदान भी बदला-बदला सा है। इस बार आमने-सामने के चुनावी संघर्ष के लिए दलों के साथ ही रथी व महारथी भी बदल चुके हैं।

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लोकसभा चुनाव से ही भाजपा यहां की सियासत में दमदार मौजूदगी दर्ज करा रही है। उत्तर प्रदेश में अपनी कामयाबी का परचम लहराने वाले भाजपा के नए अध्यक्ष अमित शाह के एजेंडे में अब हरियाणा फतेह सबसे ऊपर है। इसीलिए भाजपा से लेकर पूरा संघ परिवार यहां सक्रिय हो गया है।
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पांच साल पहले ऐसा नहीं था। उधर, कांग्रेस अब एंटी इनकंबेसी फैक्टर से ही जूझ रही है। दूसरी तरफ विधानसभा में प्रमुख विपक्षी दल इनेलो अब भी असरदार है, लेकिन उसे चुनाव मैदान में ओम प्रकाश चौटाला का सीधा नेतृत्व नहीं मिल पाने की कमी महसूस हो रही है।

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चौथे नंबर पर थी, अब बन चुकी है सबसे बड़ी

haryana assembly election 2014

हाल के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 10 में से सात सीटें जीतने के बाद भाजपा अब एक बड़ी ताकत बनकर मैदान में है। चुनाव में 34.70 फीसदी वोट पाकर भाजपा ने कांग्रेस को भी दूसरे स्थान पर धकेल दिया।

प्रदेश विधानसभा की 90 में से 53 विधानसभा सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली थी। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को मात्र 9.05 फीसदी वोट मिले और उसकी झोली में मात्र चार सीटें आईं थीं। जबकि हरियाणा जनहित कांग्रेस 7.41 फीसदी वोट के साथ छह सीटें पाने में सफल रही थी।

यह अलग बात है कि हजकां के ज्यादातर विधायक बाद में कांग्रेस के पाले में चले गए। खास बात यह है कि  उसके बाद भाजपा-हजकां गठबंधन करके पीछे-पीछे चलने को तैयार थी, लेकिन अब वह हजकां को पीछे-पीछे चलने को कह रही है।

बदल गये सियासत के खिलाड़ी

haryana assembly election 2014

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही अकेले ऐसे नेता हैं जो चुनाव में कांग्रेस की कमान थाम रहे हैं, जबकि भाजपा की चुनावी रणनीति को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद संभाल रहे है। इधर, चौधरी बीरेंद्र सिंह के भाजपा में आ जाने से समुदाय विशेष पर पार्टी की पकड़ बढ़ी है।

उधर, इनेलो की चुनावी कमान भी ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला के बजाय अभय चौटाला के हाथ है। बीते विधानसभा चुनाव में हजकां की कमान पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के हाथ में थीं।

इस बार कुलदीप विश्नोई हजकां की कमान थामकर चुनावी मैदान में दमदार मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। बीते लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद हरियाणा जनहित कांग्रेस पहले जैसी दमदार नहीं दिख रही है।

राज्य गठन के समय थीं मात्र 81 सीटें

haryana assembly election 2014

पंजाब से अलग होने के बाद गठित विधानसभा में मात्र 81 सीटें थी। इनमें से 15 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं। 21 फीसदी मतदाता बढ़े हैं। 1967 में तक विधानसभा  में कांग्रेस के 48 और भारतीय जनसंघ के 12 विधायक थे। जनसंघ तक सदन में प्रमुख विपक्षी पार्टी थीं।

2009 के विधानसभा चुनाव में दलों की स्थिति

पार्टी---------सीटें जीतीं------वोट(फीसदी)-----लोकसभा चुनाव 2014 में वोट
कांग्रेस----------40-----------35.11-------------22.90
इनेलो-----------31----------25.81--------------24.40
हजकां----------06-----------7.81---------------6.10
भाजपा----------04-----------9.05--------------34.70

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