...अच्छा तो ये है भाजपा की जीत का नया प्लान
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हरियाणा में टिकट वितरण के बाद हुए घमासान के बावजूद भारतीय जनता पार्टी की नजरें अब भी दूसरे दलों के नेताओं पर टिकी हैं। हालांकि पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को पार्टी टिकट नहीं देगी। लेकिन कुछ सीटों पर दमदार प्रत्याशियों के लिए भाजपा की नजर हजकां नेताओं पर हैं।
हजकां से दोस्ती टूटने के बाद भाजपा के कंधों पर गठबंधन धर्म के पालन की जिम्मेवारी भी अब नहीं हैं। लिहाजा इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा हजकां के सशक्त उम्मीदवारों को अपनी तरफ मोड़ने का प्रयास नहीं करेगी। अलबत्ता भाजपा की नजर हजकां के वोट बैंक पर भी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात के संकेत दिए हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक हजकां की पैठ हरियाणा के नॉन जाट वोटराें में है। चुनाव से पहले पार्टी इस वोट बैंक पर जोर आजमाइश करेगी। हरियाणा के नान जाट वोटर को लुभाने में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ेगी। हालांकि पार्टी ने जो 43 टिकट घोषित किए हैं। उसमें जाट उम्मीदवारों को भी वरीयता दी गई है। उधर, हरियाणा में चल रहे महागठबंधन के प्रयास कितने सफल होंगे। यह तस्वीर भी एक दो दिन में स्पष्ट हो जाएगी।
90 सीटों के लिए 3000 आवेदन
भाजपा के मुताबिक तीन हजार आवेदन नब्बे सीटों के लिए आए हैं। इनमें चौटाला परिवार और कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों की भी लंबी लिस्ट है। 20 से कम आवेदन किसी सीट पर नहीं आए हैं।
जो मर्जी पार्टी में आए, पर टिकट नहीं मिलेगी
सभी दलों के लोग भाजपा में आना चाह रहे हैं, लेकिन टिकट हम अब किसी नए आने वाले को नहीं देंगे। टिकट के बगैर कोई आना चाहता है तो हम तैयार हैं। जो लोग पहले भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं। पार्टी उनके टिकट पर विचार कर रही है।
कैलाश विजयवर्गीय, चुनावी प्रभारी हरियाणा भाजपा
पंचकूला और कालका सीट पर भी प्रतिष्ठा
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के समय पंचकूला के लोगों ने सत्ता को करीब से देखा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन का भी पंचकूला से करीबी रिश्ता है। पंचकूला के लोगों को भजनलाल के मुख्यमंत्री रहते सचिवालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते थे।
सेक्टर आठ की कोठी से ही फैसले हो जाते थे। विजयवर्गीय के मुताबिक पंचकूला और कालका सीट जीतने के लिए भाजपा ने पूरा जोर लगा दिया है। हम 200 प्रतिशत यह सीट जीतकर रहेंगे।
हरियाणा में पिछले तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा दो अंक तक नहीं पहुंच सकी है। वर्ष 2009 के चुनाव में भी पार्टी ने चार सीटे जीती थीं। इन्हीं चार सीटों के सहारे भाजपा अब 50 से ज्यादा सीटें जीतने का ताना बाना बुन रही है, लेकिन भाजपा का यह ख्वाब कितना सच साबित होगा। इसका खुलासा 19 अक्तूबर को हो जाएगा।
पिछले चार चुनाव में भाजपा का ग्राफ
वर्ष.....................प्रतिशत..................सीटें
2009..................09.05..................04
2005..................10.36..................02
2000..................08.94..................06
1996..................08.88..................11