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महत्वाकांक्षी परियोजना ‘जल ही जीवन’ पर अफसरों ने नहीं दिखाई गंभीरता, बिना मंथन सेट किए टारगेट
Wed, 03 Jul 2019 12:10 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 03 Jul 2019 12:10 PM IST
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फाइल फोटो
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भूजल बचाने और फसल विविधिकरण बढ़ाने को हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘जल ही जीवन’ शुरू करने से पहले अफसरों ने इस प्रोजेक्ट के मंथन स्टेज पर लापरवाही बरती। अफसरों ने गंभीरता से मंथन किए बिना ही परियोजना में खंडवार धान की क्राप कनर्वजन टारगेट सेट कर दिए। जिसके चलते खंडों में यह प्रोजेक्ट लड़खड़ा गया।
संबंधित इलाकों के कृषि उपनिदेशकों ने भी खंडों में बिना मंथन सेट किए टारगेट्स पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। जिसके चलते सेट टारगेट को पूरा करने के लिए कृषि विभाग को इस योजाका दायरा खंडों से बढ़ाकर जिलों तक करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि इस प्रोजेक्ट में धान छोड़कर मक्का-अरहर लगाने वाले किसान को सरकार ने प्रति एकड़ कुल 4500 रुपये तक प्रोत्साहन देना था।
बिना मंथन पहले सेट किए ये खंडवार टारगेट
योजना के अंतर्गत करनाल के असंध खंड में 44500 हेक्टेयर धान के रकबे में से 12000 हेक्टेयर में मक्का व दलहन की खेती करवाने, कैथल केपूंडरी खंड में 40000 हेक्टयर धान एरिया में से 11000 हेक्टयर में, जींद के नरवाना में 34907 हेक्टेयर धान एरिया में से 7000 हेक्टेयर में, कुरुक्षेत्र के थानेसर में धान के 18200 हेक्टेयर में से 7000 हेक्टेयर में, अंबाला के अंबाला शहर में धान के 25212 हेक्टेयर में से 8000 हेक्टेयर, यमुनानगर के रादौर में धान के 14000 हेक्टेयर में से 2500 हेक्टेयर व सोनीपत के गन्नौर में धान के 18538 हेक्टेयर में से 2500 हेक्टेयर एरिया में धान की बजाए मक्का व दलहन की खेती करवाने का टारगेट सेट किया गया।
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संबंधित इलाकों के कृषि उपनिदेशकों ने भी खंडों में बिना मंथन सेट किए टारगेट्स पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। जिसके चलते सेट टारगेट को पूरा करने के लिए कृषि विभाग को इस योजाका दायरा खंडों से बढ़ाकर जिलों तक करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि इस प्रोजेक्ट में धान छोड़कर मक्का-अरहर लगाने वाले किसान को सरकार ने प्रति एकड़ कुल 4500 रुपये तक प्रोत्साहन देना था।
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बिना मंथन पहले सेट किए ये खंडवार टारगेट
योजना के अंतर्गत करनाल के असंध खंड में 44500 हेक्टेयर धान के रकबे में से 12000 हेक्टेयर में मक्का व दलहन की खेती करवाने, कैथल केपूंडरी खंड में 40000 हेक्टयर धान एरिया में से 11000 हेक्टयर में, जींद के नरवाना में 34907 हेक्टेयर धान एरिया में से 7000 हेक्टेयर में, कुरुक्षेत्र के थानेसर में धान के 18200 हेक्टेयर में से 7000 हेक्टेयर में, अंबाला के अंबाला शहर में धान के 25212 हेक्टेयर में से 8000 हेक्टेयर, यमुनानगर के रादौर में धान के 14000 हेक्टेयर में से 2500 हेक्टेयर व सोनीपत के गन्नौर में धान के 18538 हेक्टेयर में से 2500 हेक्टेयर एरिया में धान की बजाए मक्का व दलहन की खेती करवाने का टारगेट सेट किया गया।
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महत्वाकांक्षी परियोजना पर यूं बरती गई लापरवाही
योजना के तहत प्रदेश के 21 अति डार्क जोन एरिया में से सरकार ने 7 खंड एरिया में किसानों को धान की खेती से हटाकर मक्का और अरहर की खेती करने के लिए प्रेरित करना था। सरकार ने कृषि विभाग के अफसरों को अपनी इस मंशा से अवगत करवाते हुए डिटेल स्टडी कर पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा। मगर विभागीय अफसर इस प्रोजेक्ट की स्टडी में गंभीर मंथन से चूक गए। अफसरों ने सात जिलों के सात खंडों में 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान की बजाए मक्का और अरहर लगाने का टारगेट फिक्स कर दिया।
लेकिन टारगेट सेट करते वक्त संबंधित खंडों में एग्रो क्लाइमेट संबंधित सभी कंडीशनस को नजरअंदाज कर दिया गया। जिसके चलते सात खंडों तक सीमित यह परियोजना लड़खड़ा गई। विभागीय सूत्रों ने बताया कि जिन सात खंडों में धान की फसल को मक्का व अरहर की फसल में कनवर्ट करने का टारगेट सेट किया गया था, वो योजना के पहले स्टेज में संभव नहीं था, क्योंकि यह टारगेट इन खंडों में कुल धान के रकबे का करीब 33 फीसद है और किसी भी इलाके में इतने बढ़े रकबे को एकदम से दूसरी फसल पर कनवर्ट करना बेहद मुश्किल होता हैं।
लेकिन टारगेट सेट करते वक्त संबंधित खंडों में एग्रो क्लाइमेट संबंधित सभी कंडीशनस को नजरअंदाज कर दिया गया। जिसके चलते सात खंडों तक सीमित यह परियोजना लड़खड़ा गई। विभागीय सूत्रों ने बताया कि जिन सात खंडों में धान की फसल को मक्का व अरहर की फसल में कनवर्ट करने का टारगेट सेट किया गया था, वो योजना के पहले स्टेज में संभव नहीं था, क्योंकि यह टारगेट इन खंडों में कुल धान के रकबे का करीब 33 फीसद है और किसी भी इलाके में इतने बढ़े रकबे को एकदम से दूसरी फसल पर कनवर्ट करना बेहद मुश्किल होता हैं।
लड़खड़ाने के बाद इस तरह संभलें
धान की रोपाई का सीजन जैसे-जैसे बढ़ने लगा तो खंडवार टारगेट को पूरा करने में संबंधित जिलों के कृषि उपनिदेशकों के पसीने छूटने लगे। उनके फीडबैक के बाद जब विभाग ने सरकार की अनुमति के बाद इस प्रोजेक्ट का दायरा खंडों से बढ़ाकर जिलों तक किया, तब जाकर न केवल प्रोजेक्ट संभला, बल्कि टारगेट भी पूरा हुआ। अब अंबाला जिले में 8000 हेक्टेयर धान के रकबे को मक्का में कनवर्ट करने के लक्ष्य में से 7161 हेक्टेयर एरिया कवर कर लिया गया है।
इसी तरह यमुनानगर जिले में 2500 हेक्टेयर धान एरिया टारगेट के विरूद्ध 3041 हेक्टेयर, कुरुक्षेत्र जिले में 7000 हेक्टेयर टारगेट के विरुद्ध 9422 हेक्टेयर, कैथल में 11000 हेक्टेयर के विरुद्ध 9313 हेक्टेयर, करनाल के 12000 हेक्टेयर टारगेट के विरुद्ध 12009 हेक्टेयर, जींद जिले के 7000 हेक्टेयर के विरुद्ध 6890 हेक्टेयर और सोनीपत जिले के 2500 हेक्टेयर टारगेट की बजाए 2588 हेक्टेयर एरिया को धान फसल से कनवर्ट करवाकर दूसरी फसल पर ला दिया गया है। जबकि अभी अभियान जारी है।
परियोजना बहुत अच्छे ढंग से चल रही है। जो टारगेट सेट किए थे, उनके भी अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। धान का क्राप कनर्वजन होने के बाद इन इलाकों में भूजल भी बचेगा।
- नवराज संधू, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि विभाग हरियाणा
इसी तरह यमुनानगर जिले में 2500 हेक्टेयर धान एरिया टारगेट के विरूद्ध 3041 हेक्टेयर, कुरुक्षेत्र जिले में 7000 हेक्टेयर टारगेट के विरुद्ध 9422 हेक्टेयर, कैथल में 11000 हेक्टेयर के विरुद्ध 9313 हेक्टेयर, करनाल के 12000 हेक्टेयर टारगेट के विरुद्ध 12009 हेक्टेयर, जींद जिले के 7000 हेक्टेयर के विरुद्ध 6890 हेक्टेयर और सोनीपत जिले के 2500 हेक्टेयर टारगेट की बजाए 2588 हेक्टेयर एरिया को धान फसल से कनवर्ट करवाकर दूसरी फसल पर ला दिया गया है। जबकि अभी अभियान जारी है।
परियोजना बहुत अच्छे ढंग से चल रही है। जो टारगेट सेट किए थे, उनके भी अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। धान का क्राप कनर्वजन होने के बाद इन इलाकों में भूजल भी बचेगा।
- नवराज संधू, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि विभाग हरियाणा