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कैथलः बेटी को सरपंच बनाकर पेश की मिसाल

Thu, 31 Dec 2015 05:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल Updated Thu, 31 Dec 2015 05:51 PM IST
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hardeep kaur selected as sarpanch in kaithal village

पंजाब बॉर्डर पर स्थित जिले के गांव बुडनपुर के लोगों ने गजब की मिसाल पेश की है। लोगों ने एक बेटी को अपना सरपंच चुना। पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन गांव की केवल एक बेटी हरदीप कौर ने नामांकन दाखिल किया। सरपंच सहित गांव में छह पंचों का भी सर्वसम्मति से चयन किया गया है।

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गांव कड़ाम के डेरे के महंत के आशीर्वाद से पूरी पंचायत का पहले भी सर्वसम्मति से चयन कर लिया गया था। लेकिन, शैक्षणिक योग्यता लागू हो जाने के बाद गांव में उम्मीदवार को बदलना पड़ा। पूर्व में सरपंच चुनी गई सुनीता देवी की ही भतीजी को सरपंच चुना गया है।
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गांव वासी दुधाराम ने बताया कि गांव में 500 वोट हैं। अब तक रत्ताखेड़ा कड़ाम के साथ गांव बुडनपुर गुजरान की पंचायत थी। इस बार गांव बुडनपुर गुजरान की अलग से पंचायत बनी है। बुडनपुर में सितंबर में हुए नामांकन के दौरान सर्वसम्मति से सुनीता देवी को सरपंच चुना गया था।
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बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से लगाई गई शर्तों को मंजूरी दे दी तो सुनीता देवी का नाम वापस लेना पड़ा। सुनीता शैक्षणिक योग्यता पूरा नहीं कर पा रही हैं। इसके बाद सुनीता देवी के परिवार से ही ईश्वर सिंह की बेटी हरदीप कौर को सर्वसम्मति से सरपंच पद का उम्मीदवार बनाया गया।

पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया में गांव से अकेले हरदीप कौर ने नामांकन कराया है। हरदीप कौर दसवीं पास है। उसके पिता खेती बाड़ी का काम करते हैं। हरदीप कौर का बड़ा भाई दूध का कारोबार करता है। छोटा भाई स्कूल में पढ़ता है।

गांव कड़ाम में डेरा जय बाबा शंकर गिरोलिया जी के महंत बाबा प्रेमगिरी जी के आशीर्वाद से यह सर्वसम्मति हो पाई है। उन्होंने ही पहले सुनीता का प्रस्ताव रखा था। उन्हीं के आशीर्वाद से हरदीप कौर को भी चुना गया है।

इसी तरह वार्ड नंबर एक से हरदम राम, दो से नौरंग लाल फौजी, तीन से सीमा देवी, चार से गुरमीत सिंह, पांच से गुरतेज सिंह और छह से चरणजीत कौर को पंच चुना गया है।


ऐसा करूंगी कि बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर न जाना पड़े
सरपंच चुनी गईं हरदीप कौर कहती हैं कि, मैंने पांचवीं तक गांव से तथा पांचवीं के बाद दूसरे गांव में जाकर दसवीं तक पढ़ाई की है। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरे गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर न जाना पड़े।

गांव में ही स्कूल को अपग्रेड करवाया जाएगा। गांव में पेयजल, सड़कों और बच्चों को करिअर संबंधी जानकारी देने के लिए काम किया जाएगा।

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