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चार जिंदगियों को खुशियां दे गए हैप्पी सिंह
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चंडीगढ़। नूरपुर बेदी निवासी 26 वर्षीय हैप्पी सिंह ने दुनिया से जाते हुए चार लोगों की जिंदगी खुशियाें से भर दी। उनकी दो किडनी और दो कार्निया चार मरीजों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दी गईं। परिजनों की अनुमति के बाद पीजीआई की टीम ने इस काम को अंजाम दिया।
पीजीआई निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने हैप्पी सिंह के परिवार की तारीफ करते हुए कहा कि अन्य लोगों को भी इस तरह के साहसिक फैसले लेने चाहिए। इससे दूसरों की जिंदगी संवर सकती है।
28 अप्रैल को हैप्पी सिंह अपने घर के छत पर टहल रहे थे। अचानक पैर फिसलने के कारण वह छत से गिर गए। सिर में गंभीर चोट आई और वह बेहोश हो गए। परिजनों ने तत्काल रोपड़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से पीजीआई में रेफर कर दिया गया। पीजीआई न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टर अपिन्द्र प्रीत सिंह ने विभाग के प्रमुख डॉ. एसके गुप्ता के नेतृत्व में मरीज की जान बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन सिर की चोट गंभीर होने के कारण स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई। इसके बारे में हैप्पी के परिवार को अवगत कराया गया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर ने हैप्पी के परिवार की काउंसलिंग कर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया। 1 मई को हैप्पी को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने हैप्पी का अंगदान करने की अनुमति दे दी।
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हैप्पी के पिता गुरमीत सिंह ने कहा, हैप्पी दुनिया से जा चुका है। अब उसके शरीर के साथ अंगों को जलाकर व्यर्थ करना गलत था। इसलिए दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए हमने अंगदान करने का निर्णय लिया। हैप्पी सिंह की दोनों किडनी पीजीआई में पंजीकृत दो डायलिसिस के मरीजों को व दोनों कार्निया दो दृष्टिहीन को प्रदान की गईं। हमारा बेटा भले ही इस दुनिया से चला गया लेकिन वह दूसरों को तो जिंदगी दे गया।
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पीजीआई निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने हैप्पी सिंह के परिवार की तारीफ करते हुए कहा कि अन्य लोगों को भी इस तरह के साहसिक फैसले लेने चाहिए। इससे दूसरों की जिंदगी संवर सकती है।
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28 अप्रैल को हैप्पी सिंह अपने घर के छत पर टहल रहे थे। अचानक पैर फिसलने के कारण वह छत से गिर गए। सिर में गंभीर चोट आई और वह बेहोश हो गए। परिजनों ने तत्काल रोपड़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से पीजीआई में रेफर कर दिया गया। पीजीआई न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टर अपिन्द्र प्रीत सिंह ने विभाग के प्रमुख डॉ. एसके गुप्ता के नेतृत्व में मरीज की जान बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन सिर की चोट गंभीर होने के कारण स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई। इसके बारे में हैप्पी के परिवार को अवगत कराया गया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर ने हैप्पी के परिवार की काउंसलिंग कर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया। 1 मई को हैप्पी को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने हैप्पी का अंगदान करने की अनुमति दे दी।
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हैप्पी के पिता गुरमीत सिंह ने कहा, हैप्पी दुनिया से जा चुका है। अब उसके शरीर के साथ अंगों को जलाकर व्यर्थ करना गलत था। इसलिए दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए हमने अंगदान करने का निर्णय लिया। हैप्पी सिंह की दोनों किडनी पीजीआई में पंजीकृत दो डायलिसिस के मरीजों को व दोनों कार्निया दो दृष्टिहीन को प्रदान की गईं। हमारा बेटा भले ही इस दुनिया से चला गया लेकिन वह दूसरों को तो जिंदगी दे गया।