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'दिलरुबा' पर गुरबाणी सुन भक्तिरस में डूबी संगत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 05 Feb 2014 10:09 AM IST
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चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में पंजाब आर्ट्स काउंसिल की ओर से आयोजित गुरमत संगीत ने सबको भक्तिरस में डुबो दिया।
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कार्यक्रम के दौरान पंजाब आर्ट्स काउंसिल की चेयरमैन हरजिंदर कौर, सेक्रेटरी प्रोफेसर निर्मल दत्त, पंजाब संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर आत्मजीत मौजूद रहे।
इस मौके पर बलवंत सिंह रागी, रागी हरप्रीत सिंह नामधारी, सरमुख सिंह नामधारी, ईशर सिंह नामधारी, ठाकुर सिंह नामधारी ने अपने इंस्ट्रूमेंट पर तान छेड़कर सबका दिल जीत लिया।
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बलवंत सिंह रागी ने राग बसंत पर आधारित भ्क्ति रचना सुनाई। यहां दिलरुबा पर बलवंत सिंह रागी, सरमुख सिंह रागी, तबले पर हरप्रीत सिंह नामधारी, तार शहनाई पर ईशर सिंह नामधारी थे।
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क्या है दिलरुबा
दिलरुबा सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह द्वारा डेवलप किया गया वाद्य यंत्र है। यह यंत्र टौस का माडीफाइड वर्जन है। इसको पवित्र माना जाता है।
इसको दसवें गुरु गोबिंद सिंह के सैनिक अपने साथ रखते थे। टौस थोड़ा बड़ा यंत्र था और इसी वजह से सैनिक उसको रख नहीं पाते थे। इसी को माडीफाई करके दिलरुबा को तैयार किया गया।
यह लकड़ी का बनाया गया इंस्ट्रूमेंट होता है। इसमें तार होते हैं और इसको बजाने के लिए पहले बो का इस्तेमाल किया जाता था। अब रागी इसको शबद और कीर्तन के दौरान इस्तेमाल करते हैं।