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पंजाब: जीपीएफ में पांच लाख से अधिक जमा नहीं कर सकेंगे सरकारी कर्मचारी, इस वजह से लगाई गई रोक

Mon, 25 Sep 2023 12:11 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 25 Sep 2023 12:11 AM IST
सार

अब तक सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को जीपीएफ में असीमित योगदान देने से अच्छा खासा लाभ होता था। जीपीएफ में जमा रकम पर पीएफ के लिए तय ब्याज दर लागू होती है, जो देश में अन्य किसी भी बचत योजना पर मिलने वाली ब्याज दर से काफी ज्यादा है।

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Government employees will not be able to deposit more than Rs 5 lakh in GPF in Punjab
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब में सरकारी कर्मचारी अब जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) में सालाना पांच लाख रुपये से ज्यादा जमा नहीं कर सकेंगे। अब तक सरकारी कर्मचारियों के लिए जीपीएफ में पैसा जमा कराने की कोई सीमा तय नहीं थी और इस मद में कर्मचारियों को जमा राशि पर सात फीसदी से अधिक ब्याज का लाभ भी मिलता था। नए आदेश के बाद कर्मचारी प्रति माह अपने वेतन से लगभग 40 हजार रुपये ही जीपीएफ में जमा करा सकेंगे।

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केंद्र सरकार द्वारा नियम 1962 के नियम 9डी के उपनियम (2) के तहत क्लाज सी के सब-क्लाज आई में किए उपबंध को पंजाब में लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय निर्देशों का हवाला देते हुए पंजाब सरकार ने सभी विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि वर्ष 2023-24 के दौरान सभी कर्मचारी व अधिकारी जीपीएफ में पांच लाख रुपये से अधिक राशि जमा नहीं कराएंगे। अगर किसी अधिकारी/कर्मचारी की जीपीएफ जमा राशि सालाना पांच लाख रुपये से अधिक रहने की संभावना है तो संबंधित विभाग द्वारा बाकी महीनों में अधिकारी/कर्मचारी की जीपीएफ राशि की एडजेस्टमेंट निर्धारित सीमा के बीच कर दी जाएगी।
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इसके अलावा, अगर किसी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी का जीपीएफ पहले ही वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान पांच लाख रुपये से अधिक हो चुका है तो बाकी महीनों के दौरान जीपीएफ में उक्त अधिकारी/कर्मचारी का कोई पैसा जमा नहीं किया जाएगा। इस नए नियम को लागू करने के लिए वित्त विभाग ने अपने उस नियम में भी ढील दी है, जिसके तहत जीपीएफ योगदान बेसिक वेतन का न्यूनतम पांच फीसदी रखने की हिदायत दी गई थी।

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जीपीएफ से होता था मुलाजिमों को लाभ

अब तक सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को जीपीएफ में असीमित योगदान देने से अच्छा खासा लाभ होता था। जीपीएफ में जमा रकम पर पीएफ के लिए तय ब्याज दर लागू होती है, जो देश में अन्य किसी भी बचत योजना पर मिलने वाली ब्याज दर से काफी ज्यादा है। देखने में आता रहा है कि कर्मचारी अपने वेतन का अधिकांश हिस्सा हर महीने जीपीएफ में जमा करा देते थे और फिर जरूरत के अनुसार निकासी करते थे। इस दौरान जमा अवधि का ब्याज उनके खाते में जुड़ता रहता था। जिन कर्मचारियों व अधिकारियों का वेतन लाख रुपये से भी अधिक है और जिनका खर्च सिर्फ वेतन पर निर्भर नहीं है, उनमें से ज्यादातर लोग अपना अधिकांश वेतन जीपीएफ में जमा करके मोटे ब्याज का लाभ लेते थे।

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