{"_id":"60e341248ebc3e932312f453","slug":"gmch-patients-returned-disappointed-did-not-get-treatment-chandigarh-news-pkl419071673","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएमसीएच : निराश लौटे मरीज, नहीं मिला इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएमसीएच : निराश लौटे मरीज, नहीं मिला इलाज
विज्ञापन
चंडीगढ़। तीन महीने बाद सोमवार को जीएमसीएच-32 में शारीरिक ओपीडी शुरू तो हो गई, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते पहले दिन मरीजों को इलाज से वंचित रहना पड़ा। डॉक्टर से परामर्श के लिए मरीज कोविड जांच रिपोर्ट साथ ले आए थे लेकिन ऑनलाइन पंजीकरण न होने पर उन्हें शारीरिक तौर पर देखने से इनकार कर दिया गया।
मरीज चाहकर भी ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा सके, क्योंकि जीएमसीएच-32 की वेबसाइट में तकनीकी दिक्कत थी। हालांकि टेलीकंसल्टेशन के जरिए ओपीडी में आए मरीजों को भी काफी मशक्कत के बाद डॉक्टर ने देखा। वहीं, अन्य मरीज इलाज न मिलने पर निराश होकर लौट गए।
टेलीफोन के जरिए पंजीकरण कराने के बाद डॉक्टर को दिखाने पहुंचे बलटाना निवासी अशोक शर्मा ने बताया कि सुबह 9 से 11 बजे तक इंतजार करना पड़ा, क्योंकि पंजीकरण काउंटर पर कोई कर्मचारी ही नहीं था। ऐसे में पंजीकरण के पर्चे पर मुहर लगवाने के लिए दो घंटे परेशान होना पड़ा। वहीं, हल्लोमाजरा निवासीदीपक ने कहा कि ओपीडी में मरीज देखने के नाम पर झूठ बोला जा रहा है। मरीज अस्पताल आकर केवल परेशान हो रहे हैं। इलाज के नाम पर सिर्फ उन्हें यहां से वहां भटकाया जा रहा है।
विज्ञापन
ओटीपी के बिना नहीं हो सका पंजीकरण
अस्पताल प्रशासन ने ऑनलाइन पंजीकरण के बाद मरीजों को शारीरिक तौर पर देखने की घोषणा तो कर दी लेकिन व्यवस्था की जांच नहीं की। ऐसे में जब मरीजों ने ऑनलाइन पंजीकरण के लिए आवेदन किया तो उन्हें ओटीपी ही नहीं मिला। इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन तक पहुंची तो उन्होंने आनन-फानन में आईटी विभाग को जांच करने को कहा। इसके बाद यह चूक सामने आई। तमाम प्रयास के बावजूद भी इक्का-दुक्का मरीजों का ही ओटीपी जनरेट हो सका। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पंजीकरण की प्रक्रिया में फेरबदल कर बिना ओटीपी के ही पंजीकरण करने की व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। देर शाम को ओटीपी की समस्या हल हुई।
क्या कहते हैं अधिकारी
काफी दिनों से वेबसाइट के क्रियाशील न होने के कारण ऑनलाइन पंजीकरण में कुछ परेशानी हुई है। उसे चेक करवाकर ठीक कराया जा रहा है। पहले दिन टेलीमेडिसिन के अलावा ओपीडी में 214 मरीजों को परामर्श दिया गया। -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच-32
विज्ञापन
मरीज चाहकर भी ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा सके, क्योंकि जीएमसीएच-32 की वेबसाइट में तकनीकी दिक्कत थी। हालांकि टेलीकंसल्टेशन के जरिए ओपीडी में आए मरीजों को भी काफी मशक्कत के बाद डॉक्टर ने देखा। वहीं, अन्य मरीज इलाज न मिलने पर निराश होकर लौट गए।
विज्ञापन
टेलीफोन के जरिए पंजीकरण कराने के बाद डॉक्टर को दिखाने पहुंचे बलटाना निवासी अशोक शर्मा ने बताया कि सुबह 9 से 11 बजे तक इंतजार करना पड़ा, क्योंकि पंजीकरण काउंटर पर कोई कर्मचारी ही नहीं था। ऐसे में पंजीकरण के पर्चे पर मुहर लगवाने के लिए दो घंटे परेशान होना पड़ा। वहीं, हल्लोमाजरा निवासीदीपक ने कहा कि ओपीडी में मरीज देखने के नाम पर झूठ बोला जा रहा है। मरीज अस्पताल आकर केवल परेशान हो रहे हैं। इलाज के नाम पर सिर्फ उन्हें यहां से वहां भटकाया जा रहा है।
विज्ञापन
ओटीपी के बिना नहीं हो सका पंजीकरण
अस्पताल प्रशासन ने ऑनलाइन पंजीकरण के बाद मरीजों को शारीरिक तौर पर देखने की घोषणा तो कर दी लेकिन व्यवस्था की जांच नहीं की। ऐसे में जब मरीजों ने ऑनलाइन पंजीकरण के लिए आवेदन किया तो उन्हें ओटीपी ही नहीं मिला। इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन तक पहुंची तो उन्होंने आनन-फानन में आईटी विभाग को जांच करने को कहा। इसके बाद यह चूक सामने आई। तमाम प्रयास के बावजूद भी इक्का-दुक्का मरीजों का ही ओटीपी जनरेट हो सका। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पंजीकरण की प्रक्रिया में फेरबदल कर बिना ओटीपी के ही पंजीकरण करने की व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। देर शाम को ओटीपी की समस्या हल हुई।
क्या कहते हैं अधिकारी
काफी दिनों से वेबसाइट के क्रियाशील न होने के कारण ऑनलाइन पंजीकरण में कुछ परेशानी हुई है। उसे चेक करवाकर ठीक कराया जा रहा है। पहले दिन टेलीमेडिसिन के अलावा ओपीडी में 214 मरीजों को परामर्श दिया गया। -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच-32