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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Latest News: Glorious History Of Kosali Village Of Haryana

हरियाणाः 5 ब्रिगेडियर, 25 कर्नल और तीनों सेनाओं में करीब 106 अफसरों वाला गांव, शानदार है शौर्यगाथा

Fri, 12 Jul 2019 04:55 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रेवाड़ी (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रेवाड़ी (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 12 Jul 2019 04:55 PM IST
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Haryana Latest News: Glorious History Of Kosali Village Of Haryana
कोसलीया गोत्र की आस्था का केन्द्र बाबा मुक्तेश्वर पुरी जी महाराज मठ - फोटो : अमर उजाला

कोसली गांव की अपनी एक ऐतिहासिक विरासत है। यहां के खून में देशभक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। इसी का परिणाम है कि पहले विश्वयुद्ध में कोसली के नौ वीर जवान वीरगति को प्राप्त हुए....यहीं से इस गांव की शौर्य गाथा शुरु हुई। शौर्य की बात हो या फिर आस्था की यहां के सैनिक व मठ देश-विदेश तक में अपनी पहचान रखते हैं।

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दूसरे विश्वयुद्ध में इस गांव से 247 लोगों ने भाग लिया। इनमें से छह वीरगति को प्राप्त हुए थे। देश की कोई लड़ाई हो या फिर किसी ऑपरेशन की बात यहां का वीर जवान की भागेदारी हर जगह दिखाई देती है।
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गांव के युवक को मिला था जंगी इनाम
यह गांव इलाके में बहादुरी के लिए जाना जाता है। इस गांव के एक युवक को जंगी इनाम दिया गया था। जो आज भी उनके परिवार को दिया जा रहा है। इसके बाद इस गांव से 1939 से 1945 की जंग में एक दर्जन से अधिक लोगों को अपनी बहादुरी दिखाने पर सेना में अंग्रेजों ने अफसर बनाया। इसी गांव के मेजर उमराव सिंह को मिलिट्री कार्स से सम्मानित किया गया। 

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इस गांव से करीब पांच ब्रिगेडियर, 25 कर्नल और तीनों सेनाओं में करीब 106 अफसर हैं। इसके अतिरिक्त गांव के ही सुधीर यादव पुलिस में आईजी हैं। मेजर जरनल यशवंत यादव जो मेजर उमराव सिह के पोते हैं और राष्ट्रपति से सम्मानित हैं। इसके अतिरिक्त आरपीएफ और बीएसएफ में भी 50 से अधिक अफसर इसी गांव से हैं। 

गांव के रावरामनारायण देवीलाल सरकार में एमएलए 1977 में बने थे। इसके बाद 1987 में पुन: एमएलए बनने के बाद मंत्री बने। कोसली को लंबे इंतजार के बाद 1978 में सब तहसील व एक नवम्बर 1989 को सब डिविजन का दर्जा मिला। 

राजा के नाम पर पड़ा नाम कोसली
सेवानिवृत्त डॉ. सुचेत, पूर्व पंच राजीव यादव, अभे सिंह नम्बरदार ने बताया कि करीब 800 साल पहले गांव के एक हिस्से में बाबा मुक्तेश्वरपुरी तपस्या में लीन थे। शेखावटी के राजा कोसल सिंह यहां से गुजरते समय रात होने के कारण यहां रुके तो बाबा ने उन्हें यहीं बसने को कहा। उन्होंने कहा कि आपसे इस गांव को ना तो कोई जीत सकेगा और ना ही हरा सकेगा। 

आपके नाम से ही कोसल गोत्र होगा। इसके बाद राजा कोसल ने गांव बसाया और इसके बाद पठानों, नवाब फिरोजपुर झिरका ने इस गांव पर तीन बार आक्रमण किया लेकिन वे यहां से हार कर ही गए। राजा ने गांव के चारों ओर चोवल खाई बनाकर गांव को किला का रूप दिया हुआ था। इसके अलावा 52 बंगला के नाम से भी मिली पहचान मिली। 

कोसली मठ सभी की आस्था का केंद्र
गांव का मठ यहां के लोगों की आस्था का केन्द्र है। गांव में विद्यमान कोसली मठ विदेश में भी प्रसिद्ध है। दुनिया के किसी भी कौने में कोसलीया गोत्र के घर पर शुभ कार्य विवाह, बच्चा जन्म होने यहां तक नौकरी पाने पर यहां कोसली मठ में मत्था टेकने जरूर आते हैं। कोसली मठ को कोसलीया गोत्र के ही नहीं बल्कि सभी गोत्रों के लोग पूजते हैं। 

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