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डिस्कोथेक में जाने की शौकीन युवतियों के लिए बड़ी गुड न्यूज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Apr 2016 10:31 AM IST
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चंडीगढ़ में डिस्को
- फोटो : डेमो फोटो
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डिस्कोथेक में जाने की शौकीन युवतियों को चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ा तोहफा दिया है। ड्रेस कोड पर रोक लगा दी गई है। डिस्कोथेक या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए कोई ड्रेस कोड प्रशासन की पॉलिसी में लागू नहीं किया गया है। यह बात चंडीगढ़ के गृहसचिव अनुराग अग्रवाल ने एक प्रेसवार्ता में बनाई नई मनोरंजन पॉलिसी के संबंध में कही। बुधवार को ‘कंट्रोलिंग ऑफ प्लेसिस ऑफ पब्लिक एम्यूजमेंट-2016’ के बारे में अनुराग अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट की है।
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उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ देश के चुनिंदा मॉडर्न शहरों में शामिल है। प्रशासन शहर में टूरिज्म और नाइट लाइफ पर किसी तरह की पाबंदी के पक्ष में नहीं है। महिलाओं के कपड़ों पर कुछ गलत खबरें प्रकाशित की गई हैं। कुछ लोग जानबूझ कर मामले को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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चंडीगढ़ प्रशासन की पॉलिसी में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कुछ फैसले लिए गए हैं। डीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने पॉलिसी को मंजूरी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पॉलिसी को लेकर कुछ बेहतर सुझाव आए तो पॉलिसी में संशोधन किया सकता है।
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गौरतलब है कि बुधवार को कुछ अखबारों और न्यूज चैनलों ने चंडीगढ़ के डिस्कोथेक में लड़कियों पर ड्रेस कोड लागू करने का दावा किया था। डिस्कोथेक में स्कर्ट और कम कपड़े पहनने पर पाबंदी की बात कही गई थी। प्रशासन की पॉलिसी का कड़ा विरोध होता देख अधिकारियों को प्रेसवार्ता कर मामले में बुधवार को सफाई देनी पड़ी।
यूटी प्रशासन ने फरवरी 2016 में पब्लिक एम्यूजमेंट पॉलिसी तैयार की है। पॉलिसी नोटिफाई की गई और उसे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों पर ही लागू किया गया। अग्रवाल ने कहा कि पॉलिसी में कहीं भी डिस्कोथेक में महिलाओं को स्कर्ट पहनने से रोक का जिक्र नहीं किया गया है। गृहसचिव ने कहा कि पॉलिसी को सुरक्षित माहौल बनाने के मकसद से तैयार किया है।
1 अप्रैल से लागू हुई पॉलिसी: पब्लिक एम्यूजमेंट पॉलिसी को 1 अप्रैल से लागू किया गया है। इसके तहत अब डिस्कोथेक के लिए नियम और कड़े हो जाएंगे। मालिकों को जिला मजिस्ट्रेट दफ्तर से अनुमति प्रमाण पत्र लेना होगा। पॉलिसी के तहत किसी भी डिस्कोथेक में महिलाओं पर कम कपड़ों में विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। पॉलिसी में किसी भी एग्जीबिशन में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले पोस्टर नहीं लगाए जा सकेंगे।
डीसी की अध्यक्षता में बनाई है पॉलिसी: पब्लिक एम्यूजमेंट पॉलिसी को डीसी की अध्यक्षता में गठित 8 सदस्यों की कमेटी ने बनाया है। कमेटी में एसएसपी, नगर निगम कमिश्नर, एस्टेट ऑफिसर, एक्साइज एंड टैक्सेशन, लेबर कमिश्नर, डायरेक्टर हेल्थ सर्विस और एक अन्य मेंबर शामिल हैं।
नोडल ऑफिसर को मिली पावर: पब्लिक एम्यूजमेंट पॉलिसी के तहत नोडल अफसर को कई तरह की शक्तियां दी गई हैं। इसके तहत किसी भी डिस्कोथेक व्यवसायी का आवेदन नियम फॉलो न करने पर रद्द किया जा सकता है। पॉलिसी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।
-सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले आवेदनकर्ता सभ्य और चरित्रवान होने चाहिए।
-समाज में अच्छा व्यक्तित्व होना चाहिए।
-वह किसी भी धर्म को मानने वाला हो सकता है।
-किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए ।
-किसी भी तरह से शांति भंग नहीं होनी चाहिए।
-कामकाज ऐसा न हो जिससे आम जनता को हानि पहुंचे।
-किसी भी तरह की एग्जीबिशन या विज्ञापन में महिलाओं का गलत पोस्टर नहीं लगा सकते।
-नोडल ऑफिसर बिना कोई कारण बताए सर्टिफिकेट रद्द कर सकता है।
सुनवाई का मिलेगा पूरा मौका: गृहसचिव अनुराग अग्रवाल ने कहा किसी भी स्थिति में सर्टिफिकेट कैंसल होने पर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। यूटी प्रशासन में एडवाइजर के पास इस मामले में अपील की जा सकती है।