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पठानकोट की करिश्मा ने बयां किया दर्द: कहा- हर धमाके से कलेजा कांप उठता है, ट्रेन में भारतीय को नहीं बैठाया जा रहा

Tue, 01 Mar 2022 02:56 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 01 Mar 2022 02:56 PM IST
सार

बेटी ने हमारा हौसला बढ़ाया है कि मम्मी-पापा आप चिंता मत करना और खुद का ख्याल रखना। पिता सूरम सिंह ने अफसोस जताया कि बच्चों को बाहर भेजना हमारी मजबूरी थी। अगर भारत में एमबीबीएस सीटें मिल जातीं तो हम कभी अपनी बेटी को यूक्रेन न भेजते।

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Girl student from Pathankot stranded in Kyiv capital of Ukraine
करिश्मा के परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित बोगोमोलेस्ट यूनिवर्सिटी के बंकर में भी विद्यार्थियों समेत कुल 35 भारतीय फंसे हैं। यह जानकारी श्री गुरु गोबिंद सिंह नगर निवासी करिश्मा ने दी। करिश्मा ने अपने परिवार को बताया कि कीव में चारों तरफ बमबारी हो रही है। जैसे ही कोई जोरदार धमाका होता है तो कलेजा कांप उठता है। इंटरनेट सेवा भी कभी बंद तो कभी चल पड़ती हैं। 

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एटीएम न चलने से पैसे भी नहीं निकाल पा रहे हैं। खाने-पीने के सामान की भारी किल्लत है। सोमवार को करिश्मा अन्य भारतीयों के साथ निकटवर्ती रेलवे स्टेशन पर पहुंची हैं। अब वहां से उन्हें सुरक्षित देश की सीमा तक लाया जाएगा। करिश्मा के पिता सूरम सिंह ने बताया कि उनकी बेटी कीव में चार साल से जिफरोजिया मेडिकल स्टेट यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। 
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23 फरवरी को करिश्मा को भारत लौटना था। 600 किलोमीटर का सफर तय किया और कीव एयरपोर्ट पहुंची लेकिन तभी वहां धमाका हो गया और अफरा-तफरी मच गई। सायरन बजने लगे और लोग इधर-उधर भागने लगे।
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पिता ने बताया कि जैसे-तैसे कर करिश्मा कीव में बोगोमोलेस्ट नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंकर में छिप गई। उसके साथ करीब 35 अन्य भारतीय भी वहां फंसे हैं। आज बेटी सुरक्षित रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई है। बेटी ने हमारा हौसला बढ़ाया है कि मम्मी-पापा आप चिंता मत करना और खुद का ख्याल रखना। पिता सूरम सिंह ने अफसोस जताया कि बच्चों को बाहर भेजना हमारी मजबूरी थी। अगर भारत में एमबीबीएस सीटें मिल जातीं तो हम कभी अपनी बेटी को यूक्रेन न भेजते।

भारतीयों को ट्रेन में नहीं बैठाया जा रहा: करिश्मा
कीव रेलवे स्टेशन पर भारतीयों को ट्रेन में नहीं बिठाया जा रहा। पापा, शाम से पांच ट्रेनें गुजर चुकी हैं। किसी भी ट्रेन में भारतीय लोगों को बैठने नहीं दिया जा रहा। करिश्मा ने अपने परिवार को बताया कि कीव में चारों तरफ बमबारी हो रही है।


करिश्मा अन्य भारतीयों के साथ कीव रेलवे स्टेशन पर पहुंचीं। जहां उन्हें सुरक्षित देश की सीमा तक लाने की बात कही गई थी। अब वहां खड़े लोग अधिकारियों से मिन्नत कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। सूरम सिंह ने बताया कि उनकी बेटी सुरक्षित रेलवे स्टेशन पर पहुंची लेकिन शाम सात बजे उसका फोन आया कि कई ट्रेन गुजर चुकी हैं। भारतीय लोगों को उसमें बैठने नहीं दिया गया। सूरम सिंह का कहना है कि बच्चे रो रहे हैं। सरकार को जल्द कोई हल निकालना चाहिए।

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