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दादूपुर नलवी नहर के लिए अधिग्रहीत जमीन के डिनोटिफाई का गजट नोटिफिकेशन जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
Updated Sun, 05 Aug 2018 12:10 PM IST
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प्रदेश सरकार ने दादूपुर नलवी सिंचाई स्कीम के लिए साल 2004 व उसके बाद अधिग्रहीत की गई जमीन के डिनोटिफाई का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सिंचाई तथा जल संसाधन विभाग ने करीब 830 एकड़ जमीन को इसमें शामिल किया है। करीब छह एकड़ जमीन को सड़क निर्माण के चलते अपने पास रखा है। अधिसूचना के मुताबिक अधिग्रहीत की गई जमीन का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं है बताया।
राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी एन लैंड एक्वीजीशन, रिहैबीलिडेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 की सेक्शन 101ए की पावर का इस्तेमाल करते हुए राज्यपाल ने डिनोटिफिकेशन किया है। जो किसान अपनी जमीन वापस लेना चाहता है, वह गजट नोटिफिकेशन जारी होने के तीस दिन के अंदर-अंदर जमीन अधिग्रहण अधिकारी अंबाला के पास लिखित में अपना दावा डाल सकते हैं।
सरकार ने जो मुआवजा दिया हुआ है, किसानों को वह वापस करना होगा। अगर कोई ब्याज बनता है तो वह भी चुकाना होगा। सरकार जमीन वापस करने से पहले ब्याज ले सकती है। सरकार ने ये भी साफ किया है कि अधिग्रहण करने से किसानों को जो आर्थिक नुकसान हुआ है तो उसके हकदार होंगे।
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सिंचाई विभाग ने कोर्ट में पेश की नोटिफिकेशन की कॉपी
सरकार की तरफ से तीन अगस्त को गजट नोटिफिकेशन जारी किए गया। शनिवार को यमुनानगर में एडीजे नरेश कत्याल की कोर्ट में कंपनसेशन को लेकर सुनवाई थी। इस दौरान सिंचाई विभाग के एसई विमल कुमार और एक्सईएन हरिदेव कांबोज ने नोटिफिकेशन की कॉपी कोर्ट में पेश की। कोर्ट अब इस पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगी।
सरकार ने इस योजना को व्यावहारिक नहीं पाया और इसलिए इस योजना को छोड़ने और अधिग्रहीत भूमि को डिनोटिफाई किया गया है। एडीजी की कोर्ट में गजट नोटिफिकेशन की कापी जमा करवा दी गई है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। - विमल कुमार, एसई, सिंचाई विभाग
एक्ट में किया संशोधन
27 सितंबर 2017 को हरियाणा सरकार की कैबिनेट की मीटिंग हुई थी। इसमें दादूपुर नलवी नहर की जमीन को डिनोटिफाई करने का नोटिफिकेशन जारी करने का अप्रूवल दिया गया था। शुरू में सरकार ने एडवोकेट जरनल की सलाह पर इस जमीन को 2013 एक्ट के सेक्शन 101 के तहत डिनोटिफाई करने के आदेश जारी करने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में महसूस किया गया कि इस सेक्शन के तहत यह डिनोटिफाई नहीं हो सकता। यह काम सेक्शन 101ए में संशोधन करके ही किया जा सकता है। इस पर सरकार ने इस संशोधन के लिए प्रक्रिया शुरू की।
काबिलेगौर है कि कैबिनेट की मीटिंग के बाद जो नोटिफिकेशन 25 दिसंबर 2017 को होनी थी। वह दस महीने यानि 311 दिन बाद तीन अगस्त 2018 को हुई। बताया जा रहा है कि हरियाणा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। दरअसल कैबिनेट की मंजूरी के बाद 90 दिन के भीतर नोटिफिकेशन जारी किया जाना अनिवार्य है। लेकिन एक्ट में संशोधन में मंजूरी में देरी के चलते यह लेट हो गया।
1985 में शुरू हुई थी योजना
दादूपुर नलवी योजना 1985 में शुरू की गई थी। यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत के साथ इस परियोजना को सरकार ने मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए 1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी, लेकिन इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। बाद में, अक्टूबर 2005 के दौरान सरकार द्वारा इस परियोजना को 267.27 करोड़ रुपये के साथ फिर से मंजूरी दी गई। इसमें शाहबाद फीडर, शाहबाद डिस्ट्रीब्यूटरी और नलवी डिस्ट्रीब्यूटरी के साथ-साथ 590 क्यूसिक डिस्चार्ज के उपयोग के लिए 23 नम्बर ऑफटेकिंग चैनलों का निर्माण किया जाना था।
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राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी एन लैंड एक्वीजीशन, रिहैबीलिडेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 की सेक्शन 101ए की पावर का इस्तेमाल करते हुए राज्यपाल ने डिनोटिफिकेशन किया है। जो किसान अपनी जमीन वापस लेना चाहता है, वह गजट नोटिफिकेशन जारी होने के तीस दिन के अंदर-अंदर जमीन अधिग्रहण अधिकारी अंबाला के पास लिखित में अपना दावा डाल सकते हैं।
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सरकार ने जो मुआवजा दिया हुआ है, किसानों को वह वापस करना होगा। अगर कोई ब्याज बनता है तो वह भी चुकाना होगा। सरकार जमीन वापस करने से पहले ब्याज ले सकती है। सरकार ने ये भी साफ किया है कि अधिग्रहण करने से किसानों को जो आर्थिक नुकसान हुआ है तो उसके हकदार होंगे।
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सिंचाई विभाग ने कोर्ट में पेश की नोटिफिकेशन की कॉपी
सरकार की तरफ से तीन अगस्त को गजट नोटिफिकेशन जारी किए गया। शनिवार को यमुनानगर में एडीजे नरेश कत्याल की कोर्ट में कंपनसेशन को लेकर सुनवाई थी। इस दौरान सिंचाई विभाग के एसई विमल कुमार और एक्सईएन हरिदेव कांबोज ने नोटिफिकेशन की कॉपी कोर्ट में पेश की। कोर्ट अब इस पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगी।
सरकार ने इस योजना को व्यावहारिक नहीं पाया और इसलिए इस योजना को छोड़ने और अधिग्रहीत भूमि को डिनोटिफाई किया गया है। एडीजी की कोर्ट में गजट नोटिफिकेशन की कापी जमा करवा दी गई है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। - विमल कुमार, एसई, सिंचाई विभाग
एक्ट में किया संशोधन
27 सितंबर 2017 को हरियाणा सरकार की कैबिनेट की मीटिंग हुई थी। इसमें दादूपुर नलवी नहर की जमीन को डिनोटिफाई करने का नोटिफिकेशन जारी करने का अप्रूवल दिया गया था। शुरू में सरकार ने एडवोकेट जरनल की सलाह पर इस जमीन को 2013 एक्ट के सेक्शन 101 के तहत डिनोटिफाई करने के आदेश जारी करने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में महसूस किया गया कि इस सेक्शन के तहत यह डिनोटिफाई नहीं हो सकता। यह काम सेक्शन 101ए में संशोधन करके ही किया जा सकता है। इस पर सरकार ने इस संशोधन के लिए प्रक्रिया शुरू की।
काबिलेगौर है कि कैबिनेट की मीटिंग के बाद जो नोटिफिकेशन 25 दिसंबर 2017 को होनी थी। वह दस महीने यानि 311 दिन बाद तीन अगस्त 2018 को हुई। बताया जा रहा है कि हरियाणा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। दरअसल कैबिनेट की मंजूरी के बाद 90 दिन के भीतर नोटिफिकेशन जारी किया जाना अनिवार्य है। लेकिन एक्ट में संशोधन में मंजूरी में देरी के चलते यह लेट हो गया।
1985 में शुरू हुई थी योजना
दादूपुर नलवी योजना 1985 में शुरू की गई थी। यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत के साथ इस परियोजना को सरकार ने मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए 1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी, लेकिन इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। बाद में, अक्टूबर 2005 के दौरान सरकार द्वारा इस परियोजना को 267.27 करोड़ रुपये के साथ फिर से मंजूरी दी गई। इसमें शाहबाद फीडर, शाहबाद डिस्ट्रीब्यूटरी और नलवी डिस्ट्रीब्यूटरी के साथ-साथ 590 क्यूसिक डिस्चार्ज के उपयोग के लिए 23 नम्बर ऑफटेकिंग चैनलों का निर्माण किया जाना था।