{"_id":"591c4a984f1c1bf2348b4569","slug":"fraud-the-name-of-fake-jobs-in-amritsar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रिश्वत देकर मिली नौकरी, 6 महीने तक आई सैलरी लेकिन निकली ये सच्चाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिश्वत देकर मिली नौकरी, 6 महीने तक आई सैलरी लेकिन निकली ये सच्चाई
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Thu, 18 May 2017 09:23 AM IST
विज्ञापन
नौकरी के नाम पर ठगी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रिश्वत देकर लोगों को नौकरी मिल गई, 6 महीने तक उन्हें बकायदा सैलरी भी मिलती रही, लेकिन एक दिन ऐसी सच्चाई का सामना हुआ कि सबका सिर चकरा गया। नगर निगम में पूर्व निकाय मंत्री अनिल जोशी के कार्यकाल में फर्जी नौकरियां देकर लाखों रुपये ठगने का बड़ा मामला सामने आया है। निगम के ज्वाइंट कमिश्नर अलका को 46 लोगों ने हल्फिया बयान देकर कहा है कि तरनतारन के सुखविंदर सिंह राजू ने 60 हजार से तीन लाख रुपये लेकर उन्हें निगम के सिविल विभाग में वेरीफिकेशन की पोस्ट पर नियुक्ति दी थी।
छह महीने तक उन्हें वेतन के नाम पर बाकायदा दस हजार रुपये भी दिए जाते रहे, लेकिन बाद में वेतन बंद कर दिया गया। उनकी रजिस्टर में रोजाना हाजिरी भी लगाई जाती थी। उन्हें जो आईडी दी गई है, उन पर तत्कालीन कमिश्नर के हस्ताक्षर भी हैं। यह हस्ताक्षर फर्जी भी हो सकते हैं।
विक्रमजीत सिंह, लवप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरपाल सिंह, रछपाल सिंह, सुरजीत सिंह, जुगराज सिंह कहते हैं कि उन्हें निगम में नौकरी पर रखने के लिए सुखविंदर सिंह राजू ने मोटी रकम ली थी। इस शख्स कहता था कि उसकी ऊपर तक पहुंच है। सभी की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन यह छलावा था। बाद में जब उन्होंने इस बाबत नगर निगम से संपर्क साधा तो पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
छह महीने तक उन्हें वेतन के नाम पर बाकायदा दस हजार रुपये भी दिए जाते रहे, लेकिन बाद में वेतन बंद कर दिया गया। उनकी रजिस्टर में रोजाना हाजिरी भी लगाई जाती थी। उन्हें जो आईडी दी गई है, उन पर तत्कालीन कमिश्नर के हस्ताक्षर भी हैं। यह हस्ताक्षर फर्जी भी हो सकते हैं।
विज्ञापन
विक्रमजीत सिंह, लवप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरपाल सिंह, रछपाल सिंह, सुरजीत सिंह, जुगराज सिंह कहते हैं कि उन्हें निगम में नौकरी पर रखने के लिए सुखविंदर सिंह राजू ने मोटी रकम ली थी। इस शख्स कहता था कि उसकी ऊपर तक पहुंच है। सभी की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन यह छलावा था। बाद में जब उन्होंने इस बाबत नगर निगम से संपर्क साधा तो पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है।
विज्ञापन
शातिर निकला नौकरी देने वाला नटवरलाल
ठगी का शिकार युवक
- फोटो : अमर उजाला
नौकरी के नाम पर छले गए रछपाल सिंह कहते हैं कि उक्त आरोपी तो नटवर लाल से भी शातिर निकला। पहले उसने नौकरी लगवाने के नाम पर रकम ऐंठे, बाद में उन्हें नियुक्ति पत्र थमाया। किसी को शक न हो, इसके लिए छह महीने तक वो वेतन देता रहा है और दावा करता रहा कि उनकी नौकरी पक्की करवाने के लिए वो विभाग के मंत्री से लेकर सचिव तक के संपर्क में है।
हालांकि यह सब झूठ बोला था, क्योंकि आरोपी ने जो प्रमाण पत्र और जो आईडी दी थी, उस पर नगर निगम की फर्जी मोहर भी लगी है और हस्ताक्षर भी हैं। उधर, नगर निगम इस बाबत में अमृतसर पुलिस से संपर्क साधा है, ताकि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में भी सामने आ चुकी है धांधली
बता दें कि इसके पहले जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में बड़ी धांधली सामने आई थी। दो सप्ताह पहले बंटी नाम के एक युवक के खिलाफ पुलिस ने जाली जन्मपत्र बनाने पर नामजद किया था। बंटी नाम के इस आरोपी को अभी तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
नगर निगम की ज्वाइंट कमिश्नर अलका कहती है कि निगम में ऐसी कोई पोस्ट है ही नहीं। सारे मामले की जांच की जा रही है। जो भी आरोपी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
हालांकि यह सब झूठ बोला था, क्योंकि आरोपी ने जो प्रमाण पत्र और जो आईडी दी थी, उस पर नगर निगम की फर्जी मोहर भी लगी है और हस्ताक्षर भी हैं। उधर, नगर निगम इस बाबत में अमृतसर पुलिस से संपर्क साधा है, ताकि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में भी सामने आ चुकी है धांधली
बता दें कि इसके पहले जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में बड़ी धांधली सामने आई थी। दो सप्ताह पहले बंटी नाम के एक युवक के खिलाफ पुलिस ने जाली जन्मपत्र बनाने पर नामजद किया था। बंटी नाम के इस आरोपी को अभी तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
नगर निगम की ज्वाइंट कमिश्नर अलका कहती है कि निगम में ऐसी कोई पोस्ट है ही नहीं। सारे मामले की जांच की जा रही है। जो भी आरोपी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।