पूर्व कांग्रेस मंत्री का आरोप, संविधान का इस्तेमाल कर संविधान को ही खत्म कर रही केंद्र सरकार

संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Updated Thu, 14 Jan 2021 02:02 PM IST
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चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते पवन बंसल।
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते पवन बंसल। - फोटो : अमर उजाला

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने आरोप लगाया कि पिछले छह साल से संविधान का इस्तेमाल करके संविधान को ही खत्म किया जा रहा है। लोकतंत्र में चर्चा जरूरी है। लोगों की बातों की कद्र होनी चाहिए। कांग्रेस शुरू से करती आई है लेकिन आज यह नहीं हो रहा है। यह देश के लिए घातक है। संसद की प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है। जबरदस्ती बिना चर्चा के बिल पास हो रहे हैं। 
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चंडीगढ़ के सेक्टर 35 के कांग्रेस भवन में गुरुवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बंसल ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के पास ताकत थी कि वे उस समय जो चाहते, वह करते, उन्हें कोई रोक नहीं सकता था। वे चाहते तो तानाशही ला सकते थे। लेकिन उन्होंने लोकतंत्र को चुना। पंडित नेहरू सभी के विचारों की कद्र करते थे। 



किसान आंदोलन कब तक चलेगा, इस सवाल पर पवन बंसल ने कहा कि जब तक सरकार चाहेगी तब तक यह आंदोलन चलेगा। केंद्र सरकार जिद पर अड़ी हुई है। सरकार किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। सांसद हेमा मालिनी के बयान पर उन्होंने कहा कि हेमा मालिनी झूठ का माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं।

बंसल ने कहा कि कड़ाके की सर्दी में भी किसान डटे हुए हैं, सरकार को यह कानून वापस लेने चाहिए। लोकपाल के लिए जब कांग्रेस की सरकार थी तब उन्होंने सिविल सोसाइटी से चर्चा की थी कि लोकपाल कैसा होना चाहिए। इस सरकार को भी चाहिए कि कानून बनाने से पहले चर्चा करें कि कानून किस प्रकार किसानों के लिए फायदेमंद हो। 

किसानों के साथ खड़ी है कांग्रेस
पवन कुमार बंसल ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से किसानों के साथ है। कांग्रेस 15 जनवरी को पूरे देश में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करेगी और शांतिपूर्वक तरीके से राज भवनों का घेराव करेगी।

सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना ठीक नहीं
पवन कुमार बंसल ने कहा कि जो राजनीतिक फैसले हैं। वह उसी तरह से होने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठने चाहिए। पहले दिन सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई थी। लेकिन अगले ही दिन कमेटी के लिए चार नाम आ गए। नाम कैसे चुने गए, यह पता नहीं चल रहा है। 

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