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Chandigarh News: पूर्व चीफ इंजीनियर से दूसरे दिन भी पूछताछ, नेटवर्क खंगाल रही एसआईटी
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चंडीगढ़। नगर निगम के वित्तीय घोटाले में जांच तेज हो गई है। तत्कालीन चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा से एसआईटी ने दूसरे दिन भी लंबी पूछताछ की। नोटिस देकर तलब किए गए शर्मा शुक्रवार को जांच में शामिल हुए थे जिसके बाद शनिवार को भी उनसे गहन पूछताछ जारी रही। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने उनके बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य आरोपियों से संपर्कों को लेकर विस्तृत सवाल किए। पूछताछ के दौरान पुलिस सवालों की लंबी सूची के साथ बैठी रही और वित्तीय लेन-देन के हर पहलू को खंगाला गया। जांच में यह भी सामने आया है कि एनपी शर्मा के विक्रम वधावा और एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी के साथ करीबी संपर्क रहे हैं। आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने पूछताछ में अधिकारी के नाम का खुलासा हुआ था। दरअसल, पुलिस पहले ही रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान को हरियाणा से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ कर चुकी है। इनके खुलासों के बाद एसआईटी ने कड़ियां जोड़ते हुए कई गिरफ्तारियां की हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी आरटीजीएस और एनईएफटी डेबिट नोट तैयार कर नगर निगम के खातों से करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए। रकम पहले फर्जी खातों में डाली गई और फिर बिल्डरों व अन्य लोगों तक पहुंचाई गई। इसके लिए शेल कंपनियां बनाकर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तैयार किए गए और बाद में इस पैसे को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया।
हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने नगर निगम के खाते में महज 81 रुपये 20 पैसे ही छोड़े, जबकि खातों में करीब 95 करोड़ रुपये होने चाहिए थे।
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जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी आरटीजीएस और एनईएफटी डेबिट नोट तैयार कर नगर निगम के खातों से करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए। रकम पहले फर्जी खातों में डाली गई और फिर बिल्डरों व अन्य लोगों तक पहुंचाई गई। इसके लिए शेल कंपनियां बनाकर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तैयार किए गए और बाद में इस पैसे को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया।
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हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने नगर निगम के खाते में महज 81 रुपये 20 पैसे ही छोड़े, जबकि खातों में करीब 95 करोड़ रुपये होने चाहिए थे।