{"_id":"5812176e4f1c1b6c1ebc1bc4","slug":"former-army-chief-bikram-singh-on-peoples-who-questions-on-army-action","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सेना पर सवाल उठाने वालों को पूर्व सेना अध्यक्ष ने दिया जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेना पर सवाल उठाने वालों को पूर्व सेना अध्यक्ष ने दिया जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 28 Oct 2016 01:51 AM IST
विज्ञापन
पूर्व आर्मी चीफ बिक्रम सिंह
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना की किसी भी कार्यवाही पर सवाल उठाने वालों को पूर्व सेना अध्यक्ष ने करार जवाब दिया है। पूर्व आर्मी चीफ बिक्रम सिंह ने कहा है कि सेना की किसी भी कार्यवाही पर शक करना गलत है, इससे उनका मनोबल कम होता है।
बिक्रम सिंह ने कहा है कि भारतीय सेना वो है, जिसके लिए फेलियर कोई ऑप्शन नहीं है। बहुत शर्म की बात थी, जब सेना पर टिप्पणी की जा रही थी। पूर्व आर्मी चीफ बिक्रम सिंह वीरवार को श्रीजी इंटरनेशनल स्कूल के स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को जो जिम्मेदारी सौंपी जाती है, उसमें वह ऊंचे दर्जे का ऑपरेशन करने में सक्षम रही है।
विज्ञापन
बिक्रम सिंह ने कहा है कि भारतीय सेना वो है, जिसके लिए फेलियर कोई ऑप्शन नहीं है। बहुत शर्म की बात थी, जब सेना पर टिप्पणी की जा रही थी। पूर्व आर्मी चीफ बिक्रम सिंह वीरवार को श्रीजी इंटरनेशनल स्कूल के स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को जो जिम्मेदारी सौंपी जाती है, उसमें वह ऊंचे दर्जे का ऑपरेशन करने में सक्षम रही है।
विज्ञापन
पूर्व सेना अध्यक्ष ने कहा, सेना के लिए फेलियर का ऑप्शन नहीं
पूर्व आर्मी चीफ बिक्रम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे देश में अमेरिका, इजरायल की तर्ज पर हर नागरिक के लिए कुछ समय आर्मी में सेवाएं देने के लिए नियम लागू करने की हालत नहीं है। हम बॉर्डर पर काफी जगह डिस्टर्ब हैं। उन्होंने कहा कि एनसीसी इसका बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे देश सेवा जज्बा छात्रों में पैदा होता है और इसे अनिवार्य विषय भी शामिल किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वो पहले सर्जन बनना चाहते थे लेकिन जब वे पांचवीं कक्षा में थे तो 1962 का वार देखा तो 8वीं कक्षा में ही उन्होंने 1965 की लड़ाई हुई। इसके बाद उनमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना पैदा हुई और वह एनडीए के जरिये सेना में गए। उन्होंने कहा कि एक फौजी को कुछ नहीं चाहिए, अगर उसे देश के लोग सम्मान दें तो उसके लिए काफी है। वहीं, उन्होंने स्कूल की सराहना करते हुए कहा कि यहां पर बच्चों को सिखाया जा रहा है कि अगर आपको कोई फौजी दिखाई दे तो उसे सैल्यूट जरूर करें।
उन्होंने बताया कि वो पहले सर्जन बनना चाहते थे लेकिन जब वे पांचवीं कक्षा में थे तो 1962 का वार देखा तो 8वीं कक्षा में ही उन्होंने 1965 की लड़ाई हुई। इसके बाद उनमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना पैदा हुई और वह एनडीए के जरिये सेना में गए। उन्होंने कहा कि एक फौजी को कुछ नहीं चाहिए, अगर उसे देश के लोग सम्मान दें तो उसके लिए काफी है। वहीं, उन्होंने स्कूल की सराहना करते हुए कहा कि यहां पर बच्चों को सिखाया जा रहा है कि अगर आपको कोई फौजी दिखाई दे तो उसे सैल्यूट जरूर करें।