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19 साल बाद भ्रष्टाचार केस में पूर्व जज दोषी करार, सजा 21 को, जानें मामला
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:08 AM IST
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पूर्व सिविल जज एमएस वालिया
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19 साल, 204 सुनवाई और पांच जज बदले जाने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एमएस वालिया को दोषी करार दिया है। जज गगनगीत कौर के अनुसार वालिया ने अज्ञात स्रोतों से 52.43 लाख रुपये कमाए हैं। अदालत वालिया को 21 दिसंबर को सजा सुनाएगी। एमएस वालिया पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की शिकायत पर भ्रष्टाचार अधिनियम की रोकथाम धारा 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) (ई) के तहत केस दर्ज हुआ था।
शुरुआत में वालिया के खिलाफ सेक्टर-3 पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था। इस पर वालिया ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इसे हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ सीबीआई ने 3 फरवरी 1998 को वालिया के खिलाफ केस दर्ज किया था। सीबीआई की ओर से केस की पैरवी सीनियर सरकारी वकील पवन कुमार डोगरा और सरकारी वकील कंवर पाल सिंह ने की।
केस में वालिया के खिलाफ कुल 107 गवाह बनाए गए थे। फरवरी 1998 में सीबीआई में दर्ज मामले के अनुसार उस समय खरड़ में तैनात सिविल जज सीनियर डिवीजन एमएस वालिया ने एक मार्च 1988 से लेकर 12 फरवरी 1998 तक अलग-अलग जगह तैनाती के दौरान अज्ञात स्रोतों के जरिए 53,94,025.58 रुपये कमाए। इससे उन्होंने कई जगह बेनामी संपत्तियां भी खरीदी थीं।
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ऐसे आया मामला सामने
सेक्टर-9डी निवासी गुड्डी मंजीत और उनके पति सीनियर एडवोकेट बीएस बिंद्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक शिकायत दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि सेक्टर-9 की जिस कोठी में वह रहते हैं, उसका एक हिस्सा उनके नाम और दूसरा जिस पर एमएस वालिया रहते हैं, वह एनआरआई के नाम पर है, जिसे वालिया ने अपना अंकल बताया हुआ है। बिंद्रा और गुड्डी के अनुसार वालिया ने खुद उस घर का हिस्सा खरीदा था, जिसे कागजात में उनके अंकल एचपी सिंह के नाम पर था।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसकी जांच के आदेश दिए। इसमें शुरुआती जांच में वालिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी पाया। हाईकोर्ट ने मामले में स्व संज्ञान लेते हुए मामले में चंडीगढ़ पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर सेक्टर-3 पुलिस थाने में वालिया के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने जांच पुलिस से सीबीआई को दी
पुलिस में केस दर्ज होने के बाद वालिया ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इसे सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। साथ ही केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 3 फरवरी 1998 को वालिया के खिलाफ केस दर्ज किया। केस दर्ज होने पर पहले वालिया को सस्पेंड किया गया, लेकिन कुछ समय बाद हाईकोर्ट के आदेश पर उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
एक्साइज और आर्म्स एक्ट का भी हुआ था केस दर्ज
शुरुआत में जब केस चंडीगढ़ पुलिस में दर्ज हुआ था तो सेक्टर-3 थाना पुलिस ने वालिया के सेक्टर-9 स्थित घर पर 12 फरवरी 1998 को सर्च की थी। उस दौरान पुलिस को वहां से कई बैंक पासबुक, प्रापर्टी के दस्तावेज, 53 बोतल महंगी शराब, एक .12 बोर की डबल बैरल गन और 295 कारतूस बरामद हुए थे। इस पर सेक्टर-3 थाने में अलग से आर्म्स एक्ट और एक्साइज एक्ट का केस दर्ज हुआ था।
तीन लाख की एफडी
सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया था कि वालिया ने पत्नी, बेटे और बेटी के खाते में कुल मिलाकर तीन लाख रुपये जमा करवाए थे। इसका खुलासा होने पर वालिया का कहना था कि उसने पत्नी के नाम की एक प्रापर्टी बेची थी, ये उसके पैसे हैं। हालांकि, बाद में जांच में सामने आया कि यह पैसे वालिया ने अज्ञात स्रोतों से कमाए हैं। वहीं, सीबीआई को वालिया के पास से सेक्टर-9 स्थित कोठी के हिस्से की सेल डीड और जीपीए संबंधी कागजात मिले थे। इसके अलावा वालिया के पास से वर्धमान मिल के 12.5 लाख रुपये के डिबेंचर, लुधियाना स्थित सहगल मोटर्स में 25 लाख के निवेश संबंधी दस्तावेज भी मिले थे।
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शुरुआत में वालिया के खिलाफ सेक्टर-3 पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था। इस पर वालिया ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इसे हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ सीबीआई ने 3 फरवरी 1998 को वालिया के खिलाफ केस दर्ज किया था। सीबीआई की ओर से केस की पैरवी सीनियर सरकारी वकील पवन कुमार डोगरा और सरकारी वकील कंवर पाल सिंह ने की।
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केस में वालिया के खिलाफ कुल 107 गवाह बनाए गए थे। फरवरी 1998 में सीबीआई में दर्ज मामले के अनुसार उस समय खरड़ में तैनात सिविल जज सीनियर डिवीजन एमएस वालिया ने एक मार्च 1988 से लेकर 12 फरवरी 1998 तक अलग-अलग जगह तैनाती के दौरान अज्ञात स्रोतों के जरिए 53,94,025.58 रुपये कमाए। इससे उन्होंने कई जगह बेनामी संपत्तियां भी खरीदी थीं।
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ऐसे आया मामला सामने
सेक्टर-9डी निवासी गुड्डी मंजीत और उनके पति सीनियर एडवोकेट बीएस बिंद्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक शिकायत दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि सेक्टर-9 की जिस कोठी में वह रहते हैं, उसका एक हिस्सा उनके नाम और दूसरा जिस पर एमएस वालिया रहते हैं, वह एनआरआई के नाम पर है, जिसे वालिया ने अपना अंकल बताया हुआ है। बिंद्रा और गुड्डी के अनुसार वालिया ने खुद उस घर का हिस्सा खरीदा था, जिसे कागजात में उनके अंकल एचपी सिंह के नाम पर था।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसकी जांच के आदेश दिए। इसमें शुरुआती जांच में वालिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी पाया। हाईकोर्ट ने मामले में स्व संज्ञान लेते हुए मामले में चंडीगढ़ पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर सेक्टर-3 पुलिस थाने में वालिया के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने जांच पुलिस से सीबीआई को दी
पुलिस में केस दर्ज होने के बाद वालिया ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इसे सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। साथ ही केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 3 फरवरी 1998 को वालिया के खिलाफ केस दर्ज किया। केस दर्ज होने पर पहले वालिया को सस्पेंड किया गया, लेकिन कुछ समय बाद हाईकोर्ट के आदेश पर उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
एक्साइज और आर्म्स एक्ट का भी हुआ था केस दर्ज
शुरुआत में जब केस चंडीगढ़ पुलिस में दर्ज हुआ था तो सेक्टर-3 थाना पुलिस ने वालिया के सेक्टर-9 स्थित घर पर 12 फरवरी 1998 को सर्च की थी। उस दौरान पुलिस को वहां से कई बैंक पासबुक, प्रापर्टी के दस्तावेज, 53 बोतल महंगी शराब, एक .12 बोर की डबल बैरल गन और 295 कारतूस बरामद हुए थे। इस पर सेक्टर-3 थाने में अलग से आर्म्स एक्ट और एक्साइज एक्ट का केस दर्ज हुआ था।
तीन लाख की एफडी
सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया था कि वालिया ने पत्नी, बेटे और बेटी के खाते में कुल मिलाकर तीन लाख रुपये जमा करवाए थे। इसका खुलासा होने पर वालिया का कहना था कि उसने पत्नी के नाम की एक प्रापर्टी बेची थी, ये उसके पैसे हैं। हालांकि, बाद में जांच में सामने आया कि यह पैसे वालिया ने अज्ञात स्रोतों से कमाए हैं। वहीं, सीबीआई को वालिया के पास से सेक्टर-9 स्थित कोठी के हिस्से की सेल डीड और जीपीए संबंधी कागजात मिले थे। इसके अलावा वालिया के पास से वर्धमान मिल के 12.5 लाख रुपये के डिबेंचर, लुधियाना स्थित सहगल मोटर्स में 25 लाख के निवेश संबंधी दस्तावेज भी मिले थे।