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Haryana News: गेहूं नहीं मिलने से हरियाणा में 17 मिलें बंद, आटे के दाम भी बढ़े

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 25 Jan 2023 02:17 AM IST
सार

एफसीआई के पास गेहूं का कम भंडार होने के चलते प्रदेश के कई जिलों में पीडीएस की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। मजबूरी में दूसरे जिलों से आपूर्ति दी जा रही है। फरीदाबाद, पलवल, भिवानी, हिसार और पंचकूला समेत अन्य जिलों में पीडीएस का भंडार भी कम है।
 

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की ओर से टेंडर नहीं करने से हरियाणा के आटा मिलों में गेहूं की कमी हो गई है। आलम ये है कि पिछले छह माह से गेहूं नहीं मिलने से 17 आटा मिल बंद हो गई हैं। शेष मिलों पर भी भंडार कम है। वहीं, दूसरी ओर बाजार में गेहूं और आटे के दाम बढ़ गए हैं। पिछले तीन माह में बाजार में गेहूं के रेट 600 रुपये प्रति क्विटंल और आटे के रेट 13 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गए हैं।



एफसीआई की ओर से हर साल जुलाई माह से ओपन बोली की शुरुआत की जाती है लेकिन इस बार एफसीआई के पास ही भंडार कम है। इसलिए केंद्र सरकार से ओएमएसएस (ओपन मार्केट सेल्स स्कीम) की पॉलिसी ही जारी नहीं की। इसलिए हरियाणा में एफसीआई ने गेहूं नहीं बेचा। मजबूरी में आटा मिल संचालकों को दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर गेहूं खरीद करना पड़ रहा है। 


महंगा गेहूं खरीद का असर आटे के दामों पर भी पड़ रहा है। इस समय हरियाणा में औसतन 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक आटा बिक रहा है, जबकि तीन माह पहले तक यही आटा 27 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा था। वहीं, गेहूं की बात करें तो पहले जो गेहूं 2700 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था, बाजार में उसके भाव 3300 रुपये तक पहुंच गए हैं। हरियाणा में कुल छोटे और बड़े 47 आटा मिल हैं। मिल संचालकों को गेहूं के बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।

कई जिलों में पीडीएस आपूर्ति में भी आ रही दिक्कत
एफसीआई के पास गेहूं का कम भंडार होने के चलते प्रदेश के कई जिलों में पीडीएस की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। मजबूरी में दूसरे जिलों से आपूर्ति दी जा रही है। फरीदाबाद, पलवल, भिवानी, हिसार और पंचकूला समेत अन्य जिलों में पीडीएस का भंडार भी कम है।

हरियाणा में 15.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं का ही भंडार
इस समय हरियाणा एफसीआई के भंडार की बात करें तो मात्र 15.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं गोदामों में रखा है। यह पिछले साल की तुलना में काफी कम है। एफसीआई अधिकारियों का कहना है कि एक तो पिछली बार लक्ष्य के मुकाबला 50 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद हो पाई थी। हरियाणा से लक्ष्य 80 लाख मीट्रिक टन का था लेकिन 40 लाख एमटी ही गेहूं खरीद हो सका था। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मुफ्त राशन योजना के लिए भी प्रदेश से स्टॉक बाहर भेजा गया है। इसलिए इस बार अतिरिक्त स्टाक नहीं है। अधिकारियों का दावा है कि इस स्टाक से अप्रैल तक का काम चल जाएगा और किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। अगर केंद्र से स्कीम आई तो 1 लाख मीट्रिक टन गेहूं ओपन बोली में भी बेचा जाएगा। वहीं, अप्रैल माह में गेहूं की नई फसल आने के बाद ही गेहूं की कमी पूरी हो पाएगी।
 
हर साल जुलाई माह से एफसीआई गेहूं की बोली करता है लेकिन इस बार अभी तक स्कीम नहीं आई है। पिछले तीन माह से आटा मिलों को गेहूं आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस फेर में 17 छोटी-बड़ी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि अन्य को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन इस संबंध में केंद्रीय खाद्य सचिव से भी मुलाकात कर चुकी है लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं निकाला गया है। - उमेश शर्मा, राज्य प्रधान, फ्लोर मिल एसोसिएशन हरियाणा।
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