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अलविदा मिग-21: पहला घर चंडीगढ़...तीन तंबुओं से शुरू हुई थी मिग की स्क्वॉड्रन, राजस्थान शिफ्ट करने की ये थी वजह

Wed, 24 Sep 2025 10:45 PM IST
अंकेश ठाकुर मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 24 Sep 2025 10:45 PM IST
सार

भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-21 अब रिटायर होने वाला है। खास बात यह है कि इस जंगी जहाज का पहला घर चंडीगढ़ था। तीन तंबुओं से मिग-21 की पहली स्क्वॉड्रन की शुरुआत हुई थी। 

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First MiG-21 squadron started from three tents in Chandigarh
फाइटर जेट मिग-21 की पहली स्क्वॉड्रन 1963 में चंडीगढ़ में शुरू हुई थी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय वायुसेना के पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21 की पहली स्क्वॉड्रन 1963 में चंडीगढ़ में तीन तंबुओं में शुरू हुई थी। दो साल तक यह स्क्वॉड्रन अपने पहले घर चंडीगढ़ में ही रही। चूंकि इस लड़ाकू विमान को दुश्मन की पहुंच और नजर से दूर रखना था इसलिए इसे यहां से शिफ्ट कर दिया गया।

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शुरुआती दौर में चंडीगढ़ से मिग-21 का भावनात्मक लगाव रहा है इसलिए इसे 26 सितंबर (शुक्रवार) को इसके पहले घर से ही विदाई दी जाएगी। रूस से आने के बाद मिग-21 को कहां रखा जाए इस पर खूब मंथन किया गया। उस वक्त एयरफोर्स विमानों को टाइप बेस्ड सिद्धांत के तहत एक ही स्थान पर रखा जाता था ताकि उपकरणों, मैनपॉवर और तकनीकी ज्ञान का बढ़िया उपयोग किया जा सके। उस वक्त पुणे में टेम्पेस्ट विमान की विंग थी। कलाईकुंडा में मिस्टेयर की स्क्वॉड्रन थी और हंटर विमान का घर अंबाला था। इसी तरह मिग-21 का घर ढूंढा जा रहा था। निर्णय लिया गया कि इन्हें जालंधर के आदमपुर एयरबेस पर रखा जाएगा। विंग कमांडर दिलबाग सिंह पहले कमांडिंग ऑफिसर थे। आदमपुर एयरबेस को साल 1950 में प्लान शिखर के तहत बनाया गया था। साल 1962 में वहां केवल नंबर मालवाहक विमान की स्क्वाड्रन नंबर 41 थी। पाकिस्तान सीमा से नजदीकी व अन्य सुरक्षा कारणों के चलते यह योजना बदल दी गई।

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First MiG-21 squadron started from three tents in Chandigarh
शुरुआती दौर में जंगी जहाज मिग-21 - फोटो : अमर उजाला

बाद में वायु सेना मुख्यालय ने तय किया कि मिग-21 हिंडन में तैनात होगा। यह एक बिल्कुल नया हवाई अड्डा था जो अभी निर्माणाधीन था इसलिए छह माह तक मिग-21 के लिए एक अस्थायी अड्डे की तलाश शुरू की गई जो चंडीगढ़ पर खत्म हुई। उस वक्त चंडीगढ़ में रूस के विमान एएन-12, आईएल-14 और एमआई-4 संचालित थे। यहां मिग-21 केवल छह माह के लिए आए थे मगर उन्हें दो साल तक यहां तैनात रखा गया।

साल 2002 तक रहा चंडीगढ़ से जुड़ाव भारतीय वायुसेना की पहली मिग-21 स्क्वॉड्रन नंबर 28 का गठन चंडीगढ़ में किया गया था। इसके लिए छोटा हैंगर बनाया गया। जहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के बाहर तीन तंबू लगाए गए। एक तंबू में उड़ान कार्यालय था। दूसरा डीएसएस के लिए और तीसरा तंबू अर्दली कक्ष बनाया गया। एटीसी के अंदर, एक कमरा उड़ान किट स्टोर और दूसरा चेंजिंग एरिया था। स्क्वॉड्रन समृद्ध होने लगी और विमानों व पायलटों की संख्या भी बढ़ती रही। चंडीगढ़ में 200 से ज्यादा पायलटों को मिग-21 के लिए तैनात किए गए। भले ही बाद में मिग-21 की स्क्वॉड्रन राजस्थान के नाल एयरफोर्स स्टेशन में शिफ्ट हो गई मगर चंडीगढ़ से मिग का जुड़ाव 2002 तक बना रहा। चंडीगढ़ स्थित एक स्क्वॉड्रन ने साल 1988 से 2002 तक एक संरक्षक के रूप में इन विमानों की निगरानी करती रही। यही वजह है कि मिग-21 के लिए चंडीगढ़ केवल एक बेस से कहीं अधिक रहा।

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