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पहले बेटी को नेशनल चैंपियन बनाया फिर कर्म पिता बन दूसरे के बेटे का भविष्य संवारा
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चंडीगढ़। सेक्टर-22 निवासी मुनीष जिंदल ने पहले अपनी बेटी को स्केटिंग में नेशनल चैंपियन बनाया। बेटी को प्रेक्टिस करते देख वहां आने वाले एक लड़के के उत्साह को देखते हुए उसे भी राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने की ठान ली। आर्थिक तंगी इस लक्ष्य में बाधा बनी तो उन्होंने कर्म पिता बनकर उसका सारा खर्च खुद से वहन किया। आज वह बच्चा चंडीगढ़ और बिहार दोनों का नाम रोशन कर रहा है।
मुनीष जिंदल ने बताया कि उनकी 14 वर्ष की बेटी है। बेटी को स्केटिंग खिलाड़ी और एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि को देखते हुए पहले उन्होंने खुद ट्रेनिंग ली। इसके बाद पार्क, मार्केट के शोरूम और रैंप पर बनी सीढ़ियों पर स्केटिंग कराना शुरू किया। इस बीच रोज गार्डन के अंडरपास में बेटी को प्रशिक्षण दिलाने गए। वहां अंकित शर्मा नाम का एक लड़का रोज आता था और जाह्नवी को प्रेक्टिस करते देखता था। इससे बातचीत होने लगी। कुछ दिन बाद उसने भी स्केटर बनने की इच्छा जाहिर की। मुनीष जिंदल ने उसे भी ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। एक दिन अंकित ने मुनीष से पूछा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा कैसे लिया जा सकता है तो उन्होंने बताया कि फीस भरने और आने जाने में कुछ खर्चा होता है। मुनीष ने बताया कि इसके बाद दो से तीन दिन तक उससे इस बारे में कोई बात नहीं हुई। इसके बाद जब उससे पूछा तो अंकित ने कहा कि वह फीस भरने में असमर्थ है क्योंकि उसके माता-पिता बिहार में रहते हैं और वह खुद 12वीं का छात्र है। ऐसे में फीस का खर्चा उठाना संभव नहीं है। मुनीष ने उस दिन तय कर लिया कि कुछ भी हो जाए इसे राष्ट्रीय स्तर तक ले जाएंगे। अंकित की लगन और मुनीष का प्रण रंग लाया और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उसने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
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मुनीष जिंदल ने बताया कि उनकी 14 वर्ष की बेटी है। बेटी को स्केटिंग खिलाड़ी और एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि को देखते हुए पहले उन्होंने खुद ट्रेनिंग ली। इसके बाद पार्क, मार्केट के शोरूम और रैंप पर बनी सीढ़ियों पर स्केटिंग कराना शुरू किया। इस बीच रोज गार्डन के अंडरपास में बेटी को प्रशिक्षण दिलाने गए। वहां अंकित शर्मा नाम का एक लड़का रोज आता था और जाह्नवी को प्रेक्टिस करते देखता था। इससे बातचीत होने लगी। कुछ दिन बाद उसने भी स्केटर बनने की इच्छा जाहिर की। मुनीष जिंदल ने उसे भी ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। एक दिन अंकित ने मुनीष से पूछा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा कैसे लिया जा सकता है तो उन्होंने बताया कि फीस भरने और आने जाने में कुछ खर्चा होता है। मुनीष ने बताया कि इसके बाद दो से तीन दिन तक उससे इस बारे में कोई बात नहीं हुई। इसके बाद जब उससे पूछा तो अंकित ने कहा कि वह फीस भरने में असमर्थ है क्योंकि उसके माता-पिता बिहार में रहते हैं और वह खुद 12वीं का छात्र है। ऐसे में फीस का खर्चा उठाना संभव नहीं है। मुनीष ने उस दिन तय कर लिया कि कुछ भी हो जाए इसे राष्ट्रीय स्तर तक ले जाएंगे। अंकित की लगन और मुनीष का प्रण रंग लाया और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उसने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
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