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Chandigarh News: विदेश में नौकरी का झांसा देकर लाखों ठगने वाली फर्म का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार

Sun, 08 Sep 2024 06:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Sep 2024 06:25 AM IST
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Firm that cheated millions on the pretext of job abroad busted, six arrested
चंडीगढ़। साइबर क्राइम पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलवाने का झांसा देने वाली एक फर्म का भंडाफोड़ कर तीन युवक और तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है। फर्म पर लोगों के 35 लाख रुपये ठगने का आरोप है। पुलिस ने 15 मोबाइल फोन, 15 सिमकार्ड, तीन स्टैंप और कई रिसेप्शन रजिस्टर बरामद किए हैं।
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इनकी पहचान मूलरूप से सीकर के पलथाना गांव और हाल निवास सेक्टर-46 के संजीव कुमार, मोहाली के फेज-1 के विक्की सिंह, पंजाब के रोपड़ जिले के बहरामपुर जमींदारी गांव के लखवीर सिंह, मनीमाजरा की रहने वाली नवप्रीत, नयागांव की महक कपूर और किशनगढ़ की मोनिका के रूप में हुई है। इस सभी आरोपियों को पुलिस ने चार सितंबर को चंडीगढ़ से ही गिरफ्तार किया है। इसके बाद पुलिस ने अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया था। तीन दिन की रिमांड के बाद शनिवार को दोबारा अदालत में पेश किया गया, जहां से चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने इनके खाते सीज कर दिए हैं। पुलिस इनकी प्रॉपर्टी की खंगाल रही है। इसके अलावा आरोपियों की सीडीआर निकाली जा रही है कि इनके साथ गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल हैं। ठगी के इस खेल का मास्टरमाइंड संजीव कुमार बताया जा रहा है।
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राजस्थान के नागौर जिले के गांव खिनयाला दे जयाल निवासी गनेशमल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में अजरबैजान भेजने और वहां अच्छे वेतन पर नौकरी दिलाने का वादा किया गया था। विज्ञापन में दिए नंबर पर जब उसने संपर्क किया तो एक लड़की ने फोन उठाया। उनसे बताया कि युवाओं को अजरबैजान वर्क वीजा पर भेजते हैं। पहले भी कई युवाओं को भेजा जा चुका है। इससे ज्यादा जानकारी के लिए उनको आफिस आना पड़ेगा। इस पर गनेशमल अपने रिश्तेदार के साथ सेक्टर-32डी स्थित ग्लोबल कंसल्टेंट के कार्यालय में पहुंचा। वहां मौजूद स्टाफ ने उनको भरोसा दिलाया कि वे अजरबैजान का वर्क वीजा दिला देंगे। इसके लिए 1.35 लाख रुपये देने होंगे। इस पर गनेशमल राजी हो गया और रुपये जमा करा दिए। इसकी जानकारी मिलने के बाद कई और लोगों ने भी उनको रुपये जमा कराए। गनेशमल ने बताया कि आरोपियों ने उनको एक टिकट और वीजा दिया। जब वह दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे तो पता चला कि उनको दिया गया वीजा व टिकट फर्जी है। उसके बाद उन्होंने कंपनी के नंबरों पर फोन किया तो वे सभी भी स्विच ऑफ मिले। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस को शिकायत दी।
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संजीव ने रचा था ठगी का पूरा खेल
पूछताछ में सामने आया है कि संजीव कुमार ही इमिग्रेशन फर्म चला रहा था। उसने अपने स्टाफ को झूठ बोलने और लालच देने के लिए ट्रेनिंग दी थी। उसने स्टाफ को सिखाया था कि ग्राहकों को अपना फर्जी नाम बताएं। संजीव के मुताबिक लोगों से ठगी करने के बाद वह आफिस बंद कर दिया और उसके बाद सेक्टर-34 में ड्रीम लैंड इमिग्रेशन के नाम से नया आफिस खोल लिया। आफिस में रिसेप्शन पर रखी गई लड़कियों का काम वहां आने वाले लोगों को विदेश की चमक दमक बताकर झांसे में लेना था। वे लोगों भरोसा दिलाती थीं कि उनको विदेश में जाकर बढ़िया नौकरी मिलेगी। वह उनको बड़े-बड़े सपने दिखाती थीं। एक बार जाल में फंसने के बाद संजीव और उसके साथी रुपये ठगकर ऑफिस बदल लेते थे।
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