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फिल्म मेकिंग के लिए इन्होंने छोड़ी नौकरी और बिजनेस
शंकर सिंह /अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Apr 2014 10:47 AM IST
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डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में वैसे तो कई गंभीर मुद्दे उठते हैं, लेकिन फिक्शन के मुकाबले में कम ही शार्ट फिल्में प्रकाशित होती हैं। हाल ही में चंडीगढ़ के दो दोस्तों ने शार्ट हॉरर फिल्म डी-4 रोड्स ऑफ फियर को यूट्यूब पर लांच किया। इस फिल्म को चार ही दिन में 1000 से भी ज्यादा व्यूज मिले हैं।
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24 वर्षीय अनुज और 25 वर्षीय समीर द्वारा बनाई गई इस फिल्म को लोग पसंद कर रहे हैं। अपने हुनर को तराशने के लिए एक ने नौकरी छोड़ी तो दूसरे ने खुद के बिजनेस से आराम लिया। इसके बाद सृजना आर्ट्स के नाम से खुद का प्रोडक्शन हाउस खोला।
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मंगलवार को अमर उजाला से एक खास बातचीत में दोनों युवा फिल्म मेकर ने फिल्म के दौरान और बाद के अनुभव साझा किए। सेक्टर-20 में रहने वाले अनुज ने बताया कि उन्होंने और समीर ने चंडीगढ़ के श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज से 2009 में बीकॉम करने के बाद मास कम्युनिकेशन किया।
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अनुज कहते हैं कि उस दौरान उन्होंने कैमरा और एडिटिंग की बारीकियां सीखीं। पढ़ाई के दौरान भी उन दोनों ने कई शार्ट फिल्मों का निर्माण किया। इसमें से उनकी बनाई फिल्म ‘उम्मीद की किरण’ आईआईटी फिल्म फेस्टिवल दिल्ली में चौथे स्थान पर रही थी, जबकि उस दौरान उनके पास कैमरा भी नहीं था।
आइडिया कर गया काम
समीर ने बताया कि उनका पारिवारिक व्यवसाय है। साल 2012 में मासकॉम करने केबाद वह पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गए। वह व्यवसाय से जुड़ तो गए, लेकिन दिल में हमेशा कसक रहती थी कि फिल्मों में हाथ आजमाया जाए। समीर ने यही आइडिया अनुज के साथ शेयर किया। अनुज को आइडिया पसंद आया और इसके लिए उसने टीचिंग की नौकरी छोड़ फिल्म मेकिंग की सोची।
किराए पर लिया कैमरा
अनुज कहते हैं कि डी 4 रोड्स ऑफ फीयर फिल्म के निर्माण के लिए उनके पास कैमरा नहीं था। इसके लिए उन्होंने कुछ पैसे जोड़ कर एक कैमरा और ट्राई पॉड किराए पर लिया। फिल्म पर काफी रिसर्च की गई। फिल्म को पहले रफ प्रोजेक्ट के तौर पर ही बनाया गया था, लेकिन बाद में इसे फिल्म का रूप दिया गया।
चार दोस्तों की है कहानी
फिल्म की कहानी चार दोस्तों पर केंद्रित है, जो जंगल में भटक जाते हैं। इसी दौरान वह भटकते-भटकते सड़क तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां उन्हें जिससे लिफ्ट मिलती है वह एक भूत है। यही है इस फिल्म का मूलरूप। उन्होंने कहा कि अपनी पहली फिल्म की कामयाबी से वह खुश हैं। इसलिए कुछ दिनों पहले ही उन्होंने दो लाख का कैमरा भी खरीदा है।
शार्ट फिल्मों के लिए इंटरनेट बेहतर जरिया
समीर कहते हैं कि शॉर्ट फिल्मों को लोग पसंद करते हैं। साथ ही इंटरनेट आपको एक बेहतर साधन देता है, जहां आप अपनी फिल्म शेयर भी कर सकते हैं और लोगों की प्रतिक्रिया भी पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री पहले से बहुत ग्रो कर गई है। लेकिन, उसमें सिर्फ मसाला फिल्में ही बनती हैं, जो सिर्फ तीन घंटे पॉपकार्न के साथ बिताने के ही काम आती हैं।
डॉक्यूमेंट्र्री में आप जमीनी हकीकत और असलियत से जुड़ी फिल्म दिखा सकते हैं। वहीं अनुज ने बताया कि आने वाले दिनों में वह भिखारियों के गिरोह जैसे गंभीर विषय पर फिल्म बनाएंगे। उन्हें उम्मीद है कि लोगों को इस फिल्म से इसके बारे में काफी कुछ नया देखने और जानने को मिलेगा।