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शैलजा और निर्मल सिंह समर्थकों में चले लात-घूंसे
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला सिटी
Updated Thu, 05 Jun 2014 12:21 PM IST
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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार पर मंथन करने के लिए सिटी कांग्रेस भवन में जमा हुए कांग्रेसी आपस में ही भिड़ गए। पूर्व विधायक निर्मल सिंह और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा के समर्थकों में जमकर लात-घूंसे चले।
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ऑब्जर्वर के सामने ही एक- दूसरे के गिरेबान तक कांग्रेसियों ने पकड़ लिए और एक-दूसरे पर हाथ भी छोड़ दिए। काफी देर तक हंगामा होता रहा। इसके बाद सैलजा गुट के समर्थकों ने बैठक का बायकाट कर दिया। कांग्रेस के जिला ऑब्जर्वर एवं पूर्व विधायक अर्जुन सिंह कांग्रेसियों की बैठक लेने के लिए आए थे।
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बैठक में ऑब्जर्वर ने यह कहा
ऑब्जर्वर एवं पूर्व विधायक अर्जुन सिंह ने कांग्रेसियों से कहा कि मैं मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दूत बनकर आया हूं। मुझे कांग्रेस वर्करों से बातचीत करनी हैं, उनकी समस्याएं जाननी हैं।
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यही नहीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार क्यों हुई, क्यों जनता ने कांग्रेस उम्मीदवारों को नकार दिया, इस पर विचार करना है। आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर क्या किया जाना चाहिए, इस पर भी राय जाननी है।
नेताओं के साथ अफसर भी नहीं सुनते
जिला कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान राजकुमार गामा ने कहा कि कांग्रेसी नेताओं को तो छोड़ो अफसरशाही भी कांग्रेसी वर्करों पर हावी हैं। अपने काम करवाने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ रही है। मैंने खुद अपने मकान की रजिस्ट्री करवानी चाही, तो इसके लिए भी रिश्वत मांगी गई। न तो पार्टी मेें सुनवाई है और नहीं अफसर सुनते हैं। अब तो कांग्रेसियों पर ऑब्जर्वर भी दूसरी पार्टी के थोपे जा रहे हैं। मालूम हो कि ऑब्जर्वर एवं पूर्व विधायक बसपा में थे, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हुए।
इस तरह बिगड़ी बात
जैसे ही ऑब्जर्वर ने कांग्रेस वर्करों को माइक पर आकर अपनी बात कहने को कहा, बस माहौल गर्म होना शुरू हो गया। निर्मल समर्थकों ने जहां कांग्रेस प्रत्याशी की हार का ठीकरा सैलजा पर फोड़ा, वहीं सैलजा समर्थकों ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया। पूर्व महिला जिलाध्यक्ष नीलम शर्मा ने कहा कि हार का ठीकरा सैलजा पर फोड़ना गलत है। हार के लिए अकेली सैलजा जिम्मेदार नहीं हैं।
सैलजा ने वर्करों को निर्देश दिए थे कि पार्टी प्रत्याशी के लिए काम करें और सभी ने काम भी किया। सैलजा को अंबाला के वर्कर नहीं लाए, जबकि हाईकमान ने भेजा था। सैलजा को निशाना बनाना गलत है। इसके साथ ही पूर्व जिलाध्यक्ष हरीश सासन ने कहा कि सैलजा ने हमें एकजुटता का पाठ पढ़ाया है। कांग्रेस प्रत्याशी ने ही सैलजा की अनदेखी की है और लोस चुनाव में सैलजा को प्रत्याशी ने बुलाया तक नहीं है। सैलजा के साफ निर्देश थे कि पार्टी के लिए काम किया जाए, जो सभी ने किया।
बैठक में जब युवा कांग्रेस नेता अतुल महाजन ने कहा कि जितने भी कांग्रेसियों ने माइक पर अपनी बात कही है, वे चुनाव में कहीं नजर नहीं आए। इसी पर बात बिगड़ गई और सैलजा समर्थक खड़े हो गए। इसी दौरान निर्मल सिंह गुट के समर्थक भी खड़े हो गए। दोनों समर्थकों ने एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए।
इसी दौरान सैलजा समर्थक सतीश सैनी भी खड़े हो गए। इससे पहले कि ऑब्जर्वर कुछ कर पाते दोनों गुटों के समर्थक भिड़ गए। दोनों गुटों में जमकर लात-घूंसे चले। ऑब्जर्वर सहित अन्य नेता भड़के कांग्रेसियों को समझाते रहे, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद सैलजा समर्थक बैठक का बायकाट कर चले गए।