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Hindi News ›   Chandigarh ›   Fifty kilograms of beef recovered case Accused denied anticipatory bail High Court

पचास किलो बीफ बरामदगी मामला: आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं, हाईकोर्ट ने याची की दलील को क्यों कहा चालाकी

Sat, 24 Jan 2026 03:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 24 Jan 2026 03:00 PM IST
सार

अगस्त 2025 में आरोपी नूर मोहम्मद को पचास किलो मांस के साथ पकड़ा गया था। उसने मांस भैंसे का बताया था। बाद में लैब टेस्ट में मांस गाय का निकला।

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Fifty kilograms of beef recovered case Accused denied anticipatory bail High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

50 किलो गाय के मांस की बरामदगी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी नूर मोहम्मद को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है। 

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हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मांस गाय का है, यह जानकारी न होने की दलील याची का चालाकी से बचने का तरीका मात्र है।

याचिका दाखिल करते हुए नूर मोहम्मद ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी। आरोप के अनुसार 19 अगस्त 2025 को चंड़ीगढ़ के सेक्टर-34 थाना क्षेत्र में गो रक्षा दल के अध्यक्ष अमित शर्मा को यह सूचना मिली थी कि याची गाय का मांस एक्टिवा पर सप्लाई कर रहा है। इसके बाद वह अपने साथियों के साथ पहुंचे और याची को रोका। बाद में इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने एक एक्टिवा सवार व्यक्ति को रोका था। तलाशी के दौरान उसके पास से करीब 50 किलो संदिग्ध मांस बरामद हुआ। 

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लैब रिपोर्ट में हुई थी पुष्टि

पूछताछ के दौरान आरोपी ने मांस को भैंसे का बताया और कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। मांस के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए थे। शुरुआती कार्रवाई के बाद आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। हालांकि, बाद में लैब रिपोर्ट में पुष्टि हो गई कि बरामद मांस बीफ था। इसके बाद पुलिस ने पंजाब प्रॉहिबिटेशन ऑफ काऊ स्लॉटर एक्ट की धारा 8 जोड़ दी।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

याची ने दलील दी कि उसे यह मांस भैंसे का बताकर बेचा गया था और उसे यह बिलकुल नहीं पता था कि यह गाय का मांस है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी का यह कहना कि उसे मांस के बीफ होने की जानकारी नहीं थी, महज जिम्मेदारी से बचने का आखिरी समय का प्रयास प्रतीत होता है। यूटी प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि गाय हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में पूजनीय है। इस तरह के कृत्य से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।


साथ ही आशंका जताई गई कि आरोपी बीफ की अवैध बिक्री से जुड़े किसी संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे सामान्य रूप से नहीं दिया जा सकता। सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी नूर मोहम्मद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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