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करनाल में महापड़ाव: अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, किसानों का धरना जारी
Thu, 09 Sep 2021 11:15 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 09 Sep 2021 11:15 AM IST
सार
बुधवार शाम को बैठक बेनतीजा रहने के बाद किसानों के अधिकतर बड़े नेता भी बेमियादी धरने का एलान कर दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पहले से चल रहे धरनों की ओर कूच कर गए। करनाल में धरने की जिम्मेदारी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उतर प्रदेश के किसानों को दी गई है।
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करनाल में धरने पर बैठे किसान।
- फोटो : ANI
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विस्तार
अपनी मांगों के समर्थन में करनाल में आंदोलन कर रहे किसानों ने बुधवार को प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने के बाद से सचिवालय के बाहर पक्का मोर्चा लगा दिया है। वहीं इसी बीच गुरुवार को भी करनाल में इंटरनेट सेवाएं ठप रहेंगी। अफवाहों को रोकने के लिए सरकार ने यह आदेश दिया है।
इंटरनेट सेवा बाधित होने से बढ़ी छात्रों की परेशानी
किसानों के प्रदर्शन के चलते फिलहाल करनाल में इंटरनेट सेवा बाधित है, ऐसे में यहां विद्यार्थियों को अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए खुद इंटरनेट की व्यवस्था करनी होगी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बुधवार को ये दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विवि प्रशासन के अनुसार, परीक्षार्थियों को अपने स्तर पर ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए इंटरनेट की व्यवस्था करनी होगी। यदि वे यह व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं, तो वे ऑफलाइन मोड में परीक्षा केंद्र पर जाकर अपनी परीक्षाएं दे सकते हैं। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, विद्यार्थी अपनी सुविधा अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प चुन सकते हैं।
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बड़े नेता दिल्ली रवाना
बुधवार शाम को बैठक बेनतीजा रहने के बाद किसानों के अधिकतर बड़े नेता भी बेमियादी धरने का एलान कर दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पहले से चल रहे धरनों की ओर कूच गए। करनाल में धरने की जिम्मेदारी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उतर प्रदेश के किसानों को दी गई है।
लोग परेशान
वहीं किसानों और सरकार का यह अड़ियल रवैया स्थानीय लोगों के लिए जरूर परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि लघु सचिवालय के बाहर किसानों ने तंबू गाड़ लिया है और इस ओर आने वाले तमाम रास्ते पहले ही प्रशासन ने सील कर रखे हैं। मंगलवार को भी आवाजाही खासी प्रभावित रही और लोग वैकल्पिक रास्तों पर भटकते नजर आए।
कम हैं समझौते के आसार
किसानों की पूर्व मांगों के साथ-साथ जिन नए मुद्दों पर करनाल का यह नया आंदोलन खड़ा किया गया है। उस पर अभी तक समझौते के आसार कम ही दिख रहे हैं। 28 अगस्त के लाठीचार्ज के बाद किसानों ने इस आंदोलन में जिन मांगों को बुलंद कर रखा है, उन्हें सरकार जायज नहीं मानती। लेकिन किसानों ने इस आंदोलन को अब ‘न्याय की जंग’ करार दे दिया है। मंगलवार को दूसरी बार किसानों से बातचीत में भी आला अफसरों ने किसानों से इन्हीं मांगों पर समझौता करने का खासा प्रयास किया। बैठक के बीच कई बार अफसरों ने चंडीगढ़ सरकार से निर्देश लेते हुए किसानों को मनाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। मगर बात सिरे नहीं चढ़ी।
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Haryana: Farmers continue their demonstration outside mini secretariat in Karnal, demanding action against the officials who ordered lathi-charge against protesters in the district last month
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State Govt has suspended mobile internet and SMS services in the district today pic.twitter.com/ufftkQswkb — ANI (@ANI) September 9, 2021
इंटरनेट सेवा बाधित होने से बढ़ी छात्रों की परेशानी
किसानों के प्रदर्शन के चलते फिलहाल करनाल में इंटरनेट सेवा बाधित है, ऐसे में यहां विद्यार्थियों को अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए खुद इंटरनेट की व्यवस्था करनी होगी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बुधवार को ये दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विवि प्रशासन के अनुसार, परीक्षार्थियों को अपने स्तर पर ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए इंटरनेट की व्यवस्था करनी होगी। यदि वे यह व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं, तो वे ऑफलाइन मोड में परीक्षा केंद्र पर जाकर अपनी परीक्षाएं दे सकते हैं। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, विद्यार्थी अपनी सुविधा अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प चुन सकते हैं।
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बड़े नेता दिल्ली रवाना
बुधवार शाम को बैठक बेनतीजा रहने के बाद किसानों के अधिकतर बड़े नेता भी बेमियादी धरने का एलान कर दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पहले से चल रहे धरनों की ओर कूच गए। करनाल में धरने की जिम्मेदारी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उतर प्रदेश के किसानों को दी गई है।
लोग परेशान
वहीं किसानों और सरकार का यह अड़ियल रवैया स्थानीय लोगों के लिए जरूर परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि लघु सचिवालय के बाहर किसानों ने तंबू गाड़ लिया है और इस ओर आने वाले तमाम रास्ते पहले ही प्रशासन ने सील कर रखे हैं। मंगलवार को भी आवाजाही खासी प्रभावित रही और लोग वैकल्पिक रास्तों पर भटकते नजर आए।
कम हैं समझौते के आसार
किसानों की पूर्व मांगों के साथ-साथ जिन नए मुद्दों पर करनाल का यह नया आंदोलन खड़ा किया गया है। उस पर अभी तक समझौते के आसार कम ही दिख रहे हैं। 28 अगस्त के लाठीचार्ज के बाद किसानों ने इस आंदोलन में जिन मांगों को बुलंद कर रखा है, उन्हें सरकार जायज नहीं मानती। लेकिन किसानों ने इस आंदोलन को अब ‘न्याय की जंग’ करार दे दिया है। मंगलवार को दूसरी बार किसानों से बातचीत में भी आला अफसरों ने किसानों से इन्हीं मांगों पर समझौता करने का खासा प्रयास किया। बैठक के बीच कई बार अफसरों ने चंडीगढ़ सरकार से निर्देश लेते हुए किसानों को मनाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। मगर बात सिरे नहीं चढ़ी।