किसान आंदोलन: हरियाणा सरकार के साथ किसानों की वार्ता विफल, इन मुद्दों पर नहीं बनी सहमति, संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक आज
भारतीय किसान यूनियन चढूनी के अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलने पहुंचे थे। बैठक में तमाम मुद्दों पर बातचीत गई। आज किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा सरकार और किसान नेताओं के बीच शुक्रवार को हुई दो दौर की बैठक बेनतीजा रही। आंदोलन में मृत किसानों के परिजनों को नौकरी, गंभीर अपराधों में दर्ज केस वापस लेने और मुआवजे सहित अन्य मुद्दों को लेकर दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई।
पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद दूसरे दौर में सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर किसान नेता नाराज होकर बैठक से बाहर आ गए। सरकार से वार्ता टूटने के बाद शनिवार को किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक करके बड़ा फैसला ले सकते हैं।
यह भी पढ़ें ः हरियाणा की बड़ी खबरें: एनसीआर के चार जिलों में अगले आदेश तक स्कूल बंद, करनाल में युवक की गोली मारकर हत्या
हरियाणा सरकार के बुलावे पर शुक्रवार शाम पांच बजे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, रतन मान समेत आठ सदस्यीय किसानों का प्रतिनिधिमंडल सीएम आवास पहुंचा। सरकार की तरफ से खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल, प्रधान सचिव वी उमाशंकर, सीआईडी चीफ आलोक मित्तल और एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन मौजूद रहे। शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक चली बैठक में किसानों ने अपनी मांगें दोहराई। इस दौरान किसान नेताओं ने 45 हजार किसानों पर दर्ज 200 एफआईआर रद्द करने की मांग रखी। इनमें देशद्रोह से लेकर हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में भी कुछ मामले शामिल हैं।
सीएम की तरफ से आश्वासन दिया गया कि इसको लेकर विचार किया जाएगा। सीएम ने तर्क दिया कि कुछ मामले अदालत में विचाराधीन हैं तो कई गंभीर धाराओं में दर्ज हैं लेकिन किसान नेताओं ने कहा कि सभी केस एक साथ वापस लिए जाएं। इस मुद्दे पर किसानों और सरकार के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।
दूसरे दौर की बैठक में नहीं हुआ कोई फैसला
पहले दौर की बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद 8.30 बजे दोनों पक्षों में दूसरे दौर की बैठक हुई। इसमें किसानों ने मृत किसानों के परिजनों को नौकरी, मुआवजा देने और सिंधु बॉर्डर पर शहीद किसानों का स्मारक बनाने की मांग रखी। सरकार की ओर से स्मारक के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया गया। इसी प्रकार, मृत परिवारों को नौकरी और मुआवजे को लेकर भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। इन्हीं मामलों को लेकर पेच फंस गया। करीब 10 मिनट तक दूसरे दौर की वार्ता चली और सरकार के रुख को देखते हुए किसान नेता बैठक से बाहर निकल गए।
यह भी पढ़ें ः दुल्हन को गोली मारने का मामला: गर्दन, हाथ व पेट में 5 गोली लगने के बाद भी तनिष्का पति से पूछती रही... आप ठीक हो ना
ये किसान नेता रहे मौजूद
बैठक में किसानों की ओर से भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, रतन मान, राकेश बैंस, रामपाल चहल, जरनैल सिंह, जोगिंद्र नैन, इंद्रजीत और अभिमन्यु कुहाड़ मौजूद रहे। भाकियू नेता रतन मान ने कहा कि बैठक में किसी भी मांग पर सहमति नहीं बनी है।
सरकार की तरफ से कोई संतोषजनक बात नहीं कही गई। बैठक पूरी तरह से बेनतीजा रही है। हालांकि सरकार का रवैया न तो ज्यादा नरम था और न ही सख्त। अब शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक होगी। उसमें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद ही आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। - गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।