कर्जमाफी की आस में किश्त देना किया बंद, बैंकों के नोटिस आने पर किसान ने दी जान
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जिला कांग्रेस सचिव के पिता कुलवीर सिंह (60) ने कर्ज और बैंकों की नोटिस से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सात कनाल के मालिक कुलवीर सिंह पर करीब साढ़े सात लाख का कर्ज था। कर्ज माफी की उम्मीद में उन्होंने किस्तें देनी बंद कर दी थी।
जानकारी के अनुसार, गांव टूटोमजारा निवासी जिला कांग्रेस सचिव बलविंदर सिंह बिंदू के पिता कुलवीर सिंह ने पीएडी बैंक माहिलपुर और द एग्रीकल्चर कोआपरेटिव सोसाइटी टूटोमजारा समेत कई अन्य बैंकों से कर्ज ले रखा था।
कुलवीर सिंह 2016 तक कर्ज की किस्तें लगातार दे रहे थे लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा चुनाव से पहले किसानों के कर्ज माफी के वादे पर विश्वास करते हुए उन्होंने किस्तें देनी बंद कर दी। लिहाजा कर्ज लगातार बढ़ता चला गया।
कर्ज माफी की उम्मीद टूटने के बाद कुलवीर सिंह ने पिछले साल से फिर किस्तें देनी शुरू कर दी। इस साल लॉकडाउन के कारण वह किस्तें देने में फिर असमर्थ हो गए। इसके बाद बैंकों से नोटिस आने लगे। परेशान कुलवीर सिंह ने बुधवार देर शाम घर में रखी जहरीली दवा निगल ली। परिजन उन्हें सिविल अस्पताल माहिलपुर ले गए। वहां से उन्हें होशियारपुर रेफर कर दिया गया जहां देर रात उनकी मौत हो गई।
मृतक किसान कुलवीर सिंह के भाई कुलविंदर सिंह का कहना है कि उनके भाई आत्महत्या कभी नहीं करते, अगर कैप्टन कर्ज माफी की घोषणा न करते। कुलवीर सिंह पर पीएडी बैंक माहिलपुर का करीब तीन लाख साठ हजार, द एग्रीकल्चर कोआपरेटिव सोसाइटी टूटोमजारा का एक लाख 42 हजार और अन्य बैंकों का करीब एक लाख का कर्ज था।
पीएडीबी माहिलपुर और द एग्रीकल्चर कोआपरेटिव सोसाइटी टूटोमजारा ने उन्हें नोटिस भेजे थे। मृतक की बेटी गुरिंदर कौर ने कहा कि हमारे पास सिर्फ सात कनाल जमीन है और पिता ने साढ़े तीन लाख कर्ज लिया हुआ था, जो ब्याज लग कर साढ़े सात लाख हो चुका था। पिता तो इस दुनिया से चले गए। अब भी हमें कोई उम्मीद नहीं कि सरकार कर्ज माफ कर पाएगी।