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कृषि कानून : सरकार को फसल खरीद में लग सकता है 730 करोड़ का फटका
Tue, 29 Sep 2020 06:30 AM IST
Vikas Kumar
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 29 Sep 2020 06:30 AM IST
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गेहूं की फसल
- फोटो : अमर उजाला
खरीफ सीजन में फसलों का खरीद कार्य शुरू हो चुका है। चार जिलों में धान की खरीद शुरू हो गई है। जबकि एक अक्तूबर से ये खरीद और रफ्तार पकड़ेगी। नए कृषि कानून बन चुके हैं और लागू भी हो चुके हैं। उम्मीद भी है कि हरियाणा के कई किसान नए कृषि कानूनों का इस्तेमाल करते हुए अपना अनाज मंडियों से बाहर प्राइवेट ट्रेडर्स को भी बेचेगा।
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यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश सरकार को भारी नुकसान की आशंका है। इसी नुकसान की पूर्व विश्लेषण रिपोर्ट प्रदेश सरकार ने तैयार की है और इससे केंद्र सरकार को भी भेजकर अवगत करवा दिया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर इस रिपोर्ट को तैयार करवाया गया है। इस पूर्व विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार को इस खरीद सीजन में 730 करोड़ के नुकसान की आशंका है। इसमें मार्केट फीस और हरियाणा रूरल डेवलपमेंट (एचआरडी) फीस का हिस्सा शामिल है।
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हर साल खरीफ सीजन में सरकार करीब दो हजार करोड़ से अधिक राशि का अनाज खरीदती है। इस पूरी खरीद राशि में से दो प्रतिशत हिस्सा मार्केट फीस और दो प्रतिशत हरियाणा रूरल डेवलपमेंट के खाते में जाता है।
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इस विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक इस बार मंडियों में जितने मूल्य के अनाज की सरकारी खरीद होनी थी। उसमें से करीब 360 करोड़ की मार्केट फीस आनी थी और लगभग 370 करोड़ रुपये हरियाणा रूरल डेवलपमेंट फीस के आने थे। मगर इस बार सरकार को लग रहा है कि बहुत से किसान नए कृषि कानूनों का लाभ उठाते हुए अपनी फसलें बाहर प्राइवेट ट्रेडर्स को अपने दामों पर बेचेंगे और मंडियों में कम अनाज आएगा। कम अनाज आया तो खरीद कम होगी और इसका विपरीत असर सरकार की मार्केट फीस और हरियाणा रूरल डेवलपमेंट फीस के रूप में आने वाली कमाई पर पड़ेगा।हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा तैयार करवाई गई इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को भेजा गया है।
सीएम मनोहर लाल के अनुसार प्रदेश सरकार ने केंद्र को ऐसी स्थिति से अवगत करवाते हुए मदद भी मांगी है। उम्मीद है केंद्र सरकार मदद करेगी और यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस नुकसान की भरपाई प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से पूरा करेगी। मगर कृषि कानूनों का इस्तेमाल कर प्रदेश के किसान अपनी फसल सरकारी मंडियों अथवा बाहर बेचने के लिए स्वतंत्र हैं।
मंडी में ही आए अनाज, नुकसान पर सरकार का बड़ा दांव
हरियाणा सरकार भी इस प्रयास में है कि किसान अपनी फसल लेकर सरकारी मंडियों में ही पहुंचे। ताकि फीस के रूप में होने वाली आय का नुकसान न हो। इसके लिए प्रदेश ने बड़ा दांव खेला है। जिसके तहत दो प्रतिशत मार्केट फीस और दो प्रतिशत हरियाणा रूरल डेवलपमेंट फीस को आधा-आधा प्रतिशत कर दिया है। हालांकि इसमें भी सरकार को ही नुकसान है। मगर सरकार चाहती है कि किसी तरह से किसान अपना अनाज सरकारी मंडियों में ही लाकर बेचे। जिससे आशांकित नुकसान में कुछ हद तक कम हो सके। बहरहाल, अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार के ये प्रयास कितना कारगर साबित होता है और कितने किसान नए कृषि कानूनों का इस्तेमाल कर प्राइवेट ट्रेडर्स के साथ अपनी फसलों की डील करते हैं।