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इंजीनियरिंग से मोहभंग, संकट में हरियाणा के तकनीकी कॉलेज, नहीं भर रही स्वीकृत सीटें
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 11 Jul 2018 09:43 AM IST
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हरियाणा में पिछले कुछ सालों के दौरान इंजीनियरिंग कोर्स को लेकर विद्यार्थियों का मोहभंग हो रहा है। इसके चलते हरियाणा के तकनीकी कालेज संचालक टेंशन में हैं। आलम यह है कि इन कालेजों में उक्त कोर्सों की जितनी अधिकृत सीटें तय की गई हैं, वे सीटें भी पूरी नहीं भर पा रही है। इस वजह से कई कालेजों ने इंजीनियरिंग कोर्स की विभिन्न स्ट्रीम्स बंद कर दी है।
हरियाणा के करीब 140 टेक्निकल कॉलेज हैं। इसमें इंजीनियरिंग के विभिन्न ट्रेडों समेत अन्य कोर्स करवाए जा रहे हैं। करीबन डेढ़ दशक पहले स्थिति देखें तो छात्रों में इंजीनियरिंग को लेकर काफी क्रेज था। बहुत से शैक्षणिक संस्थानों ने शहरी इलाके से दूर ग्रामीण अंचलों में अलग से बड़े कैंपस खोलकर तकनीकी कालेज को स्थापित किया गया। इन कालेजों को बड़े शैक्षणिक प्रोजेक्ट को रूप में खोला गया था।
दाखिलों के लिए एजेंटों का सहारा ले रहे कालेज
आज सूबे के तकनीकी कालेजों में छात्रों का जबरदस्त टोटा है। कुछ प्राइवेट कालेजों के स्टाफ ने बताया कि पिछले कई साल तो इंजीनियरिंग के प्रति छात्रों का रुझान अच्छा था, लेकिन अब पूरी सीटें भी नहीं भर पा रही है। स्थिति यह है कि छात्रों के दाखिले के लिए जहां कई कालेजों द्वारा एजेंटों का सहारा लिया जा रहा है, वहीं प्रति दाखिले की कमीशन भी तय की गई है। यहां तक की कुछ कालेजों के स्टाफ तक को भी प्रति छात्र एडमिशन करवाने के कमीशन देने का ऑफर दिया जा रहा है।
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आंकड़े में ही झलक रही टेंशन
हरियाणा में सरकारी और निजी तकनीकी संस्थानों में वर्ष 2015-16 में, बीई/बीटेक पठ्यक्रमों में कुल स्वीकृत सीटें 58134 थीं, जिनमें से 39551 सीटें खाली रह गई।। नौ सरकारी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 2830 थीं, जिनमें से 830 खाली रही, जबकि 139 निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 55304 थी, जिनमें से 38721 सीटें खाली थीं। वर्ष 2016-17 में बीई/बीटेक के लिए कुल स्वीकृत सीटें 51902 थी, जिनमें से 37323 सीटें खाली रही।
दस सरकारी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 3190 थी, जिनमें से 913 खाली रही, जबकि 127 निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 48712 थी, जिनमें से 36410 सीटें खाली रही। वर्ष 2017-18 में बीई/ बीटेक के लिए कुल स्वीकृत सीटें 43771 थी, जिनमें से 29858 सीटें खाली रही। 13 सरकारी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 3831 थी, जिनमें से 1490 खाली रहे, जबकि 114 निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 39940 थी, जिनमें से 28368 सीटें खाली रही।
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हरियाणा के करीब 140 टेक्निकल कॉलेज हैं। इसमें इंजीनियरिंग के विभिन्न ट्रेडों समेत अन्य कोर्स करवाए जा रहे हैं। करीबन डेढ़ दशक पहले स्थिति देखें तो छात्रों में इंजीनियरिंग को लेकर काफी क्रेज था। बहुत से शैक्षणिक संस्थानों ने शहरी इलाके से दूर ग्रामीण अंचलों में अलग से बड़े कैंपस खोलकर तकनीकी कालेज को स्थापित किया गया। इन कालेजों को बड़े शैक्षणिक प्रोजेक्ट को रूप में खोला गया था।
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दाखिलों के लिए एजेंटों का सहारा ले रहे कालेज
आज सूबे के तकनीकी कालेजों में छात्रों का जबरदस्त टोटा है। कुछ प्राइवेट कालेजों के स्टाफ ने बताया कि पिछले कई साल तो इंजीनियरिंग के प्रति छात्रों का रुझान अच्छा था, लेकिन अब पूरी सीटें भी नहीं भर पा रही है। स्थिति यह है कि छात्रों के दाखिले के लिए जहां कई कालेजों द्वारा एजेंटों का सहारा लिया जा रहा है, वहीं प्रति दाखिले की कमीशन भी तय की गई है। यहां तक की कुछ कालेजों के स्टाफ तक को भी प्रति छात्र एडमिशन करवाने के कमीशन देने का ऑफर दिया जा रहा है।
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आंकड़े में ही झलक रही टेंशन
हरियाणा में सरकारी और निजी तकनीकी संस्थानों में वर्ष 2015-16 में, बीई/बीटेक पठ्यक्रमों में कुल स्वीकृत सीटें 58134 थीं, जिनमें से 39551 सीटें खाली रह गई।। नौ सरकारी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 2830 थीं, जिनमें से 830 खाली रही, जबकि 139 निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 55304 थी, जिनमें से 38721 सीटें खाली थीं। वर्ष 2016-17 में बीई/बीटेक के लिए कुल स्वीकृत सीटें 51902 थी, जिनमें से 37323 सीटें खाली रही।
दस सरकारी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 3190 थी, जिनमें से 913 खाली रही, जबकि 127 निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 48712 थी, जिनमें से 36410 सीटें खाली रही। वर्ष 2017-18 में बीई/ बीटेक के लिए कुल स्वीकृत सीटें 43771 थी, जिनमें से 29858 सीटें खाली रही। 13 सरकारी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 3831 थी, जिनमें से 1490 खाली रहे, जबकि 114 निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटें 39940 थी, जिनमें से 28368 सीटें खाली रही।