पंजाब सरकार ने लोगों को दिया झटका, बिजली के रेट बढ़ाने के दिए आदेश
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इंडस्ट्री को पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली देने का वादा कर सत्ता में पहुंची कैप्टन सरकार ने उपभोक्ताओं को फ्यूल कॉस्ट एडजेस्टमेंट सरचार्ज के नाम पर एक और झटका दिया है। बिजली के नए रेट एक अक्तूबर से लागू होंगे। मीटर्ड सप्लाई के लिए यह बढ़ोतरी 12 पैसे प्रति यूनिट होगी। वहीं, गैर मीटर्ड सप्लाई के लिए 6.44 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह या 4.80 रुपये प्रति बीएचपी हर महीने या 12 पैसे प्रति यूनिट होगी। (ट्यूबवेल आदि को किलोवाट के हिसाब से सप्लाई होती है)
यह सरचार्ज लगने से पंजाब की इंडस्ट्री पर 186 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। पंजाब की इंडस्ट्री की बिजली की खपत 15 हजार 500 मिलियन यूनिट प्रतिमाह है। सत्ता में आने के बाद सरकार ने 11वीं बिजली दरों में बढ़ोतरी की है। सरकार के इस फैसले से आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ इंडस्ट्री पर सीधी मार पड़ेगी। कारोबारियों ने कम रेट पर बिजली मुहैया करवाने की मांग की है।
इंडस्ट्री की तरफ सरकार का ध्यान नहीं
स्यूइंग मशीन डेवलपमेंट कलस्टर प्रेजीडेंट जगबीर सिंह सोखी का कहना है कि छोटी इंडस्ट्री तो पहले तबाह होने की कगार पर है, क्योंकि आज तक किसी सरकार ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है। अब कांग्रेस सरकार एक के बाद एक झटका छोटे कारोबारियों को दे रही है। यही कारण है कि स्यूइंग मशीन से जुड़े 25 फीसदी कारोबारी अपना कारोबार बंद कर चुके हैं।
पांच रुपये यूनिट का वायदा पूरा करे सरकार
यूसीपीएमए प्रेजीडेंट इंदरजीत सिंह नवयुग कहते हैं कि कारोबारी पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी के बाद अभी तक कारोबार डाउन फॉल पर है। अब स्टेट गवर्नमेंट बिजली के झटके दे रही है। सत्ता में आने से पहले पांच रुपये प्रति यूनिट के वादे को क्यों पूरा नहीं किया जा रहा है। अगर यही हालत रहे तो छोटे कारोबारियों को काम ठप करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।
सरकार अपनी जुबान पर रहे कायम
निटवेयर एंड टेक्सटाइल क्लब प्रेजीडेंट विनोद थापर ने मांग की कि सरकार को अपनी जुबान पर कायम रहना चाहिए। ऐसे तो इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। स्मॉल स्केल इंडस्ट्री पहले ही घाटे में चल रही है। अब बिजली दरों का झटका देकर सरकार कैसे सोच सकती है कि इंडस्ट्री आगे बढ़ेगी। अगर सच में सरकार इंडस्ट्री के बारे में सोच रही है, तो छोटी इंडस्ट्री के बारे में सोच जरूर बदले। कारपोरेट घरानों को पहले से कई रियायतें मिलती हैं। वहीं कारोबारी विदिश जिंदल का कहना है कि सरकार ने हमसे पांच रुपये का वादा किया था तो अब इस बोझ को सरकार ही वहन करे।