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एजेंडा अपूर्ण होने पर पीयू सिंडिकेट के मेंबरों ने बैठक का बहिष्कार किया
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पीयू सिंडिकेट की शनिवार को होने वाली बैठक में अपूर्ण एजेंडा शामिल किए जाने पर कुछ सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। कुछ अन्य मेंबर चाहते थे कि बैठक हो, लेकिन इसमें अधिक समय खर्च नहीं हो। यह बात बहिष्कार करने वाले सदस्यों को रास नहीं आई और आखिरकार बैठक निरस्त कर दी गई। हालांकि पीयू प्रशासन ने बैठक निरस्त करने के प्रशासनिक कारण बताए हैं। मेंबरों के बहिष्कार की बात नहीं स्वीकारी।
पीयू सिंडिकेट की बैठक 11 बजे शुरू होनी थी। सभी 15 मेंबर पीयू पहुंच गए थे। उसी दौरान कुछ मेंबरों ने एजेंडा देखा तो उन्हें अपूर्ण लगा। उनका कहना था कि पुटा उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार की सैलरी व कंप्यूटर साइंस के एक शिक्षक के स्थायीकरण का प्रस्ताव क्यों नहीं शामिल किया गया। इस पर कुछ सदस्यों ने आपत्ति दायर की। कुछ चाहते थे कि बैठक हो, लेकिन जल्दी खत्म हो जाए। यह बात भी नाराज सदस्यों को रास नहीं आई। उसके बाद मेंबर गेस्ट हाउस में काफी देर तक बैठे रहे। आखिर में बैठक निरस्त कर दी गई। सूत्रों का कहना है कि बहिष्कार करने वाले सदस्यों ने कहा कि यह दोनों प्रस्ताव एजेंडे में लाए जाएंगे तभी बैठक होगी, हालांकि उन्हें आश्वासन दिया गया है। अब बैठक 13 दिसंबर को होगी। उसके अगले दिन 14 दिसंबर को सीनेट की बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में हंगामे के आसार हैं। इसके अलावा बैठक जल्द भी खत्म होगी। वह इसलिए कि सिंडिकेट के चुनाव 15 दिसंबर को होंगे।
सिंडिकेट चुनाव में एक मेंबर के लिए होगी रस्साकसी
सुभाष शर्मा व डीएवी ग्रुप एक हो गए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनका गठबंधन अब नहीं टूटने वाला नहीं है। वहीं, डॉ. नवदीप गोयल व अशोक गोयल भी एक हैं। यानी अब सिंडिकेट के चुनाव में दो ग्रुप हो गए है। एक सुभाष शर्मा ग्रुप तो दूसरा डॉ. नवदीप गोयल ग्रुप। अब दोनों ही ग्रुप अपने अपने वोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। छोटे छोटे ग्रुपों को अपने खेमे में करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। एक-एक वोट उनके लिए कीमती है, ऐसे में वह सीनेट में मेंबरों से संपर्क साध रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार दोनों ग्रुपों में कड़ा मुकाबला है। सात-सात सीटें तो दोनों ग्रुप के हिस्से में आती दिख रही हैं। लड़ाई सिर्फ एक वोट के लिए होगी। जिसके पास एक वोट यानी एक मेंबर अधिक होगा उसी का दो तिहाई बहुमत सिंडिकेट में होगा। दोनों ग्रुप किसी से कम नहीं हैं। बैठकों का दौर जारी है। कयास तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि ग्रुपों का जोड़-तोड़ 13 दिसंबर को सिंडिकेट की बैठक के बाद होगा। उसके बाद फिर नजारा बदलेगा।
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पीयू सिंडिकेट की बैठक 11 बजे शुरू होनी थी। सभी 15 मेंबर पीयू पहुंच गए थे। उसी दौरान कुछ मेंबरों ने एजेंडा देखा तो उन्हें अपूर्ण लगा। उनका कहना था कि पुटा उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार की सैलरी व कंप्यूटर साइंस के एक शिक्षक के स्थायीकरण का प्रस्ताव क्यों नहीं शामिल किया गया। इस पर कुछ सदस्यों ने आपत्ति दायर की। कुछ चाहते थे कि बैठक हो, लेकिन जल्दी खत्म हो जाए। यह बात भी नाराज सदस्यों को रास नहीं आई। उसके बाद मेंबर गेस्ट हाउस में काफी देर तक बैठे रहे। आखिर में बैठक निरस्त कर दी गई। सूत्रों का कहना है कि बहिष्कार करने वाले सदस्यों ने कहा कि यह दोनों प्रस्ताव एजेंडे में लाए जाएंगे तभी बैठक होगी, हालांकि उन्हें आश्वासन दिया गया है। अब बैठक 13 दिसंबर को होगी। उसके अगले दिन 14 दिसंबर को सीनेट की बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में हंगामे के आसार हैं। इसके अलावा बैठक जल्द भी खत्म होगी। वह इसलिए कि सिंडिकेट के चुनाव 15 दिसंबर को होंगे।
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सिंडिकेट चुनाव में एक मेंबर के लिए होगी रस्साकसी
सुभाष शर्मा व डीएवी ग्रुप एक हो गए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनका गठबंधन अब नहीं टूटने वाला नहीं है। वहीं, डॉ. नवदीप गोयल व अशोक गोयल भी एक हैं। यानी अब सिंडिकेट के चुनाव में दो ग्रुप हो गए है। एक सुभाष शर्मा ग्रुप तो दूसरा डॉ. नवदीप गोयल ग्रुप। अब दोनों ही ग्रुप अपने अपने वोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। छोटे छोटे ग्रुपों को अपने खेमे में करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। एक-एक वोट उनके लिए कीमती है, ऐसे में वह सीनेट में मेंबरों से संपर्क साध रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार दोनों ग्रुपों में कड़ा मुकाबला है। सात-सात सीटें तो दोनों ग्रुप के हिस्से में आती दिख रही हैं। लड़ाई सिर्फ एक वोट के लिए होगी। जिसके पास एक वोट यानी एक मेंबर अधिक होगा उसी का दो तिहाई बहुमत सिंडिकेट में होगा। दोनों ग्रुप किसी से कम नहीं हैं। बैठकों का दौर जारी है। कयास तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि ग्रुपों का जोड़-तोड़ 13 दिसंबर को सिंडिकेट की बैठक के बाद होगा। उसके बाद फिर नजारा बदलेगा।
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