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पटियालाः लावारिस पशु की टक्कर से हुई थी जोगिंदर सिंह सैनी की मौत, दी गई अंतिम विदाई
Mon, 02 Mar 2020 11:25 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, पटियाला(पंजाब)
अमर उजाला नेटवर्क, पटियाला(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 02 Mar 2020 11:25 AM IST
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जोगिंदर सिंह सैनी
- फोटो : फाइल फोटो
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एथलेटिक्स कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता जोगिंदर सिंह सैनी का 90 वर्ष की उम्र में रविवार को निधन हो गया। रविवार को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। सैनी को भारत के कुछ प्रतिष्ठित ट्रैक एवं फील्ड खिलाड़ियों को निखारने का श्रेय जाता है। वह 1970 से 1990 के दशक के बीच कई वर्षों तक राष्ट्रीय एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच रहे।
एएफआई अध्यक्ष आदिले सुमारिवाला ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि मुझे अपने साथी, अपने मुख्य कोच और मेंटर जेएस सैनी के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। उन्हें एथलेटिक्स से प्यार था और अपने अंतिम दिन तक उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ को योगदान दिया। वह मेरे मित्र और मार्गदर्शक थे और अपनी सलाह से एएफआई अध्यक्ष की मेरी भूमिका में उन्होंने काफी मदद की।
होशियारपुर में जन्मे थे
पंजाब के होशियारपुर जिले में एक जनवरी 1930 को जन्मे सैनी ने विज्ञान में स्नातक किया और शारीरिक शिक्षा में डिप्लोमा और एनआईएस पटियाला से कोचिंग कोर्स किया। उसके बाद वह 1954 में एथलेटिक्स कोच बने। वह 1990 में तत्कालीन भारतीय एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ के मुख्य कोच बने।
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भारतीय एथलेटिक्स में योगदान के लिए सैनी को 1997 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया। वह 1978 एशियाई खेलों में आठ स्वर्ण सहित 18 पदक जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य कोच थे। 'सैनी साहब' के नाम से मशहूर सैनी 2004 तक कोचिंग से जुड़े रहे।
इन दिनों सैनी एएफआई में सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे। सैनी ने 1962 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले गुरबचन सिंह रंधावा को डेकाथलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा उन्होंने दिग्गज मैराथन धावक शिवनाथ सिंह को भी ट्रेनिंग दी।
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एएफआई अध्यक्ष आदिले सुमारिवाला ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि मुझे अपने साथी, अपने मुख्य कोच और मेंटर जेएस सैनी के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। उन्हें एथलेटिक्स से प्यार था और अपने अंतिम दिन तक उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ को योगदान दिया। वह मेरे मित्र और मार्गदर्शक थे और अपनी सलाह से एएफआई अध्यक्ष की मेरी भूमिका में उन्होंने काफी मदद की।
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होशियारपुर में जन्मे थे
पंजाब के होशियारपुर जिले में एक जनवरी 1930 को जन्मे सैनी ने विज्ञान में स्नातक किया और शारीरिक शिक्षा में डिप्लोमा और एनआईएस पटियाला से कोचिंग कोर्स किया। उसके बाद वह 1954 में एथलेटिक्स कोच बने। वह 1990 में तत्कालीन भारतीय एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ के मुख्य कोच बने।
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भारतीय एथलेटिक्स में योगदान के लिए सैनी को 1997 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया। वह 1978 एशियाई खेलों में आठ स्वर्ण सहित 18 पदक जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य कोच थे। 'सैनी साहब' के नाम से मशहूर सैनी 2004 तक कोचिंग से जुड़े रहे।
इन दिनों सैनी एएफआई में सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे। सैनी ने 1962 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले गुरबचन सिंह रंधावा को डेकाथलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा उन्होंने दिग्गज मैराथन धावक शिवनाथ सिंह को भी ट्रेनिंग दी।
90 की उम्र में भी बहुत फिट थे सैनी
वेटर्न एथलेटिक कोच और द्रोणाचार्य अवार्डी जोगिंदर सिंह सैनी (90) की मौत उम्र संबंधी समस्याओं के चलते नहीं, बल्कि आवारा पशु की टक्कर के बाद आई चोटों के कारण हुई है। उनकी पत्नी रणजीत कौर ने बताया कि उनके पति 90 की उम्र में भी बेहद फिट थे। उन्हें उम्र संबंधी कोई बड़ी समस्या नहीं थी। वे रोजाना सैर के लिए जाते थे।
रणजीत कौर ने बताया कि महाशिवरात्रि वाले दिन सुबह सैनी 9 आफिसर्ज एनक्लेव फेज-2 स्थित अपने घर के नजदीक सैर के लिए गए थे। सैर करते समय उन्हें एक आवारा पशु ने पीछे से दो-तीन बार टक्कर मार दी। इस कारण वह गिर गए और उन्हें काफी चोट आई। उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके दोनों बाजूओं में टांके लगे, सिर में भी चोट लगी थी। अस्पताल में भी वह स्ट्रेचर से गिर गए। इन चोटों से सैनी उभर नहीं सके। शरीर में काफी कमजोरी आ गई थी, जिस कारण वह घर में दो-तीन बार गिर गए थे। रविवार सुबह उनका निधन हो गया।
रणजीत कौर ने बताया कि महाशिवरात्रि वाले दिन सुबह सैनी 9 आफिसर्ज एनक्लेव फेज-2 स्थित अपने घर के नजदीक सैर के लिए गए थे। सैर करते समय उन्हें एक आवारा पशु ने पीछे से दो-तीन बार टक्कर मार दी। इस कारण वह गिर गए और उन्हें काफी चोट आई। उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके दोनों बाजूओं में टांके लगे, सिर में भी चोट लगी थी। अस्पताल में भी वह स्ट्रेचर से गिर गए। इन चोटों से सैनी उभर नहीं सके। शरीर में काफी कमजोरी आ गई थी, जिस कारण वह घर में दो-तीन बार गिर गए थे। रविवार सुबह उनका निधन हो गया।
परनीत से मिलकर ज्ञापन देंगे कालोनी निवासी
रणजीत कौर ने बताया कि उनके पति के साथ जो हादसा हुआ, उसे लेकर आफिसर्ज एनक्लेव के निवासियों में काफी रोष है। जल्द ही सारे कालोनी निवासी मिलकर सांसद परनीत कौर को एक ज्ञापन देंगे ताकि लावारिस पशुओं की समस्या का कोई ठोस हल निकाला जाए।
सीएम सिटी में अब तक कई जानें ले चुके हैं लावारिस पशु
सीएम सिटी में लावारिस पशुओं के कारण अब तक कई हादसे हो चुके हैं। हाल ही में गांव बख्शीवाला के पास एक युवा किसान की खेतों से मोटरसाइकिल पर आते वक्त लावारिस पशु के टकराने से मौत हो गई थी। इसके अलावा लक्कड़ मंडी पास एक हॉकर की भी लावारिस पशु के कारण हुए हादसे में मौत हो गई थी। कुछ महीने पहले देवीगढ़ कस्बे के नजदीक एक व्यक्ति की लावारिस पशु द्वारा पेट में सींग मारने से मौत हो गई थी।
सात मार्च को गुरुद्वारा सिंह सभा में भोग समागम
एथलेटिक कोच जोगिंदर सिंह सैनी को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए सात मार्च को माल रोड स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में भोग समागम रखा गया है। रविवार शाम को कोच सैनी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्हें उनके दोनों बेटों सरविंदर सिंह व मनविंदर सिंह ने मुखाग्नि दी।
सीएम सिटी में अब तक कई जानें ले चुके हैं लावारिस पशु
सीएम सिटी में लावारिस पशुओं के कारण अब तक कई हादसे हो चुके हैं। हाल ही में गांव बख्शीवाला के पास एक युवा किसान की खेतों से मोटरसाइकिल पर आते वक्त लावारिस पशु के टकराने से मौत हो गई थी। इसके अलावा लक्कड़ मंडी पास एक हॉकर की भी लावारिस पशु के कारण हुए हादसे में मौत हो गई थी। कुछ महीने पहले देवीगढ़ कस्बे के नजदीक एक व्यक्ति की लावारिस पशु द्वारा पेट में सींग मारने से मौत हो गई थी।
सात मार्च को गुरुद्वारा सिंह सभा में भोग समागम
एथलेटिक कोच जोगिंदर सिंह सैनी को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए सात मार्च को माल रोड स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में भोग समागम रखा गया है। रविवार शाम को कोच सैनी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्हें उनके दोनों बेटों सरविंदर सिंह व मनविंदर सिंह ने मुखाग्नि दी।